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दिल्ली में योगी: गृह मंत्री अमित शाह के घर पहुंचे मुख्यमंत्री, शुक्रवार को पीएम मोदी से होगी मुलाकात

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Thu, 10 Jun 2021 04:30 PM IST

सार

दिल्ली पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री योगी पहले यूपी सदन पहुंचे। यहां कुछ देर बाद आराम करने के बाद वह गृह मंत्री अमित शाह से मिलने उनके आवास पहुंचे। यहां वह गृह मंत्री के अलावा बीजेपी के कई अन्य बड़े नेताओं से भी मिले।
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गृह मंत्री अमित शाह के घर पहुंचे योगी आदित्यनाथ
गृह मंत्री अमित शाह के घर पहुंचे योगी आदित्यनाथ - फोटो : ani

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विस्तार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री दिल्ली स्थित गृहमंत्री अमित शाह से मिलने उनके घर पहुंच चुके हैं। माना जा रहा है कि यहां वह भाजपा के कई बड़े नेताओं से मिलेंगे। योगी शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिलेंगे। साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी मुलाकात करेंगे। मुख्यमंत्री के दिल्ली कूच करने के बाद से भाजपा प्रदेश संगठन और सरकार में फेरबदल की सुगबुगाहट फिर तेज हो गई है।
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गृह मंत्री अमित शाह और सीएम योगी के बीच करीब डेढ़ घंटे बात हुई। हालांकि बातचीत का ब्यौरा नहीं मिल पाया है लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि केंद्रीय नेतृत्व के साथ उन्होंने मंत्रिमंडल विस्तार, पंचायत चुनाव समेत कई अन्य मुद्दों पर चर्चा की। 


सीएम योगी दोपहर करीब दो बजे लखनऊ से दिल्ली रवाना हुए। गाजियाबाद हिंडन एयरबेस से वह दिल्ली के यूपी सदन पहुंचे। यूपी सदन में थोड़ी देर रुकने के बाद योगी अमित शाह से मिलने के लिए उनके घर रवाना हो गए। सूत्रों की मानें तो दोनों नेताओं ने के बीच प्रदेश में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार, जिला पंचायत चुनाव के साथ-साथ आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी चर्चा हुई। सूत्रों का कहना है कि सीएम योगी ने गृहमंत्री को विधानसभा चुनाव के लिए चल रही तैयारियों के बारे में भी विस्तार से बताया।

गृहमंत्री शाह से भेंट करने के बाद सीएम योगी ने दिल्ली के यूपी सदन में गाजियाबाद, नोएडा तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई भाजपा नेताओं से भी मुलाकात की। बुधवार को कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, सांसद सतपाल सिंह भी यूपी सदन में उनसे मिलने पहुंचे।

छह महीने बाद प्रदेश में विधानसभा चुनाव
दरअसल, छह महीने बाद प्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि योगी कैबिनेट में फेरबदल होगा और एमएलसी बने एके शर्मा को कैबिनेट में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि, भाजपा के पदाधिकारी इससे इनकार कर रहे हैं लेकिन पार्टी पदाधिकारियों की बैठकें और भाजपा प्रभारी की राज्यपाल से मुलाकात को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं।

राधामोहन की राज्यपाल से मुलाकात की चर्चा ने यूपी में मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलों को हवा दे दी थी। राधामोहन ने शनिवार रात पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह व महामंत्री संगठन सुनील बंसल के साथ बैठक की। सूत्रों के मुताबिक उनके बीच जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव और राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से मिले दिशा-निर्देश पर चर्चा हुई। 

बीएल संतोष के दौरे के बाद तेज हुईं चर्चाएं
भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष तीन दिन के यूपी दौरे के बाद बीते बुधवार को दिल्ली लौट गए। इस दौरे में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर संगठन और सरकार के कई प्रमुख लोगों से एक साथ तथा अलग-अलग बातचीत की। कुछ मंत्रियों की सुनी और उनकी क्षमता व योजना दृष्टि की थाह नापी। बैठकों में कोरोना में ऑक्सीजन व बेड की कमी और इस कारण बड़ी संख्या में हुई मौतों को लेकर गैरों के साथ अपनों (भाजपा के लोगों) की मुखर हुई नाराजगी की नब्ज टटोली गई।

संतोष ने सरकार के प्रबंधन व तैयारियों के दावों की सच्चाई समझी, पंचायत चुनाव के भाजपा के पक्ष में अपेक्षित नतीजे न आने की वजहें जानने की कोशिश की। सरकार व संगठन की नब्ज पर हाथ रखकर बीमारियां समझीं और लौट गए। अब दिल्ली में ऑपरेशन यूपी 2022 का ब्लू प्रिंट तैयार होगा। इसमें पूरा जोर कोरोना महामारी से हुए नुकसान की भरपाई पर रहेगा।

इसके तहत मंत्रिमंडल में कुछ बदलाव के साथ विस्तार व अधिकारियों की चुनाव तक नए सिरे से तैनाती हो सकती है। इस ब्लू प्रिंट का प्रभाव प्रदेश में बदलाव के रूप में तो सामने जरूर आएगा, लेकिन इसके संगठन और सरकार के कुछ मंत्रियों की भूमिका बदलने तथा नौकरशाही के कुछ प्रमुख चेहरों की काट-छांट तक ही सीमित रहने के आसार हैं। इसका मुख्य आधार ‘पॉलिटिक्स ऑफ परफॉरमेंस’ व डैमेज कंट्रोल ही होगा। वहीं फिलहाल मुखिया परिवर्तन का संकेत कहीं नहीं है।

बीमारी समझने की कोशिश, मर्यादा में रहने का संदेश भी 
लगभग दो दशक बाद पूर्ण बहुमत पाकर और वह भी 1991 से ज्यादा विधायकों के साथ प्रदेश की सत्ता में आई भाजपा का शीर्ष नेतृत्व तथा संघ किसी भी स्थिति में प्रदेश को खोना नहीं चाहता है। उसे पता है कि यूपी हारने का मतलब क्या होता है? संतोष के दौरे के एजेंडे से भी इसे समझा सकता है।

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