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एनआरआई सेजन्म प्रमाणपत्र बनाने को मांगी रिश्वत, हंगामा

Ghaziabad Bureauगाजियाबाद ब्यूरो Updated Mon, 17 Feb 2020 01:21 AM IST
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एनआरआई से जन्म प्रमाणपत्र बनाने को मांगी रिश्वत, हंगामा
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गाजियाबाद। जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने में घूसखोरी सिर्फ नगर निगम मुख्यालय में ही नहीं जोनल कार्यालयों में चल रही है। निगम के कविनगर जोनल कार्यालय में तैनात आउटसोर्सिंग कर्मचारी ने एनआरआई महिला से जन्म प्रमाणपत्र बनाने के नाम पर पांच हजार रुपये मांगे। महिला ने दो हजार रुपये दे भी दिए लेकिन बाद में कर्मचारी ने जन्म प्रमाणपत्र बनाने से मनाकर एनओसी जारी करने की बात कही। इस पर महिला भड़क गई। मामला स्थानीय पार्षद तक पहुंचा तो उसने समझौता कराकर रिश्वत की रकम वापस कराई।
कविनगर निवासी महिला की बेटी अमेरिका में रह रही है। उसे जन्म प्रमाणपत्र की जरूरत पड़ी तो उसने जनवरी में नगर निगम के कविनगर जोनल कार्यालय में आवेदन किया। यहां पर तैनात आउटसोर्सिंग कर्मचारी ने प्रमाणपत्र जारी करने के लिए पांच हजार रुपये मांगे। महिला ने दो हजार रुपये एडवांस दे दिए और तीन हजार बाद में देने की बात तय हुई। महिला के जन्म को 20 साल से ज्यादा हो जाने के कारण नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने प्रमाणपत्र बनाने से मना कर दिया। ऐसे आवेदनों पर नगर निगम सिर्फ एनओसी जारी करता है कि निगम में आवेदक के नाम का जन्म प्रमाणपत्र नहीं बना है। इस पर मामला बिगड़ गया। महिला के साथ उनके पड़ोसी भी नगर निगम में पहुंच गए और हंगामा किया। रिश्वत लेने के बावजूद जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र न मिलने पर उन्होंने विरोध जताया।
पार्षद ने वापस कराए दो हजार रुपये
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर रुपये लेने और फिर विवाद होने का मामला नगर निगम के स्थानीय पार्षद हिमांशु मित्तल के पास पहुंचा। वह जोनल कार्यालय पहुंचे और मामले को शांत कराया। उन्होंने रिश्वत के रूप में लिए गए दो हजार रुपये वापस कराकर मामला रफादफा कराया। नगर निगम में यह मामला अभी चर्चा का विषय बना है।
कोट
एनआरआई से जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के नाम पर पैसा लेने का मामला सामने आया था। विवाद बढ़ने पर मुझे जानकारी हुई तो मैंने दोनों पक्षों में समझौता कराकर रकम वापस कराई। पैसा लेने वाले कर्मचारी को हिदायत भी दी गई है कि भविष्य में ऐसी शिकायत नहीं मिलनी चाहिए। - हिमांशु मित्तल, पार्षद, कविनगर
महिला की ओर से दिया गया पैसा लौटा दिया गया था। प्रमाणपत्र के लिए पैसा मांगा नहीं गया था। इससे ज्यादा मुझे मामले में कुछ नहीं कहना है। - कविनगर जोन में तैनात आउटसोर्सिंग कर्मचारी
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