45 लाख मेट्रो टोकन चोरी, 10 करोड़ का नुकसान

New Delhi Updated Sun, 16 Sep 2012 12:00 PM IST
मेट्रो रेल कारपोरेशन की सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच 45.68 लाख टोकन चोरी/गायब हो गए हैं। इससे डीएमआरसी को करीब 10 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसे डीएमआरसी की लापरवाही कहें या यात्रियों का मेट्रो टोकन के प्रति प्रेेम दैनिक करीब 1500 टोकन यात्री अपने साथ घर ले जा रहे हैं। भीड़ वाले स्टेशनों पर टोकन चोरी की घटनाएं ज्यादा हो रही हैं। यह हालात तब हैं जब महज 35 फीसदी यात्री टोकन लेकर सफर करते हैं। बाकी स्मार्ट कार्ड से सफर करते हैं। डीएमआरसी के जीएम एसके सिन्हा ने स्वीकार किया है कि तमाम कोशिश के बावजूद 25 दिसंबर, 2002 से 30 जून, 2012 के बीच 45,67,767 टोकन गायब हो गए हैं। औसत 7.05 लाख टोकन की बिक्री दैनिक होती है। यात्रियों को सफर के लिए टोकन खरीदकर या स्मार्ट कार्ड से सफर करने की सुविधा है। गेट से बाहर निकलने के लिए टोकन ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन गेट में डालना होता है।
डीएमआरसी के आंकड़े को आधार मानें तो 3467 दिन में 45.68 टोकन गायब हुए हैं। इस हिसाब से दैनिक 1317 टोकन गायब हुए। मेट्रो परिचालन की शुरुआत 25 दिसंबर, 2002 को हुई थी उस समय महज 8.5 किलोमीटर का नेटवर्क था। दैनिक यात्री संख्या 30 हजार थे जो अब बढ़कर 21 लाख पहुंच गई है। नेटवर्क 190 किमी का है। अधिकारी स्वीकार करते हैं कि अब दैनिक टोकन गायब होने का आंकड़ा 1500 तक पहुंच गया है। डीएमआरसी ने शुरुआती दौर में टोकन थैलेस फ्रांस कांट्रैक्टर से खरीदे थे जो जापान से आयातित थे। उस समय एक टोकन की लागत करीब 45 रुपये आती थी। अब टोकन भारत में बन रहे हैं। मेट्रो अभी नोएडा और मुंबई से टोकन मंगा रही है जिनकी औसत कीमत करीब 20 रुपये है। इस हिसाब से करीब 10 करोड़ रुपये का नुकसान मेट्रो टोकन गायब या चोरी होने से हुआ है।
कैसे चोरी/गायब होते हैं टोकन
स्टेशन के पेड एरिया से बाहर निकलने के लिए ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन गेट में टोकन डालना होता है। ग्रुप में जाने वाले यात्री एक टोकन डालकर दो लोग साथ निकल आते हैं। शुरुआती दौर में मेट्रो की फुल प्रूफ व्यवस्था जांचने और घर में टोकन रखने के शौक के कारण टोकन गायब हुए थे। कई बार मेट्रो की खराबी के समय भी अफरातफरी में लोग टोकन लेकर बाहर आ जाते हैं। यही वजह है कि टोकन जमा करने के लिए रखे गए बॉक्स में भी लोग टोकन वापस नहीं डालते।
फायदेमंद है स्मार्ट कार्ड
डीएमआरसी यात्रियों को स्मार्ट कार्ड से सफर करने पर जोर दे रही है। कार्ड में न सिर्फ यात्रियों को 10 फीसदी छूट दी जाती है, बल्कि मेट्रो को टोकन चोरी का खतरा भी नहीं रहता। अभी तक डीएमआरसी 73.56 लाख स्मार्ट कार्ड बेच चुकी है। कार्ड 100 रुपये से एक हजार रुपये तक रिचार्ज करवाया जा सकता है। हालांकि, स्मार्ट कार्ड अपठनीय या क्षतिग्रस्त हो जाता है तो 50 रुपये की सुरक्षा राशि वापस नहीं की जाती है। कार्ड को मेट्रो फीडर से भी जोड़ दिया गया है।
टोकन चोरी रोकने के लिए प्रयास
- स्टेशनों के निकास पर गार्ड तैनात हैं जो ध्यान रखते हैं कि कोई टोकन लेकर बाहर न जाए।
- टोकन के साथ गेट से बाहर जाते हुए पकड़े जाने पर 200 रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
- उड़नदस्ते टोकन चोरी पर निगरानी रखते हैं और दंडित करते हैं।
- स्टेशनों पर अतिरिक्त टोकन एकत्र करने वाले बॉक्स रखे गए हैं।
मेट्रो में किस रफ्तार से बढ़े यात्री
- 6.5 लाख, मई 2007
- 13.59 लाख, जनवरी 2011
- 20.94 लाख, जून 2012
ज्यादा भीड़ वाले स्टेशन
राजीव चौक, कश्मीरी गेट, यमुना बैंक, लक्ष्मी नगर, आनंद विहार, केंद्रीय सचिवालय।

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