रोजगार के नाम पर ठगे जा रहे हैं युवा

New Delhi Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
गुड़गांव। देश के बड़े इंडस्ट्रियल हब में शुमार साइबर सिटी रोजगार की दृष्टि से देश भर के युवाओं को अपनी ओर बरबस आकर्षित करती है। यही कारण है कि यहां सैकड़ाें युवा रोजगार की चाह में आते हैं। इन बेरोजगार युवाओं को नौकरी मिले या नहीं लेकिन रोजगार के कथित ठेकेदार (प्लेसमेंट संचालक) खूब फलफूल रहे हैं। इन प्लेसमेंट एजेंसियों के ठगी के शिकार युवा इनके चंगुल में फंस अपना समय और धन दोनों बर्बाद करते हैं। इनकी मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए कोई भी सरकारी मशीनरी नहीं है।
इन प्लेसमेंट एजेंसियों के शिकार सिर्फ बाहरी ही नहीं स्थानीय युवा भी होते हैं। हालांकि इनकी संख्या काफी कम हैं। गुड़गांव के बड़े बडे़ छोटे बाजारों, कमर्शियल साइटों और सेक्टरों में सैकड़ों प्लेसमेंट एजेंसियां खुली हुई हैं। नौकरी की तलाश में बाहर से आने वाले युवा ही इनके सॉफ्ट टारगेट होते हैं। जब तक इन्हें पता चलता है कि वह ठगे गए हैं तब तक काफी देरी हो जाती है। अधिकतर मामले में तो पुलिस के पास पहुंचते ही नहीं। जो पहुंचते भी हैं वह निचले स्तर पर ही दबा दिए जाते हैं। ऐसे में पीड़ित युवा वापस अपने घरों को निराश लौटने पर मजबूर हो जाते हैं। इससे प्लेसमेंट संचालकों की हिम्मत बढ़ती जा रही है। अभी अंडमान निकोबार के युवाओं के साथ रोजगार के नाम पर ठगी का मामला प्रकाश में आया है। इस प्रकार के मामले गुड़गांव में लगातार हो रहे हैं।
प्लेसमेंट एजेंसियां वेल एजुकेटेड युवाओं को ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर ठगने लगी हैं। मारुति, सुजुकी और इफ्को में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का मामला गुड़गांव पुलिस के पास तक पहुंच भी चुका है। इसमें बाकायदा एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है। बीटेक और एमटेक युवा भी बड़ी कंपनियों के नाम पर इनके चंगुल में फंस जाते हैं। इन बड़ी कंपनियों के नाम से फर्जी वेबसाइट तैयार कर युवाओं को लुभाने का प्रयास तक आजकल किया जा रहा है।

बिना रजिस्ट्रेशन चल रहीं प्लेसमेंट एजेंसियां
साइबर सिटी में इस समय तकरीबन 1150 प्लेसमेंट एजेंसियां बिना रजिस्ट्रेशन के कारोबार कर रही हैं। प्रशासनिक अंकुश न लग पाने के कारण यह धंधा बढ़ता जा रहा है। इन एजेंसियों के माध्यम से युवाओं को नेशनल और मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी दिलाने के नाम पर लूटा जाता है।
बेबस है गुड़गांव का रोजगार विभाग
गुड़गांव की जिला रोजगार अधिकारी शीला यादव ने बताया कि प्लेसमेंट एजेंसियों पर उनके विभाग का कोई नियंत्रण नहीं है। इस कारण वह इनकी गतिविधियों और कार्यप्रणाली पर नजर नहीं रख पाती। उन्होंने बताया कि इस मामले में सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया है लेकिन अभी तक कोई ऐसा नियम नहीं बन सका है। प्लेसमेंट एजेंसियों पर रोक लगाने के लिए वर्ष 2002 में एक्ट बनाने के लिए राज्य सरकार ने घोषणा की थी, लेकिन अभी तक यह बन नहीं सका
डीसीपी क्राइम महेश्वर दयाल का कहना है कि अगर किसी प्लेसमेंट एजेंसी के खिलाफ कोई शिकायत आएगी तो उसकी जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि नौकरी की तलाश करने वालों को इस दिशा में जागरूक होना होगा। अगर उनके साथ ऐसी घटना होती है तो वह मामले को पुलिस के संज्ञान में लाएं।
दीवारों से शौचालय तक में हैं इनका कब्जा
प्लेसमेंट एजेंसियों की ओर से युवाओं को अपनी ओर खींच कर लाने का पुख्ता इंतजाम किया जाता है। उनका कब्जा दीवाराें से लेकर शौचालय तक है। पोस्टर और पंपलेट प्लेसमेंट एजेंसियों की ओर से जगह-जगह पर लगाए गए हैं। इन पंपलेट में बड़ी-बड़ी कंपनियों में गारंटी के साथ रोजगार मुहैया कराने का दावा किया जाता है।
ऐसे दिखाते हैं युवाओं को सपना
-गुड़गांव में रोजगार के तमाम अवसर मौजूद हैं, एक बार रजिस्ट्रेशन कराओ सारी टेंशन हमारी
-7500 से अधिक औद्योगिक यूनिट किसी में नौकरी लग गई तो लाइफ बन जाएगी
-400 से अधिक आईटी और आईटीईए कंपनियों में भी भरपूर अवसर
-इन सभी कंपनियों में उनके प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से ही होती हैं भर्तियां
-दो से पांच हजार रुपये का रजिस्ट्रेशन शुल्क लिया जाता है जमा कराओ बाद में हजारों कमाओगे
(प्लेसमेंट एजेंसी से बातचीत पर आधारित)

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