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ओम प्रकाश चौटाला को सजा: आय से अधिक संपत्ति मामले में 4 साल की जेल और 50 लाख का जुर्माना

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Fri, 27 May 2022 03:59 PM IST
सार

सीबीआई द्वारा दायर आरोप पत्र के अनुसार चौटाला 1993 और 2006 के बीच 6.09 करोड़ रुपये (आय के अपने वैध स्रोत से अधिक) की संपत्ति एकत्र करने के लिए जिम्मेदार हैं। मई 2019 में प्रवर्तन निदेशालय ने 3.6 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की थी।

ओम प्रकाश चौटाला
ओम प्रकाश चौटाला - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

अदालत ने आय से अधिक संपत्ति मामले में दोषी हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला को चार साल की जेल और 50 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई है। गौरतलब है कि चौटाला ने अपनी बीमारी व मामले के पुराना होने के नाते सहानुभूति बरतने का आग्रह किया था। वहीं सीबीआई ने कहा था कि भ्रष्टाचार समाज के लिए कैंसर के समान है, भ्रष्टाचार के मामले में कोर्ट ऐसी सजा सुनाए जिससे समाज में मिसाल दी जा सके।

जाना होगा जेल

अदालत ने ओम प्रकाश चौटाला को तीन साल से अधिक की सजा सुनाई है इसलिए उन्हें जेल जाना ही पड़ेगा। हालांकि वह जमानत के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं जहां से उन्हें राहत मिल सकती है।



पिता को चार साल की सजा मिलने के बाद उनके बेटे अभय चौटाला ने कहा कि, हम इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट जाएंगे। अगले दो दिनों में हम अपने वकील से सलाह करके सोमवार या मंगलवार तक हाईकोर्ट में अपील करेंगे।

क्या है मामला

सीबीआई द्वारा दायर आरोप पत्र के अनुसार चौटाला 1993 और 2006 के बीच 6.09 करोड़ रुपये (आय के अपने वैध स्रोत से अधिक) की संपत्ति एकत्र करने के लिए जिम्मेदार हैं। मई 2019 में प्रवर्तन निदेशालय ने 3.6 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की थी।

चौटाला को जनवरी 2013 में जेबीटी घोटाले में भी दोषी ठहराया गया था। 2008 में चौटाला और 53 अन्य पर 1999 से 2000 तक हरियाणा में 3,206 जूनियर बेसिक प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति के संबंध में आरोप लगाए गए थे।


जनवरी 2013 में अदालत ने ओम प्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय सिंह चौटाला को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दस साल के कारावास की सजा सुनाई थी। चौटाला को 3,000 से अधिक अयोग्य शिक्षकों की अवैध रूप से भर्ती करने का दोषी पाया गया था।

काम न आईं चौटाला के वकील की दलीलें

राऊज एवेन्यू अदालत स्थित विशेष न्यायाधीश विकास ढुल्ल के समक्ष चौटाला की ओर से पेश अधिवक्ता हर्ष शर्मा ने कहा कि उनका मुवक्किल जन्म से विकलांग है और उन्हें जेल में अस्थमा हुआ है। वे मामले में जेल में रह चुके है और उनकी वर्तमान में आयु 87 साल की है। वे 90 प्रतिशत विकलांग हैं और बिना किसी की मदद के कहीं आ-जा नहीं सकते। चौटाला को स्वास्थ्य संबंधी कई बीमारियां हैं व उनका इलाज गुड़गांव के मेदांता में भी इलाज चल रहा है। उन्हें हार्ट की भी बीमारी है और पेसमेकर भी लगा हुआ है। चौटाला के वकील ने कोर्ट में उनकी मेडकिल हिस्ट्री की जानकारी देते हुए कहा चौटाला के फेफड़े में भी इंफेक्शन है, जिसका इलाज चल रहा है।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अगर कोई आरोपी दिव्यांग है, तो कोर्ट मानवता के आधार पर कम सजा देने पर विचार कर सकता है। चौटाला के वकील ने कहा कि जितने समय तक चौटाला जेल में रहे हैं, उसको भी सजा देते समय विचार किया जाए। कोर्ट सजा पर फैसला देते वक़्त उनकी इस कदर खराब सेहत का भी ख्याल रखे।

चौटाला के वकील ने कहा कि ओपी चौटाला पर 1993-2006 के दौरान आय से अधिक सम्पति अर्जित करने का आरोप है। यह वक्त 20 साल से भी ज्यादा का है। इस दरमियान उन्होंने हमेशा जांच में सहयोग दिया है। वकील ने कहा कि जेल में चौटाला का अच्छा व्यवहार रहा है और इस केस में अदालत में भी उन्होंने कभी सुनवाई टालने का आग्रह नहीं किया। हमेशा अदालती प्रकिया में सहयोग दिया है।

सीबीआई ने जताई थी ये आपत्ति
सीबीआई ने बचाव पक्ष के तर्कों पर आपत्ति जताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ओपी चौटाला को अधिकतम सजा देने की मांग की थी। सीबीआई वकील ने कहा कि दोषी स्वास्थ्य का हवाला देकर सजा कम करने की मांग नहीं कर सकता। भ्रष्टाचार कम करने के लिए कानून के मुताबिक सजा होनी चाहिए। दोषी की एक पत्नी है और 2 बड़े बच्चे हैं। इनके ऊपर कोई निर्भर नहीं है।

सीबीआई के वकील ने कहा भ्रष्टाचार समाज के लिए कैंसर के समान है, भ्रष्टाचार के मामले में कोर्ट को ऐसी सजा देनी चाहिए जिससे समाज में मिसाल दी जा सके। उन्होंने कहा दोषी एक सार्वजनिक व्यक्ति है। सजा कम हुई तो समाज में गलत संदेश जाएगा। इतना ही नहीं चौटाला को दूसरी बार दोषी ठहराया गया है और उनकी छवि साफ नहीं है।
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