अनुशासनात्मक कार्रवाई में दखल की गुंजाइश कम : कोर्ट

New Delhi Updated Mon, 01 Oct 2012 12:00 PM IST
नई दिल्ली। कर्मचारियों के खिलाफ सरकार की ओर से की गई प्रशासनिक और अनुशासनात्मक कार्रवाई में अदालती दखल की संभावना बेहद कम होती है, जब तक कि यह कार्रवाई गलत तरीके से न की गई होे। दिल्ली हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के सिपाही सुरेंद्र द्वारा नशे की हालत में साथी से मारपीट के मामले का निपटारा करते हुए की। सुरेंद्र को मिली सजा में दखल देने से इनकार करते हुए जस्टिस प्रदीप नंदराजोग व जस्टिस मनमोहन सिंह की खंडपीठ ने कहा कि न साक्ष्य अधिनियम के तकनीकी नियम, न तथ्य और न साक्ष्य अनुशासनात्मक कार्रवाई के मामले में लागू होते हैं।
बता दें कि इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, मथुरा में तैनात सीआईएसएफ के सिपाही सुरेंद्र ने 9 दिसंबर 2005 में अपने साथी सिपाही पूरन चंद को नशे की हालत में घायल कर दिया था। इसके बाद सीआईएसएफ ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए दो साल तक सुरेंद्र का वेतन काटने और इस अवधि में कोई वृद्धि न देने का आदेश दिया था। इसके अलावा भविष्य में होने वाली वेतन वृद्धि को भी लंबित करने की बात कही गई थी। गृह मंत्रालय समेत दूसरे अपील प्राधिकरणों ने इस कार्रवाई को बरकरार रखा था। इसके बाद सिपाही सुरेंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट की शरण ली थी।

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