गुड़गांव गैंगरेप की दूसरी साइड स्टोरी फाइल-Business

Noida Bureau Updated Wed, 07 Jun 2017 01:39 AM IST
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आठ घंटे तक बच्च्ची का शव लेकर घूमती रही महिला
गैंगरेप की पीड़िता वारदात के बाद किसी तरह मायके पहुंची। लेकिन उसने गैंगरेप की बात परिजनों को नहीं बताई, उसे डर था कि कहीं उसका पति उसे छोड़ न दे। बच्ची का शव लेकर वह आठ घंटे तक घूमती रही। पुलिस ने उसे दिल्ली से गुरुग्राम बुलाया।
वारदात के बाद पीड़ित महिला किसी तरह तड़के दिल्ली अपने मायके पहुंची। जहां पर उसकी घायल बच्ची की मौत हो गई। उसने पुलिस को फोन किया। पुलिस ने उसे गुरुग्राम बुलाया। जिसके बाद वह बच्ची का शव लेकर एमजी रोड मेट्रो स्टेशन दोपहर दो बजे पहुंची। जहां पर थाना प्रभारी नरेन्द्र उससे मिले। बच्ची के शव का पोस्टमार्टम करवाने के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया। इसी बीच थाना प्रभारी ने अपने एक बयान में पीड़िता के पति का नाम लेते हुए कहा कि पहले वह आया था। उसके बयान पर हत्या का मामला दर्ज कि या गया। बाद में पीड़िता का नाम ले कर बताया कि वह खुद बयान दर्ज कराने आई थी। उसका मेडिकल कराने के बाद 3 जून को गैंगरेप के आरोप को शामिल किया गया। थाना प्रभारी की ओर से पीड़िता का नाम सार्वजनिक किए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। हरियाण महिला आयोग की अध्यक्ष कमलेश पंचाल ने इसकी निंदा की है । उन्होंने कहा है कि वह इस मामले में शिकायत करेंगी।




पुलिस के पास मैजिक, ऑटो चालकों का रिकॉर्ड नहीं

अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम।
साइबर सिटी में टाटा मैजिक या ऑटो चालकों का रिकॉर्ड न तो पुलिस के पास है और न ही आरटीए के पास, जबकि कई मामलों में देखा गया है कि इन्हें चलाने वाले ही अपराध करते हैं। ऐसे में आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। पुलिस को रजिस्ट्रेशन नंबर का सहारा लेना पड़ता है, लेकिन कई घटनाओं की जांच में पाया गया है कि ऑटो या मैजिक पर नंबर नहीं लिखा हुआ था, तब पुलिस की ओर परेशानी बढ़ जाती है।

10 प्रतिशत का ही रिकॉर्ड
आरटीए के अनुसार, साइबर सिटी में तीस हजार से ज्यादा मैजिक और ऑटो चल रहे हैं, लेकिन इन सभी का रिकॉर्ड पुलिस के पास नहीं है। पुलिस के पास सिर्फ 10 प्रतिशत चालकों का ही रिकॉर्ड है, जो शहर में विभिन्न रूटों पर चलते हैं।

30 प्रतिशत मालिक खुद चलाते हैं आटो
ऑटो यूनियन के प्रधान सतबीर ने बताया कि कुछ लोगों ने ऑटो या मैजिक खरीदकर उसको किराये पर देने का व्यापार शुरू कर रखा है। सिर्फ 30 प्रतिशत ऐसे ऑटो मालिक हैं, जो खुद खरीदकर ऑटो चलाते हैं, जबकि 70 प्रतिशत ऑटो किराये पर चलाए जा रहे हैं। उन ड्राइवरों का रिकॉर्ड यूनियन के पास नहीं है। हमारे पास सिर्फ 800 ऑटो का रिकार्ड हैं।

बिना नंबर प्लेट के दौड़ रहे
स्कूटी या फिर कार पर अगर नंबर प्लेट न हो तो पुलिस चालान काट देती है, लेकिन ऑटो वालों पर पुलिस और परिवहन विभाग मेहरबान है। बिना नंबर प्लेट के ऑटो सरेआम घूम रहे हैं।

शहर में जो ऑटो चल रहे हैं, उन चालकों का रिकार्ड है हमारे पास, लेकिन दूसरे जिलों से जो ऑटो या मैजिक आ जाते हैं, उनका रिकॉर्ड कैसे रखा जा सकता है। ऑटो चालकों पर नकेल कसने के लिए दूसरा रास्ता निकाला जा रहा है।
-बलबीर सिंह, डीसीपी ट्रैफिक

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