गर्भवती के इलाज में लापरवाही पर दादरी का अस्पताल सील, पति की शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग ने की कार्रवाई

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Noida Bureau न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा Published by: नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 24 Feb 2021 06:51 AM IST
दादरी के मैक्स केयर अस्पताल को सील करता स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी
दादरी के मैक्स केयर अस्पताल को सील करता स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी - फोटो : amar ujala

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गर्भवती के इलाज में लापरवाही बरतने और मामले में समय से स्पष्टीकरण नहीं देने पर स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को दादरी स्थित मैक्स केयर अस्पताल को सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान कोतवाली पुलिस भी मौजूद रही। वहीं, टीम के पहुंचने से पहले ही संचालक मौके से फरार हो गया।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपक ओहरी ने बताया कि जारचा निवासी नाजिम ने गर्भवती पत्नी को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया था। पीड़ित का आरोप है कि काफी देर तक चिकित्सकों ने पत्नी का उपचार नहीं किया। इस दौरान वह दर्द से तड़पती रही। बाद में इलाज के दौरान भी चिकित्सकों ने लापरवाही बरती। इससे पत्नी की हालत और खराब हो गई। उसकी हालत अभी भी गंभीर है।


इस संबंध में पीड़ित ने जिलाधिकारी सुहास एलवाई और सीएमओ को लिखित शिकायत पत्र दिया था। मामले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इस पर मंगलवार को मेडिकल अधिकारी डॉ. चंदन सोनी, डॉ. जेशलाल, डॉ. अभिषेक त्रिपाठी और राकेश ठाकुर पुलिस के साथ अस्पताल पहुंचे। टीम को देखते ही अस्पताल संचालक मौके से फरार हो गया।

पीड़ित की शिकायत के तीन माह बाद हुई कार्रवाई
दादरी के मैक्स केयर अस्पताल की शिकायत तीन माह पहले की गई थी। इस बीच शिकायतकर्ता नवजात बेटे को खो चुका है। पत्नी का अब भी इलाज चल रहा है। शिकायतकर्ता जारचा निवासी नाजिम ने बताया कि शादी के चार साल बाद पत्नी शमा गर्भवती हुई। प्रतिमाह गांव में आशा कर्मी से टीकाकरण कराते रहे। 14 नवंबर को पत्नी को डिलीवरी के लिए दादरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भर्ती कराया गया, जहां से निजी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। आशा के कहने पर दादरी के मैक्स केयर अस्पताल में पत्नी को भर्ती करा दिया। 15 नवंबर को सुबह साढ़े छह बजे से शाम पांच बजे तक पत्नी दर्द से कराहती रही।

उसके बाद डिलीवरी कराई गई। बच्चे की हालत बिगड़ी तो उसे दिल्ली ले गए। 19 नवंबर को उसकी मौत हो गई। पत्नी के शरीर में भी इंफेक्शन हो गया। गाजियाबाद के निजी अस्पताल में अब भी उसका इलाज चल रहा है। 20 नवंबर को मामले की शिकायत करने पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने आशा कर्मी को तो निलंबित कर दिया, लेकिन अस्पताल पर कोई कार्रवाई नहीं की। अब तीन माह बाद कार्रवाई की गई है। नाजिम का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से ही झोेलाछाप डाक्टर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने कहा- अपंजीकृत है अस्पताल
मैक्स केयर अस्पताल तीन साल पहले शुरू हुआ था। स्वास्थ्य विभाग के उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. चंदन सिंह ने बताया कि प्राथमिक जांच में पता चला है कि मैक्स केयर अस्पताल पंजीकृत नहीं है। प्रबंधन को तीन दिन का समय दिया गया है। अगर उनके पास कोई कागजात है तो वे स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराएं, नहीं तो कार्रवाई होगी। अस्पताल के नाम के बारे में पूछने पर डॉ. चंदन सिंह का कहना है कि बिना पंजीकरण के कोई भी नाम रख ले, उससे क्या फर्क पड़ता है।

वहीं, अस्पताल के निदेशक डॉक्टर संजय कुमार का दावा है कि अस्पताल का पंजीकरण है। हर साल रिन्यूअल कराना होता है। कोविड के कारण नहीं करा सके। एमबीबीएस डॉक्टर ऑन कॉल अस्पताल में मरीज देखने आते हैं। वहीं, नवंबर में शमा की डिलीवरी हुई थी। बच्चा कमजोर होने और सांस लेने की परेशानी होने पर परिजन बच्चे को दिल्ली के अस्पताल ले गए थे। बच्चे की उपचार के दौरान मौत हो गई थी।

संचालक ने पंजीकरण संबंधी दस्तावेज भी मुहैया नहीं कराए हैं। अस्पताल को सील कर दिया गया है। संचालक के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. दीपक ओहरी, सीएमओ

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