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कोर्ट के संज्ञान से पूर्व आरोपपत्र लीक होना अपराध की श्रेणी में : हाईकोर्ट

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 05 Mar 2021 10:22 PM IST
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने पूर्वी दिल्ली हिंसा मामले में दायर पूरक आरोपपत्र पर अदालत के संज्ञान लेने से पहले ही उसे मीडिया में लीक करने पर दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा यह अपराध की श्रेणी में आता है। अदालत ने पुलिस आयुक्त को इस अपराध के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 25 मार्च तय की है।
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न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा यह गंभीर मामला है। अदालत ने कहा कि यह साबित हो चुका है कि आरोपपत्र से जुड़े तथ्यों को जानबूझ कर मीडिया में लीक किया गया। उन्होंने दिल्ली पुलिस के वकील से कहा कि आपको यह पता लगाना ही होगा कि यह तथ्य किसने लीक किए। अदालत ने पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि पता करें कि मीडिया को जानकारी लीक करने वाले व्यक्ति कौन हैं।

अदालत ने दिल्ली पुलिस के अधिवक्ता अमित महाजन के उस तर्क को खारिज कर दिया कि पूरक आरोपपत्र के तथ्यों को पुलिस ने मीडिया में लीक नहीं किया था, ऐसे में पुलिस पर जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती।
अदालत ने कहा आरोपपत्र पुलिस अधिकारी के पास एक संपत्ति के रूप में था। यदि आपके अधिकारी ने इसे लीक किया तो यह अधिकारों का दुरुपयोग है। यदि अधिकारी ने मंजूरी के लिए किसी अन्य को सौंपा था तो यह आपराधिक विश्वास का उल्लंघन है। इतना ही नहीं अदालत ने कहा कि यदि मीडिया ने इसे स्वयं लिया तो यह चोरी है। यानि स्पष्ट है कि किसी भी प्रकार से लीक हुआ तो यह एक अपराध ही है।
अदालत जामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें जांच एजेंसी पर उनके बयानों को मीडिया में लीक करने का आरोप लगाया है। याची के अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा कि हाल ही में पुलिस ने मामले में अदालत के समक्ष पूरक आरोपपत्र दायर किया और अगले ही दिन मीडिया में सभी तथ्यों का खुलासा हो गया। उन्होंने कहा न तो प्रतियां आरोपियों को मिली न ही अदालत ने उस पर संज्ञान लिया था।
अदालत ने कहा निचली अदालत को पूरक आरोपपत्र पर संज्ञान लेना था लेकिन उससे पहले ही उसे मीडिया में तथ्यों के लीक मुद्दे पर आदेश पारित करना पड़ा। हाईकोर्ट ने कहा कि पहले के आदेश में साफ था कि आरोप तय होने तक कोई मीडिया ब्रीफिंग नहीं होगी। अदालत ने पुलिस की ओर से पेश अधिवक्ता से कहा कि आप इस मुद्दे पर अपनी रिपोर्ट शपथपत्र सहित पेश करें। उसके बाद हम देखेंगे कि क्या कार्रवाई की जानी है।
अदालत ने कहा हम देखेंगे कि वे अप्रत्यक्ष रूप से या प्रत्यक्ष रूप से क्या कर सकते हैं। अदालत ने पुलिस को चेतावनी देते हुए कहा कि आप पहले की तरह जांच न करें, आपको याचिकाकर्ता के वकील के सवालों का जवाब देना ही होगा। अदालत ने पिछली सुनवाई में विजिलेंस के विशेष आयुक्त की रिपोर्ट पर असहमति जताते हुए उसे रद्दी के कागज के समान बताते हुए पुलिस को कड़ी फटकार लगाई थी।
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