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अनधिकृत निर्माण पर 50 फीसदी तक जुर्माना हो

New Delhi Updated Fri, 31 Aug 2012 12:00 PM IST
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नई दिल्ली। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने अनधिकृत कॉलोनियों के नियमन की पहली सूची फाइनल करने की घोषणा कर दी है, लेकिन एक दिसंबर, 2011 को जो रिपोर्ट ललिता पार्क हादसे पर जस्टिस (सेवानिवृत्त) लोकेश्वर प्रसाद ने दी, उसका ध्यान नहीं रखा गया। अनधिकृत कॉलोनियों के नियमन में सख्ती और भारी जुर्माना लगाने की सिफारिश की गई है। सरकार जमीन पर अनधिकृत निर्माण का न सिर्फ बाजार शुल्क वसूला जाना चाहिए बल्कि 50 फीसदी तक जुर्माना भी लेना चाहिए। अनधिकृत कॉलोनी बसने से रोकने के टिप्स अभी तक फाइलों से बाहर नहीं आए हैं।
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नवंबर, 2010 में ललिता पार्क में बिल्डिंग गिरने से 71 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 65 लोग घायल हुए थे। जस्टिस लोकेश्वर प्रसाद की कमेटी ने सरकार को दिसंबर, 2011 में रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट 21 मार्च, 2012 को विधानसभा में पेश की गई। इसमें साफ किया गया है कि 1961 में110, 1969 में 101 और 1977 में 567 अनधिकृत कॉलोनियों का नियमन किया गया है, लेकिन जुर्माना बहुत कम वसूला गया। इससे अनधिकृत कॉलोनियां बसाने या अवैध निर्माण का डर खत्म हो गया है।
रिपोर्ट में साफ किया है कि अनधिकृत कॉलोनी और अनधिकृत नियमित कॉलोनी की इमारतें सुरक्षित नहीं हैं। इन कॉलोनियों में मकान मालिक शुरू में एक मंजिल का मकान बनाता है फिर बिना धीरे-धीरे ऊंचाई बढ़ाता है। इससे मकान कमजोर हो जाता है। यहां किराए के मकान में क्षमता से अधिक लोग रहते हैं। वहीं अरबन प्लानिंग से जुड़े विशेषज्ञ बताते हैं कि जब सरकार ने रिपोर्ट बनवाई तो उस पर अमल क्यों नहीं। यहां तक सरकारी अधिकारी मान रहे हैं कि रिपोर्ट विभागों तक पहुंची ही नहीं, न ही कोई कार्रवाई या दिशानिर्देश दिए गए।
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अनधिकृत कॉलोनियों को रोकने की जरूरत
रिपोर्ट में साफ किया गया है कि अनधिकृत कॉलोनियों को बसने से पहले रोकने की जरूरत है। जो कॉलोनियां बस गई हैं उन्हें नियमित करने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है। लेकिन नियमन में जमीन की मार्केट कीमत के अलावा जुर्माना वसूलने से ऐसी कॉलोनियां बसनी बंद होंगी। इतना ही नहीं सरकारी जमीन पर बसी कॉलोनी के लिए जब तक मार्केट कीमत, 20 या 50 फीसदी जुर्माना और विकास शुल्क न दे दें तब तक कॉलोनी नियमित नहीं की जानी चाहिए।
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ऐसे लग सकती है रोक
- स्थानीय निकाय को अतिरिक्त स्टाफ देकर मजबूत करना चाहिए।
- स्थानीय निकाय और डीडीए की विशेष यूनिट को रिमोट सेंसिंग सेटेलाइट इमेजरी और जीआईएस की सुविधा होनी चाहिए। इससे अनधिकृत निर्माण की निगरानी आसान होगी।
- एमसीडी के पास समर्पित पुलिस फोर्स होनी चाहिए। जिसके पास नियमों को तोड़ने पर एफआईआर दर्ज करने की शक्ति हो ताकि अवैध निर्माण गिरा सके।
- एनफोर्समेंट की सेंट्रलाइज्ड मोबाइल टीम हो ताकि अनधिकृत निर्माण और विकास के खिलाफ कार्रवाई कर सकें।
- कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय हो और निर्माण शुरू होने की प्रारंभिक अवस्था में रिपोर्ट जरूरी।
- अधिग्रहीत जमीन की फोटो सार्वजनिक सूचना में दी जानी चाहिए और इंटरनेट पर उसका मैप होना चाहिए।
- आरडब्ल्यूए को अनधिकृत निर्माण की रिपोर्ट से जोड़ा जाए।
- अनधिकृत निर्माण कराने वाले बिल्डरों के खिलाफ दिल्ली डेवलपमेंट एक्ट की धारा 29 के तहत केस दर्ज करके सख्त सजा दिलाई जाए।
- नियोजित तरीके से सेटेलाइट टाउन बनाए जाएं जिसे कार्यस्थलों से जोड़ा जाए। तभी दिक्कत दूर हो सकती है।

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