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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR ›   Under PM Jan Dhan Yojana 13 lakh bank accounts have been opened in Gautam Budh Nagar

Jan-Dhan: खाता खुला पर 'जन' जमा नहीं कर रहे 'धन', एक लाख खातों में केवल 1-1 हजार; कारण आर्थिक तंगी या कुछ और..

नवीन कुमार, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Published by: Vikas Kumar Updated Wed, 28 Sep 2022 10:36 PM IST
सार

प्रधानमंत्री जनधन योजना की शुरुआत 15 अगस्त, 2014 को हुई थी। तब से अभी तक आठ साल हो चुके हैं। कुछ समय पहले ही केंद्रीय वित्त मंत्री ने कुछ आंकड़े जारी किए थे। इसके तहत देश भर में योजना के तहत 46 करोड से अधिक बैंक खाते खुल चुके हैं।

jan dhan account
jan dhan account - फोटो : https://pmjdy.gov.in/home and istock
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विस्तार

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जनधन योजना गौतमबुद्घ नगर में भी हांफती नजर आ रही है। प्रधानमंत्री जनधन योजना के करीब 30 प्रतिशत बैंक खाते बंद हो चुके हैं। जबकि एक लाख खातों में दो साल से कोई लेनदेन नहीं हुआ है। वहीं, बाकी खातों में भी नाममात्र का ही लेनदेन हो रहा है। लोग इन बैंक खातों में धन ही जमा नहीं कर रहे हैं। सभी खातों में औसतन एक हजार रुपये जमा कराया गया है। 



जनधन योजना का उददेश्य ज्यादा से ज्यादा लोगों को बैंकिंग सेक्टर से जोड़ना था। मगर प्रधानमंत्री की यह योजना सफलता की ओर नहीं चढ़ पा रही है। इससे लोगों की अर्थव्यवस्था का भी आंकलन हो जा रहा है कि आखिर लोगों के पास इतना धन ही नहीं है कि वह खातों में उसका लेनदेन कर सकें।

 

पीएम जनधन योजना के तहत बैंकों ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को खाते खोले। पहले चरण में हर घर में एक बैंक खाता होने का लक्ष्य पूरा किया गया था। जबकि दूसरे चरण में हर घर में सभी लोगों को बैंक खाता खोलने पर काम किया गया। वर्ष 2014 से अभी तक योजना के तहत लोगों के खाते खोले जा रहे हैं। गौतमबुद्घ नगर में मौजूदा समय तक 13 लाख बैंक खाते खोले जा चुके हैं। इनमें से 62 प्रतिशत खाते पुरुषों के हैं और करीब 35 फीसदी महिलाओं के हैं जबकि बाकी किशोर और युवाओं के हैं। जिले में इस समय 9,96,004 बैंक खाते चालू हैं। बाकी तीन लाख खाते आठ साल के अंदर बंद हो चुके हैं। इन 9,96,004 में से 8,91,805 बैंक खातों में इस समय लेनदेन हो रहा है। बाकी 1,04,199 खाते अभी निष्क्रिय है। इन खातों में दो साल से कोई लेनदेन नहीं हुआ है और बाकी बैंक खातों में भी लेनदेन नाममात्र का ही हो रहा है। प्रत्येक खाते में औसतन 1000 रुपये का लेनदेन हुआ है। काफी खाते ऐसे हैं, जिनमें एक बार भी पैसों का लेनदेन हुआ है। खाता धारक पैसा जमा नहीं कर रहे हैं। योजना के बैंक खातों की स्थिति से जिले की अर्थव्यवस्था का भी आंकलन किया जा सकता है। 

आर्थिक तंगी व दो अकाउंट मुख्य कारण
जिले में जनधन योजना के सफल नहीं होने के दो मुख्य कारण हैं। इनमें एक दो बैंक अकाउंट होना और दूसरा आर्थिक तंगी है। जिले के लीड बैंक मैनेजर विदुर भल्ला ने बताया कि योजना के तहत काफी ऐसे लोगों को खाता खोल दिया गया। जिनके पहले से ही दूसरे बैंकों में भी खाते थे। साथ ही लोगों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने का भी प्रमुख कारण है। खाता बंद होने या निष्क्रिय होने का 50 प्रतिशत कारण आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होना है। 

15 अगस्त, 2014 में शुरू हुई थी जनधन खाता
प्रधानमंत्री जनधन योजना की शुरुआत 15 अगस्त, 2014 को हुई थी। तब से अभी तक आठ साल हो चुके हैं। कुछ समय पहले ही केंद्रीय वित्त मंत्री ने कुछ आंकड़े जारी किए थे। इसके तहत देश भर में योजना के तहत 46 करोड से अधिक बैंक खाते खुल चुके हैं। इनमें 1.74 लाख करोड़ रुपए जमा हैं। लाभ लेने वाली 67 प्रतिशत आबादी ग्रामीण हैं। जबकि 56 प्रतिशत महिलाओं ने खाते खुलवाए हैं। 

जनधन खाता धारकों की जुबानी

जो वादा किया वह सुविधा नहीं मिली
वर्ष 2014 में बैंक खाता खुलवाया था। तब बैंक ने तमाम तरह की सुविधा देने का वादा किया था, लेकिन कुछ नहीं मिला। अतिरिक्त सुविधा के नाम पर धनराशि मांगी गई थी। तभी से खाते में कोई लेनदेन नहीं किया। -वेदू, निवासी जमशेदपुरा

इतना पैसा नहीं होता कि बैंक में जमा करा सकें। जो पैसा आता है, वह घर की तमाम जरुरतों पर खत्म हो जाता है। बैंक जाने की स्थिति ही नहीं आ पाती है और उससे पहले रुपये खर्च हो जाते हैं। -बिरमा देवी, निवासी जमशेदपुरा

काफी समय पहले बैंक ने गांव में शिविर लगाया था। उसमें खाता खुला गया था। खाते के साथ पासबुक मिली। चेक, एटीएम आदि की सुविधा नहीं मिली। खाता खुलने के बाद उसने कभी लेनदेन नहीं किया। -शीतल निवासी जारचा

बैंक खाता खुला था पर बाद में उसे बंद करवा दिया। खाते में लेनदेन करने के लिए पैसा ही नहीं है। बीमा और अन्य सुविधा के बारे में जानकारी नहीं है। -अंजली, निवासी रघुवीर गढ़ी

खाता खोलते समय बताया था कि सरकार पैसा देगी, लेकिन कुछ नहीं मिला। खाते से और भी कुछ सुविधा नहीं मिली। मेरे पास खाते में जमा करने के लिए पैसे नहीं है। इसी कारण खाते का प्रयोग नहीं किया। -उषा, निवासी जारचा
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