पांच को जिंदगी दे अमर हो गई पायल

New Delhi Updated Fri, 05 Oct 2012 12:00 PM IST
नई दिल्ली। सड़क हादसे में ब्रेन डेड हो चुकी पायल पांच लोगों को नई जिंदगी दे गई। पायल अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी आंखें आज भी इस दुनिया को देखेंगी, उसके शरीर के कई अन्य अंग दूसरों के शरीर में जीवित रहेंगे।
बीएल कपूर सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि बच्ची के ब्रेन डेड होने की सूचना उनके माता-पिता को दी गई। इसके बाद उन्होंने कहा कि वह बेटी के अंगों को दान करना चाहते हैं। तब अंग दान की कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई। सड़क हादसे का मामला था इसलिए मेडिको लीगल केस बना। हादसा यूपी के साहिबाबाद में हुआ था लिहाजा वहां की पुलिस से एनओसी लेनी था। बच्ची की मौत दिल्ली में हुई थी लिहाजा यहां के कायदे-कानून को भी फॉलो करना था।
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी, मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के डीन और जीबी पंत अस्पताल के सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष की टीम ने बीएल कपूर अस्पताल का दौरा कर केस की जानकारी ली। उनकी रिपोर्ट के बाद ही अंग दान का रास्ता साफ हो सका। बीएल कपूर अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि पायल की आंख, लिवर और गुर्दे को दूसरे के शरीर में ट्रांसप्लांट कर दिया गया। एक किडनी और लिवर के पार्ट को आर्मी अस्पताल को दे दिया गया।
पायल (बदला हुआ नाम, क्योंकि ऐसा माता-पिता का आग्रह है) को जब बीएल कपूर अस्पताल के डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया तब उसके माता-पिता ने फैसला किया कि बच्ची के अंगों को जरूरतमंदों को दान करेंगे। लेकिन यह इतना आसान नहीं था। इसके लिए बच्ची के माता-पिता और परिजनों ने बड़ी मेहनत की। 28 अगस्त से दो सितंबर तक बच्ची के माता-पिता को अंग दान करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। तब कहीं जाकर दो सितंबर को अंगों को दान कर पाए।
23 अगस्त को साहिबाबाद में बच्ची सड़क हादसे में घायल हुई थी। घटना के बाद उसे वहीं के अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसके बाद 25 अगस्त को दिल्ली के बीएल कपूर अस्पताल में भर्ती कराया गया। 28 अगस्त को बच्ची की हालत खराब हो गई थी और उसे लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था। 28 अगस्त को ही बच्ची को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया था। उसके बाद अंग दान के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। चिकित्सकों ने कहा कि आमतौर पर मौत के बाद चौबीस घंटे तक ही अंगों को सुरक्षित रखा जा सकता है। लेकिन पायल स्वस्थ थी और उम्र भी कम थी इसलिए उसके अंगों को अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सका।
17 वर्षीय पायल के पिता अजय माथुर ने कहा कि जब बेटी को ब्रेन डेड घोषित किया गया तो मैंने सोचा की बच्ची के अंगों को जरूरतमंदोें को दान कर दिया जाए। उन्होंने कहा बेटी तो नहीं रही, लेकिन बेटी की वजह से किसी को जिंदगी मिल जाए तो बहुत अच्छा होगा। अंग दान के लिए सबको आगे आना चाहिए। पायल की मां शोभना बच्ची का नाम लेकर रो पड़तीं हैं। उनका कहना है कि अंग दान को प्रचारित करना चाहिए।

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