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दिल्ली विधानसभा चुनाव : राजधानी में सरकार चुनने में पुरुषों से आगे रही हैं महिलाएं

परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Updated Sat, 18 Jan 2020 05:08 AM IST
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Women have been ahead of men in choosing government in delhi
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दिल्ली में जब-जब सरकार चुनने का वक्त आता है, तब-तब महिलाएं सबसे आगे रहती हैं। नारी शक्ति को बढ़ावा देने के लिए चुनाव आयोग भी पिंक बूथ जैसे तकनीक पर काम कर रहा है। 
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बीते 22 साल का रिकॉर्ड खंगालें तो दिल्ली में महिलाओं के मतदान प्रतिशत में पुरुषों से ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिलती है। वर्ष 1998 से अब तक राजधानी में पांच बार विधानसभा चुनाव हुए हैं। हर बार पुरुषों से ज्यादा महिलाओं की दिलचस्पी मतदान में रही है। वर्ष 1998 से 2015 के बीच महिलाओं के मतदान प्रतिशत में 20.08 और पुरुषों के मतदान प्रतिशत में 16.74 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

ये स्थिति तब है जब दिल्ली के चुनाव में एक भी सीट महिला आरक्षित नहीं है, बावजूद इसके दिल्ली के विधानसभा चुनाव में महिलाओं की दावेदारी भी खूब देखने को मिलती है। बीते दो चुनाव साल 2013 और 2015 की बात करें तो क्रमश: 71 व 66 महिलाओं ने चुनाव लड़ा था। 

वर्ष 1998 में जब विधानसभा चुनाव हुआ तो उस दौरान महिलाओं का मतदान प्रतिशत 46.41 था, जोकि वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में 20.08 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 66.49 फीसदी रहा। वहीं पुरुषों की बात करें तो 50.89 से बढ़कर 67.63 फीसदी पर पहुंचा, यानी पुरुषों के मतदान प्रतिशत में 16.74 फीसदी की ही वृद्धि हुई है। 

93 में बंपर वोटिंग के बाद गिरा था मतदान प्रतिशत
वर्ष 1993 में जब दिल्ली को मदन लाल खुराना के रूप में भाजपा का पहला सीएम मिला, उस वक्त बंपर वोटिंग हुई थी। उस चुनाव में 61.75 फीसदी मतदान हुआ था, जिसमें पुरुषों का मतदान प्रतिशत 64.56 और महिलाओं का मतदान प्रतिशत 58.27 फीसदी रहा था, लेकिन इसके बाद वर्ष 1998 में मतदान प्रतिशत 12.76 फीसदी कम हुआ। हालांकि इसके बाद से दिल्ली में मतदान का स्तर हर चुनाव में तेजी से बढ़ रहा है। 

विधानसभा चुनाव में महिला-पुरुष मतदाताओं की स्थिति
 
वर्ष पुरुष मतदाता महिला मतदाता कुल मतदाता
1998 50.89 46.41 48.99
2003 54.89 51.53 53.42
2008 58.34 56.62 57.58
2013 65.98 65.13 65.60
2015 67.63 66.49  67.12


मतदान बढ़ाने के लिए चुनावी पाठशाला
चुनाव आयोग ने गांवों में बनी चौपालों पर चुनावी पाठशाला चलाने का फैसला लिया है। इस फैसले के तहत सेक्टर व बीएलओ स्तर के अधिकारी चुनावी पाठशाला में जाएंगे और उक्त जगहों पर लोगों को बताएंगे कि वोट करना क्यों जरूरी है। बैठक से पहले गांव के सरपंच, किसान नेता व किसान यूनियन के नेताओं से चर्चा की जाएगी। उनकी मदद से लोगों को बुलाया जाएगा। जिला निर्वाचन अधिकारी राहुल सिंह ने बताया कि दक्षिणी पश्चिमी जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले 77 गांवों में इसकी शुरुआत की गई है। हमारी कोशिश है कि गांवों में रहने वाले सभी नागरिकों को वोट के लिए प्रेरित किया जाए। 
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