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आजादी के 100वें साल में कैसी होगी दिल्ली: सिसोदिया बोले- सपने को साकार करने के लिए खाका तैयार कर रही है सरकार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 09 Nov 2021 12:28 AM IST

सार

एसोचैम की ओर से आयोजित ई-कॉन्क्लेव में दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने 51 हजार से अधिक स्टार्ट अप तैयार किए हैं। सरकार ने उन्हें 60 करोड़ रुपये की सीडमनी दी। 
मनीष सिसोदिया
मनीष सिसोदिया - फोटो : twitter
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विस्तार

उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सोमवार को एसोसिएटेड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एसोचैम) की ओर से आयोजित ई-कॉन्क्लेव ‘दिल्ली की सोच-सस्टेनेबल डवलेपमेंट फॉर दिल्ली मेगा सिटी: चैलेंजेज एंड इनोवेटिव सॉल्यूशंस’ में हिस्सा लिया। इस मौके पर उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक विकास के लिहाज से दूरदर्शी सोच और राजनीतिक नेतृत्व के साथ अगर आगे बढ़े तो जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाए जा सकते हैं। आजादी के 75वें साल में यह सोचने की जरूरत है कि 25 साल बाद की दिल्ली कैसे होगी। सरकार की ओर से इसके लिए खाका भी तैयार किया जा रहा है।
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सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली की श्रमशक्ति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और रोजगार अवसर में बढ़ोतरी के लिहाज से आंगनबाड़ी को सहेली समन्वय केंद्र के तौर पर विकसित किया जा रहा है। इससे महिलाएं स्थानीय स्तर पर अपने लघु उद्यम की शुरुआत कर सकेंगी। दिल्ली सरकार बहुत जल्द अपनी स्टॉर्ट अप पॉलिसी शुरू करने जा रही है। इससे युवा उद्यमियों को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। पिछले 40 वर्षों में जो कुछ हमने खोया है उसे न सिर्फ उसे इकट्ठा कर सकेंगे बल्कि भविष्य की तैयारी भी कर सकेंगे। आजादी के 100 वें साल में देश कैसा हो, इस दिशा में भी आगे बढ़ सकेंगे। 


केजरीवाल सरकार ने पिछले 5-6 वर्षों में दिल्ली के स्वास्थ्य की बुनियादी सुविधाओं को शानदार बनाया। कोरोना काल में इस बदौलत ही दिल्ली व आस पास के राज्यों में भी लोगों को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया की गईं। बिजनेस ब्लास्टर्स प्रोग्राम के बारे में बताते हुए इसके तहत अब तक सरकारी स्कूलों के 3 लाख विद्यार्थियों ने 51,000 से अधिक स्टार्ट अप की शुरुआत की। स्टार्ट अप पर सीड मनी के तौर पर 60 करोड़ रुपये वितरित किए गए। दिल्ली सरकार 

कोरोना काल में दिल्ली में प्रति व्यक्ति आय में भी आई कमी 
उप-मुख्यमंत्री ने साझा किया कि दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय देश के अन्य राज्यों से अधिक है, लेकिन कोरोना के दौरान इसमें कमी आई7कोरोना के दौरान सरकार की ओर से करवाए गए एक सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ कि दिल्ली में महिला श्रमशक्ति की हिस्सेदारी कम है7इसे देखते हुए केजरीवाल सरकार ने आंगनबाड़ी को विकसित कर सहेली समन्वय केन्द्रों की शुरुआत कर रही है। इससे महिलाओं के लिए रोजगार संभावनाएं बढ़ेंगी और स्वरोजगार शुरू करने में मदद मिलेगी। 

छोटी पहल से भी कम किया जा सकता है प्रदूषण
सिसोदिया ने कहा कि केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में एक बेहद महत्वकांक्षी ई-व्हीकल पालिसी की शुरुआत की है7 इसका उद्देश्य ई-वाहनों के प्रति लोगों को जागरूक करना है ताकि प्रदुषण स्तर को कम किया जा सके। कई दशकों से प्रदूषण की स्थिति ऐसी बनी रही, लेकिन तत्कालीन सरकारें गंभीर होती और सख्त नियम बनाए जाते तो प्रदूषण का स्तर इतना अधिक नहीं होता। हम सब की जिम्मेदारी है कि प्रदूषण कम करने के लिए मिलकर आगे बढ़ें। चाहे रेड लाइट पर 1 मिनट तक वाहन बंद कर या सार्वजानिक परिवहन का प्रयोग करने जैसे छोटा कदम ही क्यों न हो7 

स्टार्ट अप से विद्यार्थियों में बढ़ा आत्मविश्वास 
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि हमारा उद्देश्य दिल्ली को न्यू एज बिजनेस और एंटरप्रेन्यॉरशिप हब बनाना है और शिक्षा इसकी नींव है। दिल्ली सरकार के स्कूलों में कक्षा 9 वीं से 12वीं तक के लिए एंटरप्रेन्यॉरशिप माइंडसेट करिकुलम की शुरुआत की गई है ताकि विद्यार्थियों को विकसित किया जा सके। बिजनेस ब्लास्टर्स प्रोग्राम के तहत 3 लाख से अधिक विद्यार्थियों को अपने बिजनेस आइडिया विकसित करने के लिए 2000-2000 रुपयों की सीडमनी दी जा रही है। स्टार्ट अप शुरू करने से बच्चों के आत्मविश्वास में इतनी बढ़ोतरी हुई कि 12वीं के बाद आईआईटी में प्रवेश का सपना देखने के बजाय अपनी कंपनी में आईआईटी से उतीर्ण होने वालों को रोजगार देने की तैयारी में है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों के इसी सोच से दिल्ली का स्वरुप तैयार होगा7 

सोच बदलने से बदलेंगे हालात 
सिसोदिया ने कहा कि प्रत्येक भारतीय परिवार का सपना होता है कि बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका, यूरोप के किसी यूनिवर्सिटी में पढ़ने कैसे भेजें। इस सोच को बदलने की जरुरत है, जिसकी शुरुआत हो चुकी है। हम सभी को साथ मिलकर इस दिशा में काम करने की जरुरत है ताकि अमेरिका-यूरोप में बैठा कोई परिवार अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए दिल्ली या भारत के किसी यूनिवर्सिटी में भेजे7कई विश्वविद्यालय की सफलता का पैमाना वहां से उतीर्ण होने वाले विद्यार्थियों को मिलने वाला पैकेज होता है। इसमें भी बदलाव जरूरी है। 

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