पूर्व कानून मंत्री भारती की पुनर्विचार याचिका खारिज

Noida Bureau Updated Wed, 07 Jun 2017 01:51 AM IST
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पूर्व कानून मंत्री भारती की पुनर्विचार याचिका खारिज
नई दिल्ली।दिल्ली पुलिस के खिलाफ पूर्व कानून मंत्री सोमनाथ भारती की पुनर्विचार याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है। भारती ने अज्ञात पुलिस वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने के लिए अर्जी दायर की थी, जिसे मजिस्ट्रेट ने खारिज कर दिया था। आप के वर्तमान विधायक भारती का आरोप था कि पुलिस वालों ने उन्हें छेड़छाड़ के झूठे मामले में फंसाया था। मामला मालवीय नगर इलाके में जनवरी 2014 में आधी रात को भारती की रेड से जुड़ा है।साकेत जिला अदालत की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सविता राव ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिका जुर्माने के साथ खारिज की जानी चाहिए। पूर्व कानून मंत्री भारती ने याचिका में एसीएमएम के फैसले को निरस्त करने और उन्हें भारती का बयान दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की थी। उनका कहना था कि आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ पहली नजर में मामला बनता है, तो उन्हें समन जारी किया जाए। लोक अभियोजन अधिकारी अतुल श्रीवास्तव ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि भारती उस मामले से ध्यान भटकाना चाहते हैं, जिसमें वह खुद आरोपी हैं। इस मंशा के साथ ही भारती ने थाना प्रभारी व जांच अधिकारी को आरोपी बनाने की मांग की है।अभियोजन ने कहा कि नियमानुसार सबसे पहले शिकायत एसएचओ व संबंधित डीसीपी को दी जानी चाहिए। अगर वह कार्रवाई नहीं करते, तो उसके बाद एफआईआर के लिए कोर्ट में अर्जी दायर की जा सकती है। भारती ने पुलिस को शिकायत दिए बिना सीधे ही कोर्ट में अर्जी दायर की है, जो गलत है। मालवीय नगर इलाके में 14 जनवरी 2014 की रात छापेमारी के मामले में भारती ने पुलिसवालों पर एफआईआर के लिए अर्जी दायर की थी। उनका आरोप था कि पुलिस वालों ने उन्हें अफ्रीकी महिलाओं से छेड़छाड़ के आरोप में झूठा फंसाया था।भारती का कहना था कि पुलिस ने कई अहम तथ्य छिपाए, कई गवाहों के बयान व वीडियो फुटेज को रिकॉर्ड पर नहीं लिया गया। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 10 नवंबर 2014 को भारती की अर्जी खारिज करते हुए कहा था कि केंद्र अथवा राज्य सरकार की अनुमति के बिना सरकारी कर्मचारियों पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। दिल्ली पुलिस ने मालवीय नगर मामले में भारती समेत 18 लोगों के खिलाफ छेड़छाड़, चोट पहुंचाने, दंगा करने, धमकी देने संबंधी धाराओं में चार्जशीट दाखिल की थी। पुलिस ने चार्जशीट में 41 गवाहों की सूची दी थी। महिलाओं की शिकायत पर कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। पुलिस ने 19 जनवरी 2014 को अदालती आदेश पर एफआईआर दर्ज की थी।

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