तिमारपुर के होनहार कोरिया में करेंगे कमाल

New Delhi Updated Thu, 20 Sep 2012 12:00 PM IST
नई दिल्ली। पंखों से नहीं, हौसलों से होती है उड़ान। हौसला आफजाई के लिए बात-बात में इस्तेमाल किए जाने वाले इस स्लोगन को सच साबित कर दिखाया है तिमारपुर के झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले सात बच्चों ने। जिन बच्चों ने अब तक ट्रेन में स्लीपर की यात्रा नहीं की थी, बुधवार को सीधे जहाज से कोरिया की राजधानी सियोल के लिए उड़ान भरी। बच्चों की इस कामयाबी से इलाके के लोग बेहद खुश हैं।
दीपक, मुजाइद, नूर मोहम्मद, नीरज, अजय, सौरभ और मोहित बुधवार रात को के-पॉप कोरिया डांस फेस्टिवल-2012 प्रतियोगिता के फाइनल में भाग लेने के लिए एयर इंडिया के विमान से सियोल रवाना हुए। बच्चों की टीम का नाम पाउल-5 है। इसका नेतृत्व दीपक कर रहा है। प्रतियोगिता का फाइनल 21 सितंबर को आयोजित होगा। इसमें विश्व के 11 देशों की टीमें भाग ले रही हैं।
सौरभ और मोहित कहते हैं कि कभी ट्रेन के स्लीपर में भी नहीं बैठे और आज विमान से जा विदेश जा रहे हैं, तो बहुत अच्छा लग रहा है। हालांकि विदेश में लोगों के साथ उठना-बैठना और वहां के लोगों से बातचीत करने को लेकर इनके मन में थोड़ी उलझन है, क्योंकि दीपक और मुजाइद के अलावा बाकी बच्चों को अंग्रेजी नहीं आती।
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ऐसे मिली प्रेरणा
पाउल-5 के कैप्टन दीपक ने बताया कि माइकल जैक्सन की मौत के बाद उसने उसका डांस टेलीविजन पर देखा था। तभी से उसने डांस करना शुरू किया और अपने दोस्तों को भी प्रेरित किया। किंग्सवे कैंप स्थित सुमन राज स्पार्क डांस एकेडमी में उसने डांस सीखा और वहां आने वाले बच्चों को भी सिखाया। एकेडमी में आने वाली डीयू की एक छात्रा ने दीपक को इस डांस फेस्टिवल के बारे में बताया था। उसके बाद उसने अपने ग्रुप डांस का वीडियो यू-ट्यूब पर अपलोड कर दिया। कुल 71 डांस वीडियो में से 15 का चयन किया गया। जेएनयू के ऑडिटोरियम में प्रतियोगिता हुई, जिसमें उसका ग्रुप विजेता बना।
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बड़ी मुश्किल से बना पासपोर्ट
इन होनहार बच्चों के माता-पिता बेहद गरीब हैं और फैक्टरी या किसी अन्य काम में लगे हैं। घर चलाने के लिए बच्चों से भी काम लिया जाता है। बच्चे शादी-पार्टी में वेटर का काम करते हैं और वहां बजने वाले गानों पर डांस करते हैं। पासपोर्ट के लिए घर वालों ने बड़ी मुश्किल से 2500 रुपये का इंतजाम किया। पासपोर्ट से पहले जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए भी पांच-पांच सौ खर्च करने पड़े। बच्चे खुश हैं कि कोरिया जाने-आने और वहां रहने का सारा खर्च वहां का दूतावास उठा रहा है।
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इंडिया गॉट टैलेंट और डीआईडी भी गए
कैप्टन दीपक का कहना है कि वह इंडिया गॉट टैलेंट में भी गया था। अंतिम दौर तक पहुंचने के बाद भी उसे किसी कारण से जजों के सामने परफॉर्म करने का मौका नहीं दिया गया। डांस इंडिया डांस में वह चौथे राउंड तक पहुंच गया था, लेकिन वहां भी किस्मत ने साथ नहीं दिया।
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पुलिस को समझ नहीं आई पहेली
तिमारपुर की झुग्गी-झोपड़ियों से बच्चे सियोल क्यों और कैसे जा रहे हैं, दिल्ली पुलिस के समझ में नहीं आया। यही वजह है कि जिन बच्चों को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सियोल के लिए उड़ान भरनी थी, वे अपना पासपोर्ट वेरिफिकेशन के लिए तिमारपुर थाने की तीसरी मंजिल पर बैठ कर इंतजार कर रहे थे। दोपहर दो बजे के करीब पुलिस ने वेरिफिकेशन की औपचारिकताएं पूरी कीं। बच्चों को इस बात का दुख था कि दस सितंबर को पासपोर्ट बन जाने के बाद भी पुलिस ने समय पर वेरिफिकेशन नहीं किया। इसकी वजह से बुधवार को परिजनों और पड़ोसियों की जगह कई घंटे पुलिस के साथ थाने में बिताने पड़े।

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