आपसी तालमेल ने बिगाड़ा डॉक्टरों का एक्सचेंज प्रोग्राम

Noida Bureauनोएडा ब्यूरो Updated Wed, 26 Sep 2018 03:32 AM IST
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तालमेल का अभाव नहीं शुरू हुआ
डॉक्टरों का एक्सचेंज प्रोग्राम
- स्वास्थ्य मंत्री ने जल्द ही कहा था प्रोग्राम शुरू करने को
- डीजीएचएस और एमएएमसी के डीन को दी थी जिम्मेदारी
- इस मसले पर दोनों अधिकारियों की अलग-अलग राय

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। विदेशी चिकित्सा तकनीक को अपना कर दिल्ली के अस्पतालों की सेहत सुधारने की मुख्यमंत्री की योजना सिस्टम में तालमेल के कारण परवान नहीं चढ़ पा रही है। इसकी बानगी फॉरेन एक्सचेंज प्रोग्राम फॉर डॉक्टर्स एंड पैरामेडिकल स्टॉफ योजना को लेकर देखी जा सकती है। दरअसल, इस योजना को जमीं पर उतारने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक (डीजीएचएस) और मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (एमएएमसी) के डीन डॉ सिद्धार्थ रामजी को दी सौंपी गई थी। लेकिन इस मामले में दोनों के सुर अलग है।
जानकारी के अनुसार इस योजना के तहत दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर्स और पैरामेडिकल स्टाफ को दूसरे राज्यों और विदेशों में भेजा जाना था ताकि वह वहां के अस्पतालों में डॉक्टरों द्वारा मरीजों का इलाज करने की नई स्किल सीखें। इतना ही नहीं इसका मकसद मरीजों और डॉक्टरों के बीच बेहतर संबंध भी बनाना था ताकि अस्पतालों में अराजकता की स्थिति न हो। इस योजना को लेकर महानिदेशक डॉ. कीर्ति भूषण का कहना है कि इसकी शुरुआत कर दी गई है। कई राज्यों और विदेशी मेडिकल विश्वविद्यालयों को इस बाबत मेल किया गया है कि दिल्ली के डॉक्टर आपके इलाज की तकनीक और स्किल्स को देखना चाहते हैं। ताकि यहां के अस्पतालों में इसे लागू किया जा सके। इसकी जानकारी स्वास्थ्य मंत्री को भी दे दी गई है। वहीं, जब इस पर मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ सिद्धार्थ रामजी से बात की गई तो उनका कहना था कि अभी इस प्रोग्राम की कोई तैयारी नहीं हो पाई है। जबकि इस मुद्दे को पिछले दिनों स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के साथ हुई बैठक में उठाया गया था, जिसके बाद स्वास्थ्य मंत्री ने इस मसले पर 15 दिन में रिपोर्ट मांगी थी।
इस रिपोर्ट पर भी डॉ भूषण का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री को रिपोर्ट सौंप दी गई है। उन्हें बता दिया गया है कि प्रोग्राम की शुरुआत कर दी गई है। ऐसे में दोनों अधिकारियों के बीच तालमेल न होने की वजह से यह योजना खटाई में पड़ती नजर आ रही है।
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