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काम धंधे प्रभावित होने से बढ़ रहे हैं डिप्रेशन के मामले, सावधान रहें

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jun 2020 05:13 PM IST
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काम धंधे प्रभावित होने से बढ़ रहे हैं डिप्रेशन के मामले, सावधान रहें
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गाजियाबाद। कोरोना संक्रमण के चलते नौकरी से निकाले जाने व काम-धंधे बंद होने से लोगों में हताशा बढ़ रही है। इसका एक बड़ा कारण बच्चों की फीस, मकान और कार की ईएमआई की सिरदर्दी परेशान करने लगी है।  जिला मानसिक स्वास्थ्य प्रकोष्ठ के कंसलटेंट साइकेट्रिस्ट डा. साकेतनाथ तिवारी बताते हैं, विपरीत परिस्थितियों में एक बड़ी दिक्कत न्यूक्लियर फैमिली होने से भी आ रही है, गृह क्लेश के मामले बढ़ रहे हैं। इसके पीछे भी कहीं न कहीं, काम चले जाने के चलते बिगड़ती आर्थिक स्थिति ही है। जो व्यक्ति काम के सिलसिले में घर से दिनभर घर के बाहर रहता था, उसे अब घर में ही रहना पड़ रहा है। काम छूट जाने के कारण भविष्य की चिंता भी अंदर ही अंदर परेशान करे जा रही है, ऐसे में कई बार पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी टोका टाकी, गृह क्लेश का कारण बन रही है।   मनोचिकित्सक डा. हेमिका अग्रवाल का कहना है कि लॉकडाउन की शुरुआत में डिप्रेशन के मामले कुछ कम होते लग रहे थे। परिवार के सदस्यों को एक-दसूरे को समझने के लिए समय मिला तो लोगों ने इसका फायदा भी उठाया। यह समय लंबा होने से स्थितियां उलटने लगीं। इस बीच लोगों की काम-धंधे न चलने की चिंता भी बढ़ी और तमाम निजी कंपनियों ने छंटनी शुरू कर दी। कोरोना संक्रमण का तनाव भी बराबर बना हुआ है। ऐसे में नकारात्मक विचार लोगों पर हावी हो जा रहे हैं। ऐसे में घर के कमाने वाले व्यक्ति पर तनाव हावी होने का खतरा बढ़ रहा है। अन्य सदस्य इस बात को अपने जहन में रखें और व्यवहार पर नजर रखें। आत्मीयता के साथ बात करने का प्रयास करें। हौंसला अफजाई करते हुए नए काम के बारे में सोच विचार भी कर सकते हैं।    डा. हेमिका का कहना है कि अब अधिकतर घरों में पति-पत्नी, दो ही लोग हैं, जिनके बीच मानसिक परेशानी पर आपस में विचार हो सकता है। तो हर बात एक-दूसरे से शेयर करें और एक-दूसरे का सहारा बनने का प्रयास करें। इसके अलावा घर में रहते हुए भी कुछ न कुछ करते रहें। दिनचर्या की शुरुआत योगा, मेडिटेशन और व्यायाम से करें। हर समय खुद को किसी न किसी काम में व्यस्त रखने का प्रयास करें। दिमाग को खाली न रहने दें। मानसिक ऊर्जा बनाए रखने के लिए बच्चों के साथ खेलना, म्यूजिक सुनना काफी मददगार साबित होता है। जिला अस्पताल में में निशुल्क इलाज  व्यवहार में परिवर्तन जैसे चिड़चिड़ापन, गुस्सा और नकारात्मक विचार आने पर जिला मानसिक स्वास्थ्य प्रकोष्ठ में दूरभाष संख्या 7839800692 पर सपंर्क कर सकते हैं। इस नंबर पर सभी कार्य दिवसों के दौरान सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक काउंसलर उपलब्ध रहते हैं।  -------------- आशुतोष यादव 

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