केंद्र पर पड़ीं हैं प्लेट, वाहन मालिक कर रहे हैं वेट

New Delhi Updated Sat, 29 Sep 2012 12:00 PM IST
नई दिल्ली। हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) की अनिवार्यता को पांच महीने बीत गए हैं, लेकिन 1 मई, 2012 के बाद से रजिस्टर पचास फीसदी वाहन मालिक अपनी प्लेट लेने केंद्र पर नहीं पहुंचे। वाहन मालिक या तो बिना नंबर प्लेट वाहन दौड़ा रहे हैं या फिर पुराने चलन की नंबर प्लेट पर भी पैसा खर्च कर रहे हैं। इन सबके पीछे कार डीलर और एचएसआरपी एजेंसी की लापरवाही वजह है। अमर उजाला ने शुक्रवार को एचएसआरपी केंद्रों पर जाकर कारणों की पड़ताल की। इस दौरान साफ हुआ कि कार डीलर पर्ची देने में देरी कर रहे हैं तो एचएसआरपी एजेंसी का सूचना तंत्र दुरुस्त नहीं है।
दिल्ली में 31 जुलाई, 2012 तक 71.30 लाख निजी वाहन समेत 74.19 लाख वाहन रजिस्टर हो चुके हैं। संख्या धीरे-धीरे तेजी से बढ़ रही है। दैनिक 1300 वाहन रजिस्टर हो रहे हैं। इस हिसाब से 1 मई से अभी तक करीब 1.90 लाख वाहन रजिस्टर हो चुके हैं, लेकिन इनमें से 70 हजार वाहन मालिक एचएसआरपी लगवाने नहीं आए। यह संख्या करीब 40 फीसदी है। यही वजह है कि अकेले माल रोड और आईपी डिपो के केंद्र पर दस हजार से अधिक नंबर प्लेट पड़ी हैं। जीके-दो से नंबर प्लेट लगवाने आए ब्रिजभूषण ने बताया कि 3 अगस्त को कार खरीदी थी। फीस लेने वाले ने कहा कि एसएमएस करेंगे, लेकिन नहीं आया। कार डीलर से पूछते रहे लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
यूपी के पूर्व परिवहन मंत्री नरेश अग्रवाल का चालक रामकेवल भी माल रोड सेंटर पर नंबर प्लेट लगवाने पहुंचा था। डीएल 8सी बीआर 7000 नंबर की 30 मई को रजिस्टर हुई थी, लेकिन नंबर प्लेट नहीं लगवाई थी। रामकेवल ने बताया कि हमें पता ही नहीं था कि ऐसी कोई नंबर प्लेट लगवानी है। कार कार में प्लेट लगवाने आए मुनीश ने बताया कि 14 अगस्त को कार खरीदी थी। कार डीलर ने कहा था कि टाइम बहुत लगता है। अब नंबर प्लेट तैयार होने की सूचना मिली तो पहुंचे हैं।
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दो अथॉरिटी सबसे दूर
नई दिल्ली परिवहन कार्यालय (अथॉरिटी-डीएल2) और सराय काले खां परिवहन कार्यालय (डीएल6) में वाहन रजिस्टर कराने वालों को प्लेट लगवाने के लिए लंबा सफर तय करना पड़ रहा है। नई दिल्ली का कार्यालय डीटीसी मुख्यालय के पास आईपी डिपो पर है, लेकिन यहां की नंबर प्लेट माल रोड में लगाई जा रही है। कुछ ऐसा ही हाल सराय काले खां अथॉरिटी का है। इस परिवहन कार्यालय का अधिकार क्षेत्र करोल बाग, पहाड़गंज तक फैला है। यहां जो भी गाड़ी रजिस्टर होगी, उसे एचएसआरपी लगवाने के लिए नोएडा बॉर्डर के पास मयूर विहार फेस-तीन के सेंटर पर जाना पड़ रहा है। वाहन मालिकों का कहना है कि नंबर लगवाने के लिए पूरा एक दिन खराब करना होगा। सरकार को चाहिए कि कार डीलर या अथॉरिटी के नजदीक निश्चित समय पर एचएसआरपी लगाने की व्यवस्था करें। एचएसआरपी लगाने वाली एजेंसी के अधिकारी बताते हैं कि बुराड़ी और मायापुरी में प्लेट बनाई जाती है। सभी केंद्रों पर वहीं से वितरण होता है। 14 अथॉरिटी के लिए 14 केंद्र खोले गए हैं।
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हमारी कोशिश है कि उपभोक्ताओं को दिक्कत न हो। अभी बैकलॉग बहुत ज्यादा हो गया है। सेंटर पर 70 हजार प्लेट पड़ी हैं। अब चालान की बात सामने आई है तो सेंटर पर भीड़ बढ़ी है। कर्मी बढ़ाने के अलावा जल्दी काम करने की ट्रेनिंग दी जाएगी। सूचना तंत्र की दिक्कत है तो उसे भी दूर किया जाएगा।
- यूआर कपूर, ऑपरेशंस निदेशक, रोजमेत्रा (नंबर प्लेट लगाने वाली एजेंसी)
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केंद्रों के फोन नंबर हैं व्यस्त
परिवहन विभाग ने एचएसआरपी का पता लगाने के लिए 15 केंद्रों के इंचार्ज के मोबाइल और लैंडलाइन नंबर के अलावा परिवहन विभाग की वेबसाइट पर केंद्रों के ईमेल आईडी भी दिए गए हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि जब फोन नंबर पर संपर्क किया जाता है तो घंटों फोन मिलाना पड़ता है। केंद्रों के सिर्फ एक-एक नंबर दिए गए हैं जो हमेशा व्यस्त रहता है।
नंबर प्लेट बन गई क्या? यहां करें कॉल
अथॉरिटी कोड संपर्क करें नंबर
डीएल1 अनिल 9650250294, 23819310
डीएल2 अनिल 9650250294, 23819311
डीएल3 गगन 954094460, 29564150
डीएल4 महेश मिश्रा 9717241919, 25613705
डीएल5 रफीक 8802175131
डीएल6 अमित नेगी 9818399304, 22623539
डीएल7 अमित नेगी 9818399304, 22623539
डीएल8 रवि यादव 9899160877,27316355
डीएल9 महेश मिश्रा 9717241919
डीएल10 प्रवीण डागर 8588858468,25453394
डीएल11 रवि यादव 9899160877,27316354
डीएल12 महेश गौड़ 8826666559
डीएल13 रफीक 8802175131, 22572781
डीएल14 संजय शर्मा 9654148405
बुराड़ी (कॉमर्शियल) संजय 9654148405
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क्या कहते हैं उपभोक्ता
बाइक का वीआईपी नंबर लिया था। पर्ची देर से पहुंची। 7 जुलाई को बाइक खरीदी थी, अब जाकर नंबर तैयार हुआ है। मोहन गार्डन से माल रोड 32 किलोमीटर आया हूं। जब आरसी लेने गया तो डीलर ने बताया कि नंबर प्लेट लगवानी जरूरी है। परिवहन विभाग को सूचना तंत्र दुरुस्त करना चाहिए।
- दिव्य शर्मा, बीसीए छात्र
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कार खरीदे 20 दिन हो गए। कार डीलर ने पैसे ले लिए, लेकिन कोई पर्ची नहीं दी। अखबार में पढ़कर पता लगा कि नंबर प्लेट लगानी है, नहीं तो चालान होगा। पहले डीलर को फोन किया तो उसने एजेंसी का नंबर दे दिया। वहां फोन किया तो पता लगा कि नंबर प्लेट तैयार है। करीब डेढ़ घंटा प्लेट लगवाने में लग गया।
-ललित, जहांगीरपुरी
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मैंने कार 29 मई को खरीदी थी। डीलर ने कार के कागज दे दिए लेकिन कह दिया कि नंबर प्लेट लगने में टाइम लगेगा। चालान का पता चला तो प्लेट लगवाने आया। प्लेट लगाना 15-20 मिनट का काम है, लेकिन ढाई घंटा लग गया।
- जितेंद्र, तैमूर नगर
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क्या है हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट
सेंट्रल मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 50 में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट का विवरण है। उसके अनुसार नंबर प्लेट 1 एमएम मोटी एल्यूमिनियम की होगी। कार की प्लेट का साइज 540 गुणा 120 एमएम होगा। जबकि दुपहिया की नंबर प्लेट 200 गुणा 100 एमएम होगी। वहीं, बाइक के अगले हिस्से में लगाई जाने वाली प्लेट का साइज 85 गुणा 245 एमएम होगा। इतना ही नहीं कार में तीसरी नंबर प्लेट की भी व्यवस्था है। नंबर प्लेट पर वाहन नंबर, इंजन नंबर, चेचिस नंबर के अलावा नंबर प्लेट पर एक 12 अंकों का यूनिक नंबर लेजर से लिखा जाता है। प्लेट पर हॉट स्टैंप होलोग्राम, ब्लू रंग से आईएनडी भी लिखा होता है। इतना ही नहीं प्लेट को ऐसे स्नैप पेंच से फिट किया जाता है जो खुलता नहीं टूटता है।
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हाई सिक्योरिटी प्लेट के लाभ
आतंकवादी वारदात में चोरी के वाहनों का नकली नंबर प्लेट लगाकर इस्तेमाल किया जाता है। वाहनों की चोरी भी दिल्ली-एनसीआर में खूब हो रही है। थोड़ी दूर ले जाकर नंबर प्लेट बदल दी जाती है। संसद हमले, मुंबई या दिल्ली बम कांड से मिले सबक और दिल्ली पुलिस की फाइलों में बंद तमाम वारदाताें में चोरी के वाहन के इस्तेमाल को ध्यान में रखें तो यह नंबर प्लेट बहुत कारगर साबित होगी। वाहन चुराने वाले नंबर प्लेट हटाएंगे तो टूट जाएगी। दूसरी नंबर प्लेट नहीं लगाई जा सकेगी।

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