बंदरों को पकड़ने में एनजीओ बाधा

New Delhi Updated Thu, 23 Aug 2012 12:00 PM IST
नई दिल्ली। राजधानी में बंदरों के आतंक के बावजूद एमसीडी सहित कोई भी निकाय बंदरों को पकड़ने में रुचि नहीं ले रहा है। पशु प्रेमी एनजीओ की आपत्ति और बंदरों को रखने की समस्या के चलते एमसीडी अधिकारी भी अदालत का आदेश आते ही बंदराें को पकड़ने का अभियान शुरू तो कर देते हैं लेकिन कुछ दिनों में ही अभियान दम तोड़ देता है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद वर्ष 2007 में एमसीडी व एनडीएमसी ने बंदरों को पकड़ने के लिए जोर-शोर से अभियान शुरू किया और बंदरों को पकड़कर असोला स्थित भाटी माइंस में पहुंचाया। रिज क्षेत्र के अलावा जहां अधिक बंदर थे वहां पिंजरे भी लगाए गए। इसी बीच बंदरों को पकड़ने के तरीके पर कई एनजीओ ने आपत्ति जताई तो बंदर पकड़ने वाले भाग खड़े हुए। बंदरों को खाना देने वालों ने भी इस अभियान पर नाराजगी जताई। आखिरकार एमसीडी व एनडीएमसी ने जगह-जगह ड्रम रखकर लोगों को खाना डालने की सुविधा देते हुए आश्वासन दिया कि यह भाटी माइंस में पहुंचाया जाएगा। दोनों निकायों ने बंदर पकड़ने के लिए विशेषज्ञों की सेवा के तहत एक बंदर पकड़ने पर साढ़े चार सौ रुपये की राशि बढ़ाकर छह सौ कर दी लेकिन जिस प्रकार पशु प्रेमी एनजीओ इन लोगों पर मुकदमे दर्ज करवाने लगे तभी से अधिक पैसे देने के बावजूद बंदरों को पकड़ने वाले अपनी सेवा देने में कतराने लगे हैं। अब एमसीडी बंदर पकड़ने के लिए राशि बढ़ाकर आठ सौ रुपये करने जा रही है, लेकिन संदेह है कि इस राशि पर भी बंदर पकड़ने वाले मिल जाएंगे।

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