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दिल्ली नगर निगम : 2011 की जनगणना के आधार पर रिजर्व वार्ड की संख्या तय, चुनाव प्रक्रिया में तेजी

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 12 Sep 2022 05:36 AM IST
सार

MCD :  मंत्रालय ने एमसीडी के कुल और अनुसूचित जाति के वार्डों की संख्या तय कर दी है। मंत्रालय ने एमसीडी के वार्डों की संख्या 250 तय की है। इनमें से अनुसूचित जाति के लिए 42 वार्ड आरक्षित करने की अधिसूचना जारी की है।  एमसीडी में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण है।

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mcd - फोटो : amar ujala
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विस्तार

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एमसीडी के गठन के बाद उसके चुनाव कराने की प्रक्रिया तेज कर दी है। मंत्रालय ने एमसीडी के कुल और अनुसूचित जाति के वार्डों की संख्या तय कर दी है। मंत्रालय ने एमसीडी के वार्डों की संख्या 250 तय की है। इनमें से अनुसूचित जाति के लिए 42 वार्ड आरक्षित करने की अधिसूचना जारी की है। एमसीडी में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण है। मंत्रालय ने वर्ष 2011 की जनगणना के आकड़ों के आधार पर आरक्षित वार्डों की संख्या तय  की है।



केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तीनों नगर निगमों का विलय करके एमसीडी का गठन करने के दौरान वार्डों की संख्या 272 से कम करके 250 करने का निर्णय लिया था। इसके बाद मंत्रालय ने एमसीडी के वार्ड बनाने के लिए परिसीमन आयोग का गठन किया। साथ ही आयोग को 250 वार्ड बनाने का आदेश दिया।  इस संबंध में मंत्रालय ने शनिवार को अधिसूचना जारी की है। 


वर्ष 2011 में एमसीडी के अधिकार क्षेत्र की 16418663 जनसंख्या थी और उनमें से 2746223 (16.72 प्रतिशत) जनसंख्या अनुसूचित जाति की थी। अनुसूचित जाति की जनसंख्या के अनुसार वार्ड, विधानसभा और लोकसभा क्षेत्र आरक्षित करने का प्रावधान है। इस कारण एमसीडी के 16.72 प्रतिशत ही वार्ड अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किए जा सकते है। लिहाजा एमसीडी के 250 वार्डों में से 41.8 वार्ड अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो सकते थे। यह आंकड़ा 41.5 से अधिक होने के कारण अनुसूचित जाति के लिए 42 वार्ड आरक्षित किए गए है।

टिकट के लिए दावेदारों में हो सकती है मारामारी

एमसीडी के वार्डों की संख्या 272 से कम करके 250 करने का असर सामान्य वर्ग के साथ-साथ अनुसूचित जाति पर भी पड़ा है। एमसीडी में 22 वार्डों कम करने पर 18 वार्ड सामान्य वर्ग और चार वार्ड अनुुसूचित जाति के कम हो गए। हालांकि, सामान्य वर्ग व अनुसूचित जाति के वार्डों के साथ-साथ दोनों वर्गों में महिलाओं के लिए आरक्षित होने वाले वार्डों का निर्णय एमसीडी चुनाव की घोषणा होनेे से कुछ दिन पहले होगा।

एमसीडी में वार्डों की संख्या कम होने का खामियाजा सामान्य वर्ग व अनुसूचित जाति के नेताओं को भुगतना पड़ेगा और उनको चुनाव लड़ने के लिए टिकट के लिए अपनों के साथ दो-दो हाथ करने पड़ेंगे, क्योंकि अब दोनों वर्गों के वार्डों की संख्या कम हो गई है। इस कारण कम होने वाले वार्डों का इलाका दूसरे वार्डों में शामिल होगा और इन वार्डों में टिकटार्थियों के साथ-साथ उम्मीदवारों की संख्या में भी इजाफा होने की संभावना रहेगी। खास तौर पर पार्षद रह चुके और गत चुनाव में किस्मत आजमाने वाले नेता हर हाल में टिकट प्राप्त करना चाहेंगे और कई वार्डों में एक ही दल के कई ऐसे नेता टिकट के लिए आमने-सामने होंगे।

उधर, मंत्रालय ने दिल्ली की वर्ष 2011 की जनसंख्या के तहत ही एमसीडी में अनुसचित जाति के लिए वार्डों की संख्या तय की है। वर्ष 2007 में एमसीडी व 2012 में तीनों नगर निगम में 272 वार्ड थे और उनमें से 46 वार्ड अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किए गए थे, जबकि अब एमसीडी में 250 वार्ड कर दिए हैं। इनमें 42 वार्ड अनुुसूचित जाति के लिए आरक्षित होंगे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस वर्ष अप्रैल में तीनों नगर निगमों का विलय कर एमसीडी का गठन करने के दौरान वार्डों की संख्या 272 से कम करके 250 करने का एलान किया था।

महिलाओं के लिए वार्ड आरक्षित करने में कोई दिक्कत नहीं होती : दिल्ली राज्य चुनाव आयोग को दोनों वर्गों की महिलाओं के लिए वार्ड आरक्षित करने में कोई दिक्कत नहीं होती है। वर्ष 1997 से 2012 तक एमसीडी में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था थी। आयोग नेे वर्ष 1997 में ड्रा के तहत महिलाओं के वार्ड तय किए थे, जबकि वर्ष 2007 में वार्ड नंबर तीन से महिलाओं के लिए वार्ड आरक्षित करने की शुरुआत की थी। 

आरक्षित होने वाले वार्डों का निर्णय चुनाव आयोग करेगा
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अनुसूचित जाति के लिए केवल वार्डों की संख्या तय की है, लेकिन अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने वाले वार्डों के नाम के मामले में दिल्ली राज्य चुनाव आयोग निर्णय लेगा। इस संबंध में एमसीडी चुनाव का एलान करने से कुछ समय पहल आयोग अधिसूचना जारी करेगा। अभी तक आयोग ने अनुसूचित जाति के वार्ड तय करने के लिए अलग-अलग फार्मूला अपनाया था। वर्ष 1997 में ड्रा के माध्यम से वार्ड आरक्षित किए थे और वर्ष 2007 में अनुसूचित जाति बहुल वार्ड आरक्षित किए गए थे, लेकिन एक विधानसभा क्षेत्र में अधिकतम दो वार्ड आरक्षित करने का फार्मूला अपनाया था। वहीं, वर्ष 2012 में एक विधानसभा क्षेत्र में एक वार्ड आरक्षित करने का फार्मूला अपनाया गया था, इस तरह 46 विधानसभा क्षेत्रों में वार्ड आरक्षित हुए थे, जबकि वर्ष 2017 में अनुसूचित जाति बहुल वार्डों को आरक्षित किया गया था। 
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