डीएमआरसी को नहीं पता कब शुरू होगी एयरपोर्ट मेट्रो

New Delhi Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
नई दिल्ली। हाईस्पीड एयरपोर्ट मेट्रो की सवारी जनता को कब मिलेगी? इसका जवाब न तो डीएमआरसी के पास है और न ही रिलायंस इंफ्रा एयरपोर्ट मेट्रो के पास। शुरुआत से दिक्कत देने वाला यह पहला कॉरिडोर है जो डीएमआरसी तय तारीख पर शुरू नहीं कर सकी थी। पांच महीने देरी से भी इस कॉरिडोर पर परिचालन आधा-अधूरा ही शुरू हुआ था। फिर महज एक साल चार महीने में सिविल कार्य की दिक्कतों के कारण परिचालन बंद करना पड़ा। प्रारंभिक जांच पूरी हो चुकी है लेकिन रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। मरम्मत कार्य अभी तक चल रहा है।
डीएमआरसी की सहायक जनसूचना अधिकारी-एक सुषमा गौड़ ने स्वीकार किया है कि रिलायंस इंफ्रा ने एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर परिचालन सुरक्षा कारणों का हवाला देकर दो दिन के शार्ट नोटिस पर 8 जुलाई को बंद किया। सिविल निर्माण में सामने आई दिक्कतों की प्रारंभिक जांच 15 जुलाई को पूरी हो चुकी है लेकिन अभी तक कोई रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। जो दिक्कतें सामने आई हैं उसे इंजीनियर्स या एक्सपर्ट कितने दिन में दुरुस्त कर लेंगे, यह अभी तय नहीं है। कार्य प्रगति पर है। कब तक परिचालन शुरू होगा, इसकी तारीख नहीं बताई जा सकती क्योंकि कार्य प्रगति पर है।
डीएमआरसी ने 22.7 किमी लंबे हाईस्पीड एयरपोर्ट मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण पर 2700 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। कंपनी के साथ सालाना शुल्क लेने का समझौता 30 वर्ष तक चलेगा। वर्ष 2011-12 में डीएमआरसी को 51 करोड़ रुपये मिले हैं। जबकि अगले वर्ष 2012-13 की राशि अभी तक नहीं मिली है।
रिलायंस इंफ्रा पर 60.37 करोड़ जुर्माना
डीएमआरसी ने रिलायंस इंफ्रा एयरपोर्ट एक्सप्रेस लिमिटेड पर परिचालन देरी से शुरू करने के लिए 60.37 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। अनुबंध की शर्तों के अनुसार कई स्तर पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
दिल्ली मेट्रो ने देश की शान कहे जाने वाली हाईस्पीड मेट्रो को पीपीपी मॉडल पर तैयार किया, लेकिन अनुभव बहुत अच्छे नहीं रहे। सिविल कार्य डीएमआरसी ने किया है। जबकि बाकी कार्य रिलायंस एनर्जी और सीएएफ का है। निजी कंपनी को 30 वर्ष के लिए सौंपा गया है। सेक्शन पर नई दिल्ली और शिवाजी स्टेडियम पर सामान के साथ और धौला कुंआ पर बिना समान के चेक इन सुविधा एवं बोर्डिंग पास दिए जा रहे थे।
डीएमआरसी ने एयरपोर्ट हाईस्पीड मेट्रो कॉरिडोर निर्माण पूरा करने और परिचालन पूर्ण रूप से शुरू करने का लक्ष्य 30 सितंबर, 2010 रखा था। लेकिन निर्माण पूरा होने के बावजूद 23 फरवरी, 2011 को परिचालन शुरू किया जा सका। चेक इन सुविधा प्रारंभ में नहीं दी जा सकी। इतना ही नहीं धौला कुआं और एरोसिटी मेट्रो स्टेशन पब्लिक के लिए नहीं खोला गया। प्रतिघंटा 135 की स्पीड पर डिजाइन कॉरिडोर की शुरुआत 105 किमी प्रतिघंटा पर करने की घोषणा हुई लेकिन उस स्पीड से भी नहीं दौड़ सकी। हालात यह रहे कि धीरे-धीरे घुमाव पर धौला कुआं के पास स्पीड 50 किमी प्रतिघंटा से भी नीचे आ गई। दिक्कत बढ़ती गई और महज 1 वर्ष चार महीने और 10 दिन में परिचालन बंद करना पड़ा।

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