दिल्ली : इस माह के दूसरे हफ्ते में हवा की ‘सेहत’ ज्यादा बिगड़ी, आज राहत के आसार, एक दिसंबर से फिर खराब होंगे हालात

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 29 Nov 2021 04:58 AM IST

सार

भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के मुताबिक, रविवार को हवा की रफ्तार पांच किलोमीटर प्रति घंटा रिकॉर्ड की गई है। संस्थान का कहना है कि वायु की रफ्तार बढ़ने से राहत जरूर मिलेगी, परंतु एक दिसंबर से फिर से हालात खराब होने लगेंगे। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे का कारण मानसून का देरी से आगमन और लौटना है।
दिल्ली वायु प्रदूषण
दिल्ली वायु प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पड़ोसी राज्यों में जलने वाली पराली की घटनाओं से नवंबर के दूसरे सप्ताह में दिल्ली के प्रदूषण में अधिक हिस्सेदारी दर्ज की गई है। पांच दिनों में ही पराली के धुएं के हिस्सेदारी 30 फीसदी रही है। वायु मानक संस्था सफर ने अपनी रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी है।
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सफर की रिपोर्ट के मुताबिक, 30 अक्तूबर से लेकर 3 नवंबर तक 12565 पराली जलने की घटनाएं रिकॉर्ड की गई हैं। इससे प्रदूषण में पराली के धुएं की हिस्सेदारी सिर्फ आठ फीसदी रही, जबकि स्थानीय स्तर पर होने वाला प्रदूषण 69 फीसदी रहा।


वहीं, अन्य कारण 23 फीसदी  जिम्मेदार रहे। 9 से 13 नवंबर के बीच 19,920 जगहों पर पराली जलने की घटनाएं रिकॉर्ड की गई हैं। इससे दिल्ली के प्रदूषण में पराली के धुएं की 30 फीसदी हिस्सेदारी रही, जबकि स्थानीय स्तर पर होने वाला प्रदूषण  52 फीसदी व अन्य 18 फीसदी रहा। यह वह समय है जब किसान नई फसलों की बुआई के लिए पुरानी फसलों को काटता है। इस दौरान पराली में आग लगाने की घटनाएं भी रिकॉर्ड की जाती हैं।  
 

आज राहत के आसार

राजधानी की हवा लगातार चौथे दिन गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई है। बीते 24 घंटे में दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 405 रहा। साथ ही, एनसीआर के शहर फरीदाबाद में भी हवा गंभीर स्तर पर रही। सोमवार से हवा की रफ्तार बढ़ने से सुधार के आसार हैं। अगले 24 घंटे में हवा गंभीर से बहुत खराब श्रेणी में पहुंच आ सकती है।

वायु मानक संस्था सफर के मुताबिक, बीते 24 घंटे में पंजाब में 19, हरियाणा में 28 व उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 257 जगह पराली जलने की घटनाएं रिकॉर्ड की गई हैं। इससे उत्पन्न होेने वाले पीएम2.5 की दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण में न के बराबर हिस्सेदारी रही। हवा में पीएम10 का स्तर साढ़े तीन गुना यानी 350 व पीएम2.5 का स्तर सवा तीन गुना यानी 211 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर रिकॉर्ड किया गया है।

सामान्य तौर पर पीएम10 का स्तर 100 व पीएम2.5 का स्तर 60 से कम होने पर सुरक्षित माना जाता है। सफर का पूर्वानुमान है कि दो दिन तक हवा की रफ्तार बढ़ने से प्रदूषण में कमी हो सकती है। हालांकि, यह राहत सिर्फ दो दिन के लिए ही है। एक दिसंबर से पारा लुढ़कने और हवा की रफ्तार कम होने पर प्रदूषण बढ़ जाएगा।

भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के मुताबिक, रविवार को हवा की रफ्तार पांच किलोमीटर प्रति घंटा रिकॉर्ड की गई है। अगले 24 घंटे में हवा की दिशा पूर्वी से पश्चिम व उत्तर-पश्चिम की ओर हो जाएगी। साथ ही, वर्तमान में पांच किमी प्रति घंटा बनी हुई हवा की रफ्तार 10 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। रविवार को मिक्सिंग हाइट 1100 मीटर व वेंटिलेशन इंडेक्स 2500 वर्ग मीटर प्रति सेकेंड रिकॉर्ड किया गया है। आईआईटीएम का पूर्वानुमान है कि मंगलवार तक मिक्सिंग हाइट एक हजार वर्ग मीटर व वेंटिलेशन इंडेक्स छह हजार वर्ग मीटर प्रति सेकेंड तक रिकॉर्ड किया जा सकता है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक, रविवार को दिल्ली का एक्यूआई 405 रहा। इससे एक दिन पहले यह 402 था। 25 नवंबर के बाद दिल्ली की हवा गंभीर श्रेणी में बनी हुई है।

 

मानसून ने भी बढ़ाई समस्या

राजधानी में इस बार पराली के धुएं के साथ मानसून भी प्रदूषण का अहम कारण बना है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि देरी से मानसून के आगमन व लौटने की वजह से प्रदूषण के दिन बढ़े हैं। इस वर्ष 13 जुलाई को बीते नौ वर्षों में सबसे देरी के साथ मानसून ने दिल्ली में दस्तक दी थी और अगस्त के अंतिम दिनों में वापसी की। पराली के धुएं और स्थानीय कारकों से पहले ही दिल्ली की स्थिति खराब थी।

सीपीसीबी के मुताबिक, 2012 में सात जुलाई को मानसून दिल्ली पहुंचा था। 2006 में नौ जुलाई, 2002 में 19 जुलाई और 1987 में 26 जुलाई को मानसून का आगमन हुआ था। आमतौर पर दिल्ली में जून के अंत तक मानसून आ जाता है। मानसून के देरी से आगमन व लौटने के कारण पड़ोसी राज्यों में पराली जलने की घटनाएं देरी से रिकॉर्ड की गई। बीते अक्तूबर में 20 से 30 तारीख तक पराली जलने की कम घटनाएं दर्ज हुईं। 30 अक्तूबर तक प्रदूषण में पराली के धुएं की हिस्सेदारी अधिकतम 20 फीसदी थी, जबकि नवंबर के पहले सप्ताह में 36 फीसदी हो गई।

सप्ताह के अंत तक पराली का धुआं 48 फीसदी तक दर्ज किया गया, जो कि इस सीजन की सबसे अधिक हिस्सेदारी दर्ज की गई। वायु मानक संस्था सफर के मुताबिक, 9 से 13 नवंबर के बीच पराली के धुएं की हिस्सेदारी 30 फीसदी रही, जबकि 30 अक्तूबर से 3 नवंबर तक प्रदूषण में इसकी हिस्सेदारी सिर्फ 8 फीसदी रही थी।

रविवार का ये रहा एक्यूआई
  • दिल्ली 405
  • फरीदाबाद 412
  • गाजियाबाद 353
  • ग्रेटर नोएडा 346
  • गुरुग्राम 372
  • नोएडा 362

दिल्ली में बीते 5 दिनों की स्थिति
तारीख    एक्यूआई
28        405
27        402
26        406
25        400
24        361

बीते पांच साल में दिल्ली में वाहनों का दबाव भी बढ़ा है। इसके अलावा प्रदूषण फैलाने वाली अन्य गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है। मानसून का देरी से आगमन और पराली जलने पर प्रभाव पड़ने से प्रदूषण के स्तर में बदलाव आया। मौसमी दशाओं ने भी प्रदूषण को बढ़ाने में मदद की है। इस वजह से प्रदूषण के अधिक दिन दर्ज किए गए हैं।
- डॉ. एसके त्यागी, पूर्व अतिरिक्त निदेशक, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

दिल्ली में अपना प्रदूषण पहले से ही है। दिवाली पर जलने वाले पटाखे व पराली का धुआं इसे और बढ़ाने में और मदद कर देते हैं। इस वजह से हालात बिगड़ जाते हैं। दिल्ली के प्रदूषण को कम करना है तो धरातल पर काम करने की जरूरत है।
- भुवन भास्कर, पर्यावरण विशेषज्ञ

 

प्रदूषण : पांच साल में सबसे गंभीर रहे नवंबर के हालात

दिल्ली की हवा बीते पांच साल में इस बार नवंबर में सबसे दमघोंटू रही है। 10 दिन तक दिल्लीवालों ने जहरीली हवा में सांस लिया। हवा की गुणवत्ता गंभीर स्तर पर बनी रही, जबकि 16 दिन बेहद खराब श्रेणी में रही। विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम की उठापटक के साथ पराली के धुएं और दिवाली पर जले पटाखों ने हवा को धुआं-धुआं कर दिया है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) 2015 से वायु गुणवत्ता के आंकड़े जारी कर रहा है। बीते वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्पष्ट होता है 2016 के बाद इस वर्ष नवंबर में 10 दिन जहरीली हवा रिकॉर्ड की गई है। बहुत खराब श्रेणी की हवा वाले 16 दिन व दो दिन खराब श्रेणी के रहे हैं। यानी, इस माह एक भी दिन साफ हवा नसीब नहीं हुई। 2015 से 2020 के बीच कोई ऐसा साल नहीं आया जिसमें नवंबर में इस तरह की जहरीली हवाओं के बीच न गुजरा हो।

ये रही गंभीर श्रेणी की स्थिति
साल                दिन
2020                9
2019                7
2018                5
2017               7
2016              10
2015               6

दिवाली के बाद बिगड़े हालात
राजधानी में प्रदूषण को लेकर सबसे अधिक हालात दिवाली के बाद बिगड़े। 4 नवंबर को पटाखों के साथ पराली के धुएं ने भी दिल्ली की हवा को प्रदूषित किया। यही वजह रही कि 5 नवंबर को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 462 के स्तर पर पहुंच गया। इस दिन पराली के धुएं की हिस्सेदारी 41 फीसदी रही थी। 5 से 7 नवंबर लगातार तीन दिन तक हवा गंभीर श्रेणी में रही थी। 11 से 13 नवंबर तक हवा की स्थिति गंभीर रही। 12 नवंबर को 471 एक्यूआई के साथ आपातकाल जैसी स्थिति हो गई थी। इसके बाद 25 से 28 नवंबर तक लगातार हवा गंभीर श्रेणी में बनी हुई है।  
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