निर्भया के दोषी विनय शर्मा ने राष्ट्रपति को भेजी दया याचिका

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Wed, 29 Jan 2020 07:22 PM IST
विनय शर्मा
विनय शर्मा - फोटो : सोशल मीडिया
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निर्भया के दोषियों में से एक विनय ने बुधवार शाम को राष्ट्रपति के पास याचिका भेजकर दया की अपील की है। माना जा रहा है कि याचिका दाखिल करने से निर्भया के दोषियों को एक फरवरी को दी जाने वाली फांसी एकबार फिर टल सकती है। जेल प्रशासन का कहना है कि गुरुवार को दया याचिका दिए जाने की सूचना पटियाला हाउस कोर्ट को दी जाएगी। इसके बाद कोर्ट का जो आदेश होगा उसका पालन किया जाएगा। 
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बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से दया याचिका को चुनौती देने वाली याचिका खारिज होने के बाद अब मुकेश के सभी कानूनी विकल्प खत्म हो गए हैं। इस फैसले के बाद यह तय हो गया है कि इस मामले में मुकेश को फांसी दी जाएगी। लेकिन दोषियों के वकील ने अब अन्य गुनहगारों के कानूनी विकल्प का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। 


दोषियों के वकील  ने सुप्रीम कोर्ट में अक्षय की ओर से सुधारात्मक याचिका दाखिल की है जिस पर पांच जजों की पीठ गुरुवार दोपहर एक बजे से सुनवाई करेगी। वहीं, बुधवार शाम को विनय की ओर से राष्ट्रपति के पास दया की अपील की गई है। दया याचिका में सजा घटाने की मांग की गई है। दया याचिका दिए जाने के बाद जेल प्रशासन को भी इसकी जानकारी दे दी गई है। 

इससे पहले आज ही सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य दोषी मुकेश कुमार सिंह की याचिका पर कोई भी समीक्षा करने, या कोई भी विचार करने से मना कर दिया है। अदालत ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि उन्हें राष्ट्रपति के फैसले में दखल देने की जरूरत है। इस तरह से अब निर्भया के एक दोषी मुकेश के सभी कानूनी विकल्प खत्म हो चुके हैं और अब उसकी फांसी होना तय है। इससे पहले मुकेश के वकील ने कहा था दया याचिका को जल्द खारिज करने की वजह से उस पर ठीक से गौर नहीं किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि उन्हें राष्ट्रपति के फैसले में कोई जल्दबाजी नजर नहीं आती। उन्होंने सभी दस्तावेज देखकर ही फैसला दिया है।  

सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि जेल में मुकेश के साथ खराब व्यवहार हुआ यह उसकी दया का आधार नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि दया याचिका पर शीघ्र कार्रवाई करने का मतलब ये नहीं है कि अच्छे से फैसला नहीं लिया गया है।

इसके साथ ही मुकेश के सभी कानूनी विकल्प खत्म हो गए हैं। दिल्ली में दिसंबर 2012 में हुए इस जघन्य अपराध के लिये चार मुजरिमों को अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। इन दोषियों में से एक मुकेश की दया याचिका राष्ट्रपति ने 17 जनवरी को खारिज कर दी थी। 
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