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जब केजरीवाल ने अन्ना से रखी ये शर्त, आरोप गलत साबित हुए तो चुनाव प्रचार के लिए आना होगा दिल्ली

जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 15 Jan 2020 04:53 PM IST
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anna kejriwal
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सार

  • 2015 के विधानसभा चुनाव में अन्ना हजारे और केजरीवाल के बीच काफी चर्चित रहा था एक तल्खी भरा संवाद 
  • अन्ना ने लिखी थी केजरीवाल को चिट्ठी, इसमें केजरीवाल पर लगे आरोपों का जिक्र था 
  • चिट्ठी में आम आदमी पार्टी के चुनाव अभियान और फंड से जुड़ी बातों पर अन्ना हजारे ने उठाए थे कई सवाल 
  • अरविंद ने पत्र के जवाब में लिखा, यदि मेरे खिलाफ एक भी आरोप सिद्ध हो जाए, तो मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा

विस्तार

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल के बीच 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले ही दूरियां बढ़ चुकी थीं। उस वक्त लंबे समय के इन दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई थी। दिल्ली में चुनाव का बिगुल बज चुका था और केजरीवाल पर आरोप प्रत्यारोपों का दौर भी शुरू हो गया था। जब चारों तरफ से केजरीवाल पर राजनीतिक हमला हो रहा था, तो अन्ना हजारे पर भी यह दबाव आया कि अब उन्हें कुछ कहना चाहिए।
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उन्होंने केजरीवाल के नाम एक पत्र लिखकर उसे सार्वजनिक कर दिया। हालांकि पत्र का संवाद तल्खी भरा रहा, लेकिन इसके बावजूद दोनों ने एक-दूसरे के प्रति स्नेह एवं भावनात्मक शब्दों का इस्तेमाल किया। चिट्ठी के जरिए अन्ना ने केजरीवाल से आप के चुनाव अभियान और फंड से जुड़ी बातों पर जवाब मांगे।

केजरीवाल ने भी एक शर्त रख दी। उन्होंने कहा कि अगर मेरे खिलाफ लगे सारे आरोप मिथ्य साबित हुए, तो आपको हमारे चुनाव प्रचार में शामिल होने के लिए दिल्ली आना होगा।

जब आई अन्ना की चिट्ठी

चुनाव प्रचार के बीच अरविंद केजरीवाल ने अन्ना हजारे की चिट्ठी का जवाब भी दिया। उन्होंने कहा, यह पत्र उन्हें रविवार रात को मिला था। जब उन्हें चिट्ठी सौंपी गई तो एक बार लगा कि अन्ना का कोई आशीर्वाद होगा। केजरीवाल जब चिट्ठी के दूसरे पैरा पर पहुंचे तो वे चौंक गए। अन्ना हजारे ने अपनी तरफ से कोई आरोप नहीं लगाया, बल्कि उन्होंने सार्वजनिक तौर पर जो बातें चल रही थी, उन्हीं का जिक्र किया।

पत्र में कुछ बातें ऐसी भी लिखी थी, जिसे अन्ना की प्रतिष्ठा और छवि के अनुरूप नहीं माना गया। जैसे, अन्ना के नाम को दिल्ली के चुनाव प्रचार में भुनाना। इस आरोप पर केजरीवाल का कहना था कि मैं सदैव अन्ना का सम्मान करता हूं। आज भले ही वे मेरे साथ हों या न हों, लेकिन उनका आशीर्वाद हमारे साथ है। इस बात का मुझे पक्का यकीन है।

अन्ना ने इस मामले में मुझे जो भी दिशा-निर्देश दिए थे, मैने और पार्टी ने उनका पालन किया है। जब अन्ना ने कहा, चुनाव प्रचार में उनके नाम का इस्तेमाल न हो, तो आम आदमी पार्टी ने उनके नाम का इस्तेमाल नहीं किया।

सारी बातों में सच्चाई नहीं होगी... 

अन्ना हजारे ने अपने पत्र के अंत में लिखा था कि मेरा मानना है कि इन सारी बातों में सच्चाई नहीं होगी। लिहाजा चारों तरफ ये बातें फैली हुई हैं, इसलिए आपसे सत्य जानने के लिए मैं पत्र भेज रहा हूं। अरविंद ने पत्र के जवाब में कहा, अगर एक भी आरोप सिद्ध हो जाए, तो मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा। हां, अगर ये सारे आरोप गलत साबित हुए तो अन्ना चुनाव प्रचार में शामिल हों।

एक अन्य सवाल में अन्ना ने पूछा, मुझे ये जानकारी मिल रही है कि आप का चुनाव प्रचार ऐसे चल रहा है, जिससे लगता है कि मेरा पूरा समर्थन आपके साथ है। इसके जवाब में अरविंद बोले, आपने जब से यह सार्वजनिक आग्रह किया था कि पार्टी के प्रचार में आपके नाम या छवि का कोई इस्तेमाल न किया जाए, तब से लेकर अब तक हमने आपके निर्देशों का पूर्ण रूप से पालन किया है।

आम आदमी पार्टी की फिल्म, पोस्टर बैनर या किसी भी दूसरी प्रचार सामग्री में आपकी तस्वीर का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। हमारे कार्यकर्ता लोगों से इतना जरूर कहते हैं कि अगस्त 2011 में अन्ना आंदोलन हुआ था। यह एक ऐतिहासिक सच है, जिसे आप भी नहीं झुठला सकते।

इस सवाल ने केजरीवाल को किया था परेशान

अन्ना ने पूछा था कि पार्टी की तरफ से एकत्रित किए पैसों को लेकर लोगों में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं, मेरा मानना है कि उन्हें आंदोलन में ही खर्च करना चाहिए, चुनाव में नहीं। केजरीवाल ने जवाब में कहा कि आपके इस सवाल ने सबसे ज्यादा पीड़ा पहुंचाई है। औपचारिक व अनौपचारिक रूप से कई बार इस सवाल पर चर्चा हो चुकी है।

हमारी पार्टी का सामान्य ऑडिट हो गया है। आपकी भेजी स्पेशल टीम भी जांच कर चुकी है। एक बार फिर मैं आपको बताना चाहूंगा कि 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' कोई वैधानिक संस्था नहीं थी। आंदोलन की तमाम औपचारिकताएं 'पब्लिक कॉज रिसर्च फाउंडेशन' के तत्वावधान में की जाती थीं।

अप्रैल से सितंबर 2011 तक आंदोलन के आय-व्यय का विशेष ऑडिट कराया गया। एक नवंबर को उसे वेबसाइट पर भी डाल दिया गया। यह रिपोर्ट आयकर विभाग को भी सौंप दी थी। आंदोलन के पैसे का चुनाव में इस्तेमाल करने का सवाल ही नहीं उठता। अगस्त 2012 के अनशन तक आंदोलन का सारा पैसा खर्च हो चुका था।

फंड में अप्रैल 2011 को 54 लाख रुपये थे। आंदोलन तक यह घट कर 14 लाख रुपये रह गए थे। रेमन मैग्सेसे अवार्ड की सारी राशि मैं आंदोलन में लगा चुका था। आंदोलन का पैसा चुनाव में खर्च करने का सवाल ही नहीं उठता। वैसे भी यह आयकर कानून का उल्लंघन होगा।

'अन्ना कार्ड' पर पूछा सवाल

केजरीवाल ने इस सवाल के जवाब में कहा कि जहां तक अन्ना कार्ड का संबंध है, इसका आम आदमी पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है। आप भूल रहे हैं कि यह कार्ड आंदोलन के समय फरवरी 2012 में आपकी जानकारी व सहमति से जारी हुआ था। कार्ड की कीमत 25 रुपये थी और इसे खरीदने वाले को आंदोलन संबंधी एसएमएस जाते थे।

इस कार्ड के जरिए फरवरी-मार्च 2012 में 15,9415 रुपये और अप्रैल-जुलाई में 76,7115 रुपये एकत्रित हुए थे। इसका पीसीआरएफ के ऑडिटेड अकाउंट में दोनों साल का स्पष्ट तौर से जिक्र है। पार्टी बनने की घोषणा से काफी समय पहले ही अन्ना कार्ड को बंद कर दिया गया था।

इस कार्ड के जरिए चंदा एकत्रित करने का सवाल ही नहीं उठता। अन्ना ने पूछा,था विधानसभा में जनलोकपाल बिल पास करने का वादा कैसे कर सकते हैं। केजरीवाल बोले, मैं, प्रशांत भूषण और हमारे अनेक सहयोगी कानून की बारीकियां समझते हैं। दिल्ली विधान सभा की तरफ से पास कोई भी कानून प्रधानमंत्री, संसद सदस्यों या केंद्र सरकार के अफसरों पर लागू नहीं होगा।

हमने ऐसा कोई वादा नहीं किया। खुद आपने महाराष्ट्र में इस बिल को लागू करवाने के लिए मई 2012 में महाराष्ट्र की यात्रा की थी। दिल्ली के मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायक से लेकर सभी अफसर और कर्मचारी इसके दायरे में आएंगे। अरविंद ने प्रस्ताव रखा कि जस्टिस संतोष हेगड़े या उनके जैसी छवि वाले किसी रिटायर्ड जज से उक्त आरोपों की जांच करा लें।

मैं आपको और पूरे देश को आश्वासन देता हूं कि आंदोलन के हिसाब में कोई हेरी-फेरी मिली, तो विधान सभा चुनाव से अपना नाम वापस ले लूंगा। गलती नहीं मिली तो आप प्रचार करने दिल्ली आएंगे। हालांकि अन्ना ने पत्र के अंत में यह कहकर अरविंद को एक बड़ी राहत भी दे दी, मुझे पता है कि इन सारी बातों में कोई सच्चाई नहीं है।
 
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