डीयू और यूजीसी को हाईकोर्ट का नोटिस

New Delhi Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
नई दिल्ली। राजधानी के कॉलेजों में लेक्चचर व अन्य टीचिंग स्टाफ पूरे सप्ताह में मात्र चार से पांच घंटे ही पढ़ाता है, जबकि तय नियमों के अनुसार उन्हें प्रति सप्ताह 40 घंटे पढ़ाना चाहिए। इतने कम समय शिक्षण कार्य होने का एक मुख्य कारण शिक्षकों का कॉलेज में न आना है। इंडियन काउंसिल ऑफ लीगल एंड एडवाइज द्वारा हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में यह बात कही गई। याचिका के आधार पर कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को नोटिस जारी कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न शिक्षिण कार्य में लगे स्टाफ की हाजिरी बायोमैट्रिक सिस्टम से जरूरी कर दी जाए। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश ए के सीकरी व न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलो की खंडपीठ ने 19 सितंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
याची के अधिवक्ता आर के सैनी ने कहा कि यूजीसी द्वारा तय नियमों के तहत विश्वविद्यालय और कॉलेज में 180 दिन पढ़ाई के लिए अनिवार्य है। प्रति सप्ताह करीब 40 घंटे पढ़ाई आवश्यक है, जबकि वर्तमान में छात्रों को मात्र चार से पांच घंटे ही पढ़ाया जा रहा है। हर शिक्षक को कम से कम पांच घंटे कॉलेज में रहना अनिवार्य है, मगर ऐसा नहीं हो रहा है और न ही उनकी हाजिरी का सिस्टम ठीक है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2009 में डीयू ने हाजिरी सिस्टम के लिए बायोमैट्रिक सिस्टम शुरू किया था, मगर डूटा के विरोध के चलते विश्वविद्यालय ने निर्णय वापस ले लिया था। यह सिस्टम अन्य स्टाफ के लिए लागू है, लेकिन शिक्षकों को इससे छूट दे दी गई है। सैनी ने अदालत से कहा कि पढ़ाई बिना किसी बाधा के हो और विधिवत शिक्षण कार्य हो सके। इसे ध्यान में रखते हुए शिक्षकों की उपस्थिति बायोमैट्रिक सिस्टम से जरूरी की जाए।

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