डीटीसी ने 'अंधे' चालकों को सौंप दी बसों की कमान?

नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Sat, 13 Apr 2013 11:40 AM IST
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423 dtc drivers may have poor vision

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डीटीसी में 2008-09 के दौरान चार सौ से अधिक बस चालकों की नियुक्ति को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि कलर ब्लाइंडनेस के शिकार होने के बावजूद उन्हें बसों को चलाने का जिम्मा सौंप दिया गया।
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जिन 423 चालकों को गुरु नानक अस्पताल के डॉक्टरों की जांच रिपोर्ट के बाद डीटीसी ने वर्ष 2008-09 नौकरी दी थी, वे अब दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने पर फेल हो गए हैं। इनमें से कई ड्राइवरों ने तो कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान अतिथियों और खिलाड़ियों की बसें चलाई थीं।
चालकों का आरोप है कि डीटीसी के डॉक्टर जानबूझकर उन्हें फेल कर रहे हैं। वहीं, डीटीसी का कहना है कि गुरु नानक अस्पताल के जिन डॉक्टरों ने इन्हें पास किया है, वे जांच के दायरे में आने चाहिए।
कलर ब्लाइंडनेस का हवाला देकर चालकों को पहले तो डीटीसी के डॉक्टरों ने फेल कर दिया, फिर उन्हें गुरु नानक अस्पताल के फिटनेस सर्टिफिकेट पर भर्ती करना भी संदेह उत्पन्न करता है।

दिल्ली सरकार के अधिकारियों का कहना है कि आंख की बीमारी के शिकार चालकों को स्टेयरिंग थमाकर यात्रियों की जान जोखिम में नहीं डाली जा सकती है। मामले में जिन डॉक्टरों या अधिकारियों की गलती है, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

वहीं, कलर ब्लाइंडनेस के शिकार चालकों के लाइसेंस बनने पर परिवहन विभाग के अधिकारी भी कठघरे में खड़े होते दिख रहे हैं। इनके लाइसेंस दिल्ली और राजस्थान समेत कई राज्यों से बने हैं।

सूत्रों का कहना है कि गुरु नानक अस्पताल और डीटीसी के डॉक्टरों का बोर्ड बनाकर इनका दोबारा मेडिकल किया जा रहा है। इसमें आधे से अधिक ड्राइवर फेल हो गए हैं।

यह है मामला
अधिकारियों का कहना है कि ये ड्राइवर डीटीसी की मेडिकल परीक्षा में फेल हुए थे। कई अस्पतालों में जांच के बाद इन चालकों ने गुहार लगाई थी कि दोबारा मेडिकल कराया जाए। इसके बाद गुरु नानक अस्पताल में इनकी जांच कराई गई, जहां इन्हें फिट घोषित कर दिया गया। इस आधार पर उन्हें नौकरी पर रख लिया गया।

पिछले दिनों इनमें से एक चालक ने दुर्घटना को अंजाम दिया। उस चालक की जांच कराई गई तो आंख में कमी मिली। इस पर उसको नौकरी से निकाल दिया गया।

डीटीसी ने मामला डॉक्टर के पास भेजा तो उन्होंने प्रबंधन को बताया कि यह उन चालकों में शामिल है, जिन्हें फेल कर दिया गया था। ऐसे 423 चालक हैं। इसके बाद डीटीसी ने इनका दोबारा मेडिकल कराने का फैसला किया।
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