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Delhi AIIMS: कोरोना के बाद क्यों हो रही हार्ट अटैक से मौत? पता लगाएगा एम्स
राकेश शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 30 May 2023 03:59 AM IST
कोरोना महामारी के बाद अचानक संदिग्ध कार्डियक मौतों के मामलाें की वृद्धि दर्ज की गई है। सोशल मीडिया पर इस तरह के कई मामले वायरल हुए। इन मौतों ने कई सवालों को जन्म दिया, जिसमें पोस्ट कोविड के लक्षण के अलावा शरीर के कमजोर होने, अंगों के प्रभावित होने के साथ वैक्सीनेशन के प्रभाव को बताया गया।
नाचते-गाते अचानक दिल का दौरा पड़ने से दम तोड़ रहे लोगों की मौत के पीछे के कारणों का पता लगाने के लिए एम्स ने शोध शुरू किया है। शोध में पता लगाया जाएगा कि क्या मरने वाले शख्स को पहले से कोई बीमारी थी, ऐसा क्या हुआ होगा कि अचानक दिल की गति रुक गई, मौत के समय शरीर के अंग किस तरह से काम कर रहे होंगे, क्या उस समय शरीर में कोई और रसायनिक कारण बने, जिस कारण मौत हो गई।
दरअसल कोरोना महामारी के बाद अचानक संदिग्ध कार्डियक मौतों के मामलाें की वृद्धि दर्ज की गई है। सोशल मीडिया पर इस तरह के कई मामले वायरल हुए। इन मौतों ने कई सवालों को जन्म दिया, जिसमें पोस्ट कोविड के लक्षण के अलावा शरीर के कमजोर होने, अंगों के प्रभावित होने के साथ वैक्सीनेशन के प्रभाव को बताया गया। हालांकि डॉक्टराें ने स्पष्ट कहा कि कोविड की रोकथाम के लिए किए गए वैक्सीनेशन का हार्ट अटैक से कोई सीधा संबंध नहीं है।
इसे लेकर एम्स के फॉरेंसिक मेडिसिन और विष विज्ञान विभाग के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. सुधीर गुप्ता के नेतृत्व में युवा व वयस्कों में आकस्मिक मृत्यु के कारणों का पता लगाने के लिए प्रधान अन्वेषक के रूप में एक शोध परियोजना शुरू की गई है। इस परियोजना में आधुनिक तकनीक जैसे पोस्टमार्टम सीटी एंजियोग्राफी, फॉरेंसिक हिस्टोपैथोलॉजी, फॉरेंसिक इम्यूनो-हिस्टोकेमिस्ट्री के साथ अचानक होने वाली सभी मौतों का अध्ययन किया जाएगा। बता दें कि विभाग ने मृतकों की गरिमा को बनाए रखने और पोस्टमार्टम कॉस्मेटिक उपस्थिति में सुधार के लिए मौजूदा बॉडी पैकिंग विधियों को बदलने के साथ-साथ स्टेथोस्कोप ऑटोप्सी चीरा की एक नई तकनीक तैयार की थी।
फांसी लगाने के मामले ज्यादा
पोस्टमार्टम के लिए एम्स के मुर्दाघर में आने वाले मामलों में सबसे ज्यादा केस फांसी, गला घोंटना, डूबने जैसी श्वासावरोध के कारण होने वाली मौतों के हैं। ये आंकड़े अन्य जगहों के मुकाबले ज्यादा हैं। अभी भी पूरे देश के विशेषज्ञों के बीच श्वासावरोध के मामलों के कारण होने वाली जटिल मौतों से संबंधित राय बनाने के संबंध में विवाद और भ्रम की स्थिति बनी हुई है। डॉ. सुधीर के गुप्ता, फॉरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी के प्रोफेसर और प्रमुख ने अपने 25 वर्षों के दौरान एम्स, नई दिल्ली में किए गए मामलों के अनुभव से इस पहलू में अवधारणाओं को स्पष्ट करने के लिए एक पुस्तक ‘फोरेंसिक पैथोलॉजी ऑफ एस्फिक्सियल डेथ्स’ लिखी और प्रकाशित की थी। अनुभव जो न केवल क्षेत्र में मौजूदा विशेषज्ञों के लिए बल्कि स्नातकोत्तर और स्नातक के लिए भी उपयोगी है।
स्टाफ को ट्रेनिंग देगा एम्स, मरीजों की सुविधा होगी बेहतर
नई दिल्ली। एम्स में मरीजों की सेवाओं में सुधार के लिए कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जाएगी। पहले चरण में जून माह से सुरक्षा और हाउसकीपिंग कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जाएगी। इस ट्रेनिंग कार्यक्रम के लिए एम्स ने हेल्थकेयर सेक्टर स्किल काउंसिल के साथ समझौता किया है। इसके तहत कर्मचारियों के संवर्गों का कौशल विकास, पुनः कौशल और उनके काम को और बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा। इस बारे में एम्स की मुख्य प्रवक्ता डॉ. रीमा दादा ने बताया कि पहला प्रशिक्षण कार्यक्रम सुरक्षा और हाउसकीपिंग कर्मचारियों के लिए आयोजित किया जाएगा। एम्स में सुरक्षा सेवाओं के प्रभारी कार्मिक, हाउसकीपिंग और स्वच्छता सेवाओं के प्रभारी अधिकारी जून 2023 के लिए निर्धारित आगामी कार्यक्रम के लिए 20-20 मास्टर प्रशिक्षकों को नामित करेंगे। ब्यूरो
मृतकों की हो चुकी है आटोप्सी
शोध के लिए मृतकों का वर्चुअल पोस्टमार्टम व पारंपरिक पोस्टमार्टम दोनों तरीके से परीक्षण किया जा रहा है। 45 वर्ष से कम उम्र में मरने वाले अब तक 30 मृतकों की आटोप्सी हो चुकी है। हालांकि इनके परिणाम नहीं बताए जा सकते।
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शोध में 45 साल से कम उम्र में दम तोड़ने वाले लोगों को शामिल किया
आईसीएमआर के सहयोग से देश में पहली बार शुरू किए इस तरह के शोध में एम्स के फॉरेंसिक मेडिसिन, न्यूरोलाजी, कार्डयोलाजी, पैथोलॉजी व रेडियोलाॅजी के डॉक्टर शामिल होंगे। इस शोध में 45 साल से कम उम्र में दम तोड़ने वाले लोगों को शामिल किया गया है। इसमें कोरोना और उसके बाद मरने वाले लोगों पर तुलनात्मक शोध किया जा रहा है। इसके तहत कोरोना के दौरान मरने वाले 250 लोगों की ऑटोप्सी रिपोर्ट को इसमें शामिल किया जाएगा,जबकि कोरोना के बाद के करीब 200 मृतकों के आटोप्सी कर शोध किया जाएगा।
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