पतियों को चुनाव जिताने के लिए पत्नियो ने कसी कमर

अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 23 Nov 2013 01:13 PM IST
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चार दिसंबर को होने वाले दिल्ली के चुनावों में ’दमदार’ प्रत्याशियों का साथ देने को पत्नियों ने कमर कस ली है।  चुनाव की रणभेरी बजते ही पति के माथे जीत का सेहरा बांधने के लिए पत्नियों ने कमान थाम ली है।
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पदयात्रा से लेकर बैठकों, सभाओं, घरेलू मैनेजमेंट और जनसंपर्क तक में पत्नियां अपने दांव चल रही हैं। इस बार चुनावी दौड़ में मुकाबला सिर्फ प्रत्याशियों का ही नहीं है, बल्कि पत्नियों की चुनावी रणनीति और साख का भी है।
विरोधी के साथ उसकी पत्नी को धूल चटाने की कोशिश में जुटीं प्रत्याशियों की पत्नियों से मुखातिब हुए संवाददाता प्रिया गौतम और फोटोग्राफर अनिल कुमार।

सीएम इन वेटिंग की मैडम का अंदाज सबसे जुदा
आप अगर चाहती हैं कि आपका भाई मुख्यमंत्री बने तो इस बार अपने भाई को वोट देंगी ना। ये शब्द थे जगतपुरी के महर्षि वाल्मीकि भवन में आयोजित बैठक में घरेलू महिलाओं को संबोधित कर रहीं भाजपा के मुख्यमंत्री पद के साथ कृष्णा नगर विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी डॉ. हर्षवर्धन की पत्नी डॉ. नूतन के।

बिना किसी सगे-संबंधी के अकेले दम पर महिलाओं में भाजपा को प्रदेश में लाने का मंत्र फूंक रहीं नूतन ने बताया कि रुटीन बहुत हैक्टिक हो गया है वे दिन में दो बार सुबह 8 से 11 और शाम को 4 से 7 बजे तक क्षेत्र में राउंड लगाती हैं। वहीं 11 से 1 और 2 से 4 बजे तक बैठकें करती हैं। उन्होंने बताया कि हर्ष के पास समय कम होने के चलते गुरु पर्व, तुलसी विवाह, शोक सभाओं और शादियों में जाने की जिम्मेदारी भी नूतन के कंधों पर ही है।

पैदल यात्रा और जनसंपर्क कर जोड़ रहीं लोगों को गुरवीन
रों में स्पोर्ट्स शू, एक युवा जैसी फुर्ती और आंखों में हर वक्त घूमती प्रचार की रणनीति, ऐसे जोश की बानगी देखने को मिली गांधी नगर से कांग्रेस प्रत्याशी अरविंदर सिंह लवली की पत्नी गुरवीन कौर में। ढोल-नगाड़ों के साथ राजगढ़ एक्सटेंशन में दौरे के लिए निकल रहीं गुरवीन ने बेहद जल्दी में कुछ सवालों के जवाब दिए।

उन्होंने बताया कि वे ढाई-ढाई घंटे के दो राउंड करती हैं। एक दोपहर के भोजन से पहले और एक भोजन के बाद। इसमें सहयोग के लिए गुरवीन की भाभी और ननद भी उनका सहयोग कर रही हैं। उन्होंने बताया कि जनसंपर्क में शामिल होने के लिए आने वाले कार्यकर्ताओं के लिए भोजन आदि की व्यवस्था वे संभालती हैं। बच्चे जब लवली से हाय लवली कहकर संबोधन करते हैं जो उन्हें बहुत अच्छा लगता है, यह कहते हुए वे दौरे के लिए निकल गईं।

छज्जे पर खड़े होकर अम्मा भ्ारती हैं जोश
जैसे ही हम लोग कमरे में घुसे बेड पर लेटीं अम्मा एक बच्चे की सी फुर्ती के साथ उठकर बैठ गईं जैसे लगभग 80 साल की भूदेवी चौहान के हौसले पर उम्र और बीमारी का कोई असर ही न हो। अच्छा अखबार से हैं पूछते ही... अम्मा ने अपने बारे में बताने के साथ-साथ बेटे की उपलब्धियां भी उन्होंने गिना डाली।

इस दौरान चश्मदीदों ने बताया कि मुंह में ऑक्सीजन लगी रहती है लेकिन जैसे ही बेटे साहब सिंह का काफिला घर के नीचे से गुजरता है तो अम्मा छज्जे पर खड़ी हो जाती हैं और फिर शुरू होती है उम्र के इस पड़ाव को दरकिनार करती बुलंद आवाज। वह बेटे को वोट देने की अपील करती हैं और कोई भी कमी नजर आने पर सभी के सामने हड़क भी देती हैं।

भगवान से लगाई आस, सुंदरकांड का शुरू किया पाठ घुटनों में दर्द के चलते पदयात्राओं में साथ न जाने वाली यमुना विहार से भाजपा प्रत्याशी साहब सिंह चौहान की पत्नी इंद्रवती ने ईश्वर को मनाने का मोर्चा संभाल रखा है। नामांकन के बाद ही घर में सुंदरकांड का पाठ शुरू कर देने वाली इंद्रवती आस-पड़ोस में खासी सक्रिय हैं। सुबह 10 बजे बहुओं पूनम और नीरू के नेतृत्व में जाने वाले महिला मोर्चे पर बाकायदा नजर रखती हैं।

चुनावों के लिए बचाईं छुट्टियां

बाबरपुर से भाजपा प्रत्याशी नरेश गौड़ के घर जब पहुंचे तो उनकी पत्नी मनी गौड़ रसोई के काम में व्यस्त थीं। इस दौरान प्रचार अभियान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उनका परिवार पारंपरिक है और महिलाओं के लिए बाहर प्रचार करने की खुली छूट नहीं है लेकिन क्षेत्र के परिसीमन में हुए बदलाव से लेकर वोटों पर पड़ने वाले असर का विश्लेषण वह बखूबी करना जानती हैं।

सरकारी नौकरी के चलते प्रचार से दूर रहने वाली मनी पिछले कई महीनों से चुनावी समर के लिए अपनी छुट्टियां बचा रही हैं और अब परदे के पीछे से बागडोर संभाले हुए हैं।
रात को मुद्दों पर चर्चा करने वाली मनी ने साफ तौर पर कहा कि उनकी दोनों बहुएं भी घर की जिम्मेदारियों में सहयोग कर रही हैं।

दिन-रात एक कर जुट गए मां, बेटी और दामाद
शाहदरा से प्रत्याशी कांग्रेस डॉ. नरेंद्र नाथ की डॉक्टर पत्नी चौथी बार उम्मीदवारी पर गर्व महसूस करती हैं। बीमारी के चलते कमजोर हुए शरीर में हौसला अभी मजबूत है।

अपनी चार बेटियों और दामादों के माध्यम से डॉ. नाथ के लिए घर-घर जाकर लोगों से अपील कर रही हैं। धीमे-धीमे चलकर आईं शशिकांता ने कहा कि मुझे तो तकलीफ है, लेकिन दामाद और बेटियां मेरी कमी पूरी कर रही हैं।
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