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ट्रस्ट पर 'ट्रस्ट' का संकट: अयोध्या में जमीन खरीदने पर विवाद से जुड़ा हर अपडेट, समझिए सौदे का गणित

अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा Published by: विक्रांत चतुर्वेदी Updated Mon, 14 Jun 2021 07:07 PM IST

सार

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट द्वारा जमीन की खरीद में घोटाले के आरोपों पर हंगामा मच गया है। आम आदमी पार्टी हो या कांग्रेस सभी इसकी जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ट्रस्ट इन दावों को गलत और राजनीति से प्रेरित बता रहा है। आइए जानते हैं इस मामले के आरोपों और इससे जुडे अपडेट के बारे में...
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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के जमीन सौदे पर विवाद
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के जमीन सौदे पर विवाद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा दस मिनट पहले खरीदी गई दो करोड़ की जमीन का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट 18.5 करोड़ में करा लिया गया। एक ही दिन हुए बैनामे व एग्रीमेंट में ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा व महापौर ऋषिकेश उपाध्याय गवाह रहे। यह आरोप रविवार को पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय ने सिविल लाइंस स्थित एक होटल में आयोजित प्रेसवार्ता में लगाते हुए प्रधानमंत्री से मामले की सीबीआई जांच कराने व दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
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पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय ने कहा कि अयोध्या के बाग बिजेस्वर में स्थित 12080 वर्ग मीटर एक भूमि का बैनामा 18 मार्च, 2021 की शाम 07:05 बजे बाबा हरिदास ने व्यापारी सुल्तान अंसारी व रवि मोहन तिवारी को दो करोड़ रुपये में किया था। इसमें गवाह के रूप में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा व महापौर ऋषिकेश उपाध्याय मौजूद रहे। कहा कि इसी दिन 07:15 मिनट के करीब इसी भूमि का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट सुल्तान अंसारी व रवि मोहन तिवारी से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 18.5 करोड़ रुपये में कराया लिया।


खास बात रही कि एग्रीमेंट में भी ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा व महापौर ऋषिकेश उपाध्याय गवाह के रूप में मौजूद रहे। ट्रस्ट ने 17 करोड़ रुपये सुल्तान अंसारी व रवि मोहन तिवारी के खाते में आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर किए हैं।



चंपत राय बोले- सहमति व संवाद के आधार पर ट्रस्ट खरीद रहा है जमीन
राम मंदिर निर्माण के लिए जमीन खरीदने में श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के ऊपर लगे घोटाले के आरोप पर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने मीडिया में प्रेस नोट जारी कर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि जो राजनीतिक लोग इस मामले में प्रचार कर रहे हैं, वह भ्रामक है और राजनीति से प्रेरित है।

क्रय और विक्रय का कार्य आपसी सहमति और संवाद के आधार पर हो रहा है। सहमति के बाद सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भी किए जाते हैं। सभी प्रकार की कोर्ट फीस व स्टांप पेपर की खरीदारी ऑनलाइन की जाती है। 9 नवंबर को श्री रामजन्म भूमि के पक्ष में फैसला आने के बाद एकाएक बड़ी संख्या में लोग अयोध्या जमीनों की खरीदारी करने के लिए आने लगे।
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