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बुनियादी बदलाव के दौर में दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था

Noida Bureauनोएडा ब्यूरो Updated Thu, 14 Feb 2019 04:34 AM IST
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दिल्ली सरकार के चार वर्ष
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सुविधाओं का विस्तार, विषय वस्तु भी बदली
दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था एक चौथाई से खर्च, देश के लिए मॉडल बनाने का दावा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। बीते चार साल में दिल्ली सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में बुनियादी बदलाव किए हैं। सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ विषय वस्तु में भी प्रयोग किए गए हैं। सरकार का दावा है कि अगले एक साल में दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था देश के लिए मॉडल होगी।
पहले वित्त वर्ष से ही दिल्ली सरकार ने शिक्षा पर बजटीय आवंटन बढ़ाया। कुल बजट का करीब एक चौथाई हिस्सा शिक्षा क्षेत्र पर खर्च किया जा रहा है। वित्त वर्ष 2018-19 के लिए शिक्षा बजट 13,997 करोड़ रुपये है, जो कुल बजट का 26 फीसदी है। पिछले वित्त वर्ष में शिक्षा के लिए कुल बजट का 23 फीसदी आवंटित किया गया था। आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली सरकार के स्कूलों में 16 लाख से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। इनमें से अधिकतर के पास बैठने के लिए कमरे नहीं थे। खुले में कक्षाएं लगती थीं। एक-एक कक्षा में 150 से ज्यादा बच्चे बैठते थे। इसे देखते हुए साल 2015 में कमरों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव पास हुआ। करीब आठ हजार नए कमरे बनाए गए। वहीं, 11 हजार कमरे बनाने का काम शुरू हो गया है और एक हजार के लिए टेंडर हो चुके हैं। सरकार का दावा है कि 2015 में सरकारी स्कूलों में कुल 17 हजार टूटे-फूटे कमरे थे। अब शानदार 25 हजार कमरे हैं, जो इस साल के अंत तक 37 हजार हो जाएंगे।
दूसरी तरफ, विषय वस्तु के स्तर पर बड़ा बदलाव सभी सरकारी स्कूलों में हैप्पीनेस कोर्स की शुरुआत रही। बीते साल जुलाई में इसे लागू किया गया। अधिकारियों का कहना है कि नर्सरी से 8वीं तक के करीब 10 लाख बच्चों को हैप्पीनेस पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है। इसमें रोज हैप्पीनेस की 45 मिनट की एक अलग क्लास लगती है। हर क्लास के पहले और बाद में 5 मिनट का साइंटिफिक मेडिटेशन कराया जाता है। अधिकारी बताते हैं कि कोर्स लागू करने के बाद से छात्रों में सकारात्मक बदलाव आया है। कक्षाओं में उपस्थिति बढ़ने के साथ ही विद्यार्थियों का व्यवहार भी मृदु हुआ है।

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