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निजी अस्पताल नहीं कर रहे गरीबों का मुफ्त इलाज

New Delhi Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
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नई दिल्ली। राजधानी के निजी अस्पताल न्यायालयों के आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं देने के आदेश का पालन पूरी तरह से नहीं करने वाले 34 अस्पतालों को दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने नोटिस जारी किए हैं। 43 अस्पतालों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को निशुल्क चिकित्सा सुविधा देने के लिए कुछ बिस्तर आरक्षित हैं। इनमें 541 निशुल्क सामान्य और 111 सघन चिकित्सा कक्ष के बिस्तर हैं। स्वास्थ्य मंत्री डा. अशोक कुमार वालिया ने बताया कि दिल्ली सरकार ने अदालत के आदेश का उल्लंघन करने वाले 34 अस्पतालों को नोटिस जारी किए गए हैं। निजी अस्पतालों में कुल 10 प्रतिशत बिस्तर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षित रखने होते हैं। वहीं, कुल बाह्य रोगियों में से 25 प्रतिशत रोगी इन वर्गों के होने चाहिए। इस समय 43 निजी अस्पताल कानूनी रूप से बाध्य हैं कि वे न्यायालयों के निर्देशानुसार गरीबों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराएं।
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उधर, वालिया ने अदालत के आदेश का पालन करने वाले आठ अस्पतालों की सराहना करते हुए कहा कि तीन नए अस्पताल मुफ्त चिकित्सा सुविधा देने वाले अस्पतालों की सूची में शामिल किए गए हैं। सभी सरकारी अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं वे अधिक से अधिक गरीबों को सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार के लिए भेजें। मुफ्त उपचार के प्रावधान को व्यापक रूप से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार की वेबसाइट www.health.delhigovt.nic.in/mis/frmlogin पर मुफ्त बिस्तरों की संख्या प्रदर्शित की गई है।
इन्होंने नहीं किया आदेश का पूरा अनुपालन
धर्मशिला अस्पताल, फोर्टिस एस्कॉट्स इंस्टीट्यूट, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल साकेत, विमहंस, इंडियन स्पानल इंजुरी सेंटर, गुर्जरमल मोदी अस्पताल, प्राइमस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, बतरा अस्पताल, जीवन अनमोल अस्पताल, बेंसअपस अस्पताल, जस्सा राम अस्पताल, रॉकलैंड अस्पताल और फोर्टिस अस्पताल वसंत कुंज।
इन आठ अस्पतालों ने पूरी तरह किया पालन
श्री बालाजी एक्शन इंस्टीट्यूट, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल आईपी एक्सटेंशन, बिमला देवी अस्पताल, वेनू आई इंस्टीट्यूट, विनायक अस्पताल, सर गंगाराम अस्पताल, भगवती अस्पताल और भगवान महावीर स्वामी अस्पताल।
फ्री चिकित्सा देने वाले तीन नए अस्पताल
सीताराम भरतीया इंस्टीट्यूट, जीवोदया अस्पताल और गुरु हरिकिशन अस्पताल।
मामले अभी कोर्ट में लंबित
वालिया ने बताया कि तीन अस्पताल अभी गरीबों को मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा रहे हैं क्योंकि इनके मामले माननीय सर्वोच्च न्यायालय के सामने विचाराधीन हैं। ये नाम हैं मूलचंद, सेंट स्टीफंस और राजीव गांधी कैंसर संस्थान।
कौन उठा सकता है फायदा, पात्रता की शर्तें
ऐसा कोई भी व्यक्ति जो भारत का नागरिक हो और अकुशल मजदूर की न्यूनतम मजदूरी मासिक 7254 रुपये से कम पारिवारिक आय हो। साक्ष्य के तौर पर बीपीएल कार्ड, एएवाई, आरएसबीवाई राशन कार्ड, सक्षम अधिकारी से जारी आय प्रमाणपत्र या सरकारी अस्पताल से रेफर किए गए मरीज के मामले में वह खुद सत्यापित शपथपत्र दे सकता है।

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