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डिवाइस की मदद से 9 सालों से चल रहा था सरिया चोरी का खेल

Noida Bureauनोएडा ब्यूरो Updated Fri, 19 Apr 2019 11:23 PM IST
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डिवाइस की मदद से 9 सालों से चल रहा था सरिया चोरी का खेल
गुरुग्राम। बादशाहपुर स्थित बंसल ट्रेडिंग कंपनी में लोहे के सरिया चोरी की वारदात में कई खुलासे हो रहे हैं। मुख्यारोपी कुलदीप की गिरफ्त में आने के बाद पुलिस ने आरोपी की मौसी का लड़का जितेंद्र उर्फ जीतू को गिरफ्तार किया है। गिरोह का आठवां आरोपी है। जिसने खुलासा किया कि एक खास तरह की डिवाइस की मदद से धर्मकांटों पर तौल में गड़बड़ कर सरिया चोरी को अंजाम देते थे। 9 सालों से यह खेल चल रहा था। चोरी के माल को खपाने के लिए कुलदीप ने दिल्ली नजफगढ़ में दुकान भी खोल रखी थी, जहां वह सस्ते दाम पर लोगों को सरिया बेचता था।
डीसीपी क्राइम राजीव देशवाल ने बताया कि 6 अप्रैल को बंसल ट्रेडिंग कंपनी में सरिया चोरी की शिकायत दर्ज करने के बाद पुलिस ने मुख्यारोपी नजफगढ़ निवासी कुलदीप सिंह, ट्रक चालक आलमगीर, सहायक अली बहादुर के अलावा महेंद्रगढ़ निवासी प्रवीण, दीपक उर्फ चिंटू, गगन, ट्रांसपोर्ट मालिक प्रहलाद यादव को गिरफ्तार किया था। अपराध शाखा सेक्टर-10 प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र की टीम ने बृहस्पतिवार को आठवें आरोपी जितेंद्र उर्फ जीतू को गिरफ्तार किया। आरोपी के पिता दिल्ली पुलिस से रिटायर्ड हैं। वह खुद दिल्ली पुलिस में भर्ती की तैयारी कर रहा था लेकिन कुलदीप के कहने पर मुनाफे के लालच में कुछ समय से गिरोह में शामिल हो गया।
आरोपी के पास से एक विशेष तरह का डिवाइस बरामद हुआ है, जिसे वह कंप्यूटरीकृत धर्मकांटे पर सीपीयू से जोड़कर ट्रक के वजन में गड़बड़ी करते थे। मालिक को शक न हो इसके लिए प्रत्येक ट्रक में वो दो से तीन क्विंटल सरिया ही कम करते थे। इस चोरी के माल को नजफगढ़ दुकान पर भेजकर वहां से बेचते थे। पुलिस के मुताबिक 2009 में ऐसे ही मामले में कुलदीप जेल जा चुका है। जमानत पर आने के बाद वह दोबारा इसी खेल में लग गया था। पुलिस ने वो डिवाइस जब्त कर ली है। शुक्रवार को पुलिस ने आरोपी जितेंद्र को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया।
बादशाहपुर क्षेत्र था निशाने पर
डीसीपी के मुताबिक बीते कई सालों से बादशाहपुर के आसपास सरिया ट्रेडिंग कंपनियों के काफी संख्या में गोदाम स्थापित होने से मुख्यारोपी की नजर बादशाहपुर के आसपास ही थी। उसने आसपास के कई धर्मकांटों पर कर्मचारियों से सांठगांठ करके सरिया के तोलमोल में गड़बड़ी कर रसीद कटवा देता था। इसमें कई ट्रांसपोर्टर कंपनियों के ट्रक चालक भी उसके साथ थे। पूरे खेल में धर्मकांटों पर काम करने वाले कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। जो इनके साथ मिलीभगत कर वजन की रसीद देते थे, जिसकी एवज में उन्हें दो से तीन हजार रुपये मिलते थे। डीसीपी क्राइम के मुताबिक इसे लेकर कई धर्मकांटों पर कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है।
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