Òकंगारू कोर्टÒ लोकतंत्र के लिए खतरा

New Delhi Updated Tue, 21 Aug 2012 12:00 PM IST
नई दिल्ली। रोहिणी जिला अदालत ने सामूहिक दुष्कर्म मामले में गवाहों पर दबाव बनाने वाले शख्स राजेश के खिलाफ कार्रवाई करने का प्रशांत विहार थाने के एसएचओ को निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि कंगारू कोर्ट (जहां कानून और न्याय का कोई मोल नहीं होता) और उनके फरमान भारतीय लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। अतिरिक्तसत्र न्यायधीश कामिनी लाउ ने अपने आदेश में कहा कि ऐसे स्वयंभू नेताओं को अदालतों पर कब्जा करने व गवाहों को धमकी देकर इंसाफ की हत्या करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
बता दें कि मुखर्जी नगर इलाके के एक नेता राजेश ने सामूहिक दुष्कर्म की पीड़िता व उसके परिजनों को गवाही देने से रोका था। साथ ही आरोपियों के साथ समझौता करने के लिए दबाव डाला था। इतना ही नहीं राजेश ने गवाहों को बीमारी के नाम पर सुनवाई के लिए अगली तारीख लेने का भी दबाव बनाया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दुष्कर्म व यौन शोषण के मामले में आरोपियों के बरी होने के पीछे समाज का नजरिया व इस तरह के स्वयंभू नेताओं का दखल जिम्मेदार है, जो पीड़िता के परिजनों को सामाजिक बहिष्कार का डर दिखाकर आरोपियों के साथ समझौता करने के लिए दबाव बनाता है।

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