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जेपी इंफ्रा में खाली पड़े 10 फीसदी मकानों का नहीं है कोई दावेदार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 19 Nov 2019 10:22 PM IST
जेपी इंफ्राटेक प्रोजेक्ट (फाइल)
जेपी इंफ्राटेक प्रोजेक्ट (फाइल)
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जेपी इंफ्राटेक प्रोजेक्ट में खाली पड़े करीब 2500 से 3000 मकानों का कोई दावेदार नहीं मिलने के बाद, दो सालों से दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही इस हाई प्रोफाइल रियल एस्टेट और सड़क निर्माण कंपनी में "फर्जी खरीदारों" का अंदेशा जताया जा रहा है। 
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खबरों के मुताबिक खाली पड़े मकानों की संख्या पर अलग-अलग दावे हो सकते हैं। लेकिन जेपी इंफ्राटेक द्वारा बेचे गए फ्लैट और विला में से करीब 10 फीसदी खरीदारों ने दिवालिया प्रक्रिया शुरू होने के 27 महीनों बाद भी अब तक कोई दावा नहीं किया है। 

कोई भी रियल एस्टेट कंपनी जब इस प्रक्रिया से गुजरती है तो वह नहीं बिक पाए मकानों को तवज्जो देती है जिससे वह धनराशि इकट्ठा कर सकती है और अपने ग्राहकों पर पड़ने वाले बोझ को भी कम कर सकती है।

यह मामला तब सामने आया है जब राष्ट्रीय भवन निर्माण कॉरपोरेशन (एनबीसीसी) ने इस अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए करीब 3000 बेनामी फ्लैट का आंकड़ा जुटाया। वह इन फ्लैट को बेचकर आधा मुनाफा बैंकों को देना चाहती है। 

मालूम हो कि कर्ज के बोझ तले दबी जेपी इंफ्राटेक के अधिग्रहण के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनबीसीसी और सुरक्षा रियल्टी को नए सिरे से बोलियां जमा कराने को कहा गया है। 

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने जेपी इंफ्रा की दिवालिया प्रक्रिया का 90 दिन में पूरा करने का निर्देश दिया था। साथ ही कहा था कि संशोधित समाधान योजना सिर्फ एनबीसीसी और सुरक्षा रियल्टी से मांगी जाए। समझा जाता है कि ये कंपनियां जल्द ही नई बोलियां जमा करा देंगी। 

जयप्रकाश एसोसिएट्स की संकट में घिरी अनुषंगी जेपी इंफ्रा पर करीब 9,800 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है। दिवालिया प्रक्रिया शुरू होने के पहले चरण में कर्जदाताओं ने सुरक्षा समूह की इकाई लक्षदीप की 7,350 करोड़ रुपये की बोली को खारिज कर दिया था। दूसरे दौर में भी कर्जदाताओं ने सुरक्षा रियल्टी और एनबीसीसी की बोलियां खारिज कर दी थी। अब तीसरी बार बोली लगाने की तैयारी है।

दो साल पहले शुरू हुई प्रक्रिया
आईडीबीआई बैंक की अगुवाई में कर्जदाता समूह की अपील पर जेपी इंफ्रा के खिलाफ 2017 में दिवालिया प्रक्रिया शुरू हुई थी। कंपनी के समाधान पेशेवर नियुक्त किए गए अनुज जैन ने अक्तूबर 2018 में एनसीएलटी के निर्देश पर बोलियां मंगानी शुरू की थी। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के 13 बैंक व 23 हजार से ज्यादा मकान खरीदारों को जेपी इंफ्रा का मामला निपटने का इंतजार है।
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