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Noida Bureauनोएडा ब्यूरो Updated Sun, 25 Nov 2018 05:31 AM IST
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स्वीकृति की बाट जोह रही एम्स में निशुल्क जांच योजना
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- एम्स में 500 रुपये तक निशुल्क जांच की राह मुश्किल
- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से अब तक नहीं मिली मंजूरी
- एम्स की एक कमेटी ने पिछले वर्ष भेजा था प्रस्ताव
- अन्य अस्पतालों का हवाला देकर मंत्रालय से नहीं मिल रही मंजूरी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एम्स में मरीजों के लिए 500 रुपये तक की जांच निशुल्क की राह फिलहाल आसान नहीं दिख रही है। साल भर पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को एम्स की ओर से जो प्रस्ताव मिला था, उस पर अब तक स्वीकृति की मोहर नहीं लग पाई है। सूत्रों की मानें तो मंत्रालय को डर है कि अन्य अस्पतालों से भी इसी तरह की मांग की जा सकती है। इसलिए इस प्रस्ताव को मंजूरी देने से मना कर दिया गया है। फिर भी एम्स प्रबंधन और मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि प्राइवेट वार्ड का शुल्क बढ़ाने की सलाह पर भी मंजूरी नहीं मिल रही है। इसे लेकर भी कई तरह की आपत्तियां हैं।
एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर की मानें तो मंत्रालय के उच्च अधिकारियों तक प्रस्ताव की गंभीरता और उसके प्रभावों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है। अब तक मायूसी मिलने के बाद भी उनके प्रयास जारी हैं। वहीं, एम्स निदेशक डॉ. गुलेरिया का कहना है कि प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है।
दरअसल, एम्स की ओपीडी में आने वाले करीब 425 मरीजों पर हुए अध्ययन के बाद ही गरीब मरीजों की सहायता के लिए एम्स में 500 रुपये तक की जांचें निशुल्क करने की चर्चा शुरू हुई थी। इसे देखते हुए एम्स प्रबंधन ने एक कमेटी भी गठित की थी। करीब तीन से चार बैठक के बाद कमेटी ने अपनी सिफारिशों को प्रबंधन तक पहुंचाया और वहां से पूरा प्रस्ताव मंत्रालय तक पहुंचा। इसे लेकर पिछले वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर एम्स निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने इस प्रस्ताव से जुड़ी अहम जानकारियां भी साझा की थीं, लेकिन गुरुवार को केरल भवन में जब डॉ. गुलेरिया से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब तक मंजूरी नहीं मिली है। अभी इस पर चर्चा चल रही है।
वहीं, मंत्रालय के सूत्रों की मानें तो एम्स को मंजूरी मिलने के बाद अन्य अस्पतालों से भी इस तरह के प्रस्ताव सामने आ सकते हैं। इसके अलावा वित्तीय कारणों को लेकर भी इसे सीधे तौर पर मंजूरी नहीं मिल सकती।
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