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घर से लेकर स्कूल तक कहीं सुरक्षित नहीं हैं बेटियां

Ghaziabad Bureau Updated Tue, 17 Apr 2018 10:25 PM IST
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घर से लेकर स्कूल तक कहीं सुरक्षित नहीं हैं बेटियां
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बुलंदशहर। खेत में बकरी चराने की सजा अपने बचपन को खोकर चुकाने वाली नन्हीं भय और आतंक से दो चार हो रही है। परिजन उसे अस्पताल से थाने तक लेकर जिस तरह से जूझे उसने उसकी बेचारगी को और बढ़ा दिया है। जिले में कल की घटना के बाद उठा रोष अभी थमा भी नहीं था कि औरंगाबाद की घटना ने अभिभावकों को और डरा दिया। परिजनों के मुताबिक जिस तरह से एक के बाद एक छोटी बच्चियों के साथ इस तरह का अमानवीय कृत्य हो रहा है, उससे यह सहज अंदाज लगाया जा सकता है कि दरिंदों में कानून का खौफ खत्म हो गया है।
औरंगाबाद का गुनाहगार अभी पुलिस की पकड़ से बाहर है, ऐसे में परिजनों को डर सता रहा है कि कहीं कोई अनहोनी न हो जाए। चाक-चौबंद सुरक्षा का दावा करने वाली योगी सरकार में अकेले बुलंदशहर में जनवरी से अब तक दर्जनों वारदातें हो चुकी हैं। जनवरी 2018 से अप्रैल तक पुलिस रिकार्ड में महिला उत्पीड़न मुख्य रूप से दुष्कर्म व सामूहिक दुष्कर्म के करीब चार दर्जन से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। सभी मामलों में जांच का कम जारी है। गुजरे सालों के मुकाबलेे इस वर्ष की प्रारंभिक तिमाही में ही ये आंकड़े ड्योढ़े हैं। वर्ष 2017 में में करीब 107 दुष्कर्म दर्ज किए गए थे। जबकि वर्ष 2016 में 68 और वर्ष 2015 में 56 दर्ज हुए थे। वर्ष 2018 में आगाज के साथ ही आंकड़े बढ़ने लगे हैं। पुलिस के आला अधिकारी पल्ला झाड़ रहे हैं। पुलिस दावा कर रही है कि ज्यादातर मामले प्रारंभिक जांच में ही फर्जी साबित होते हैं।
बच्चियों को बताना होगा गुड और बैड टच
यदि आंकड़ों को खंगाले तो जनपद में बीते तीन माह के भीतर करीब एक दर्जन बच्चियां दुष्कर्म का शिकार हुईं हैं। इनमें से अधिकतर बच्चियों की उम्र 8 से 10 वर्ष के भीतर है। इसलिए मनोवैज्ञानिक शगुफ्ता आलम कहती हैं कि वक्त आ गया है, जब हमें बच्चों को चार साल से ही गुड और बेड टच के बारे में बताना होगा। समाज में सोशल पुलिसिंग को सक्रिय करना होगा। बच्चों को मानसिक तौर पर इस तरह के अपराधों के प्रति जागरूक करना होगा।
बच्चियों के साथ हुई घटनाओं का रिकार्ड
पांच फरवरी को अगौता थाना क्षेत्र के एक गांव में शादी समारोह में शामिल होने गईं दो बच्चियों के साथ रेप। पीड़िता छह और आठ साल की थीं। सात फरवरी को गुलावठी थाना क्षेत्र में छह साल की मासूम बच्ची रेप का शिकार हुई। 12 फरवरी खुर्जा देहात के गांव एक छह वर्षीय बच्ची के साथ गांव निवासी किशोर ने दरिंदगी की। नगर क्षेत्र में शिक्षक ने कक्षा दो की छात्रा के साथ छेड़छाड़ की। स्याना थाना क्षेत्र में बीते माह एक किशोर ने बच्ची के साथ दुष्कर्म की कोशिश की थी। वहीं, डिबाई में बीते तीन मार्च को पड़ोसी ने सात साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। इसके अलावा देहात कोतवाली क्षेत्र में नौ वर्षीय मासूम बच्ची को पिता ने ही खराब करने की कोशिश की। ये आंकड़े कहानी बयां कर रहे हैं कि मासूमों का बचपन किस कदर तार-तार हो रहा है। तमाम कवायदों और कैंडल मार्च के बाद भी समाज को यह सिखाना मुश्किल हो रहा है कि आखिर इन मासूमों को हवस का शिकार बनाया क्यों जा रहा है।
महिलाओं के लिए काम करने वाली उपासना अरोड़ा कहती हैं कि यह स्थिति बहुत विस्फोटक है, लगता है समाज राक्षस हो गया है, हम न पाश्चात्य सभ्यता के रहे न भारतीय परंपराओं को मानने वाले, इसलिए वापस अपनी जड़ों में लौटना होगा। इतना संवेदनशील मामला है कि कई बार तो परिवार के लोग ही मामले को रफादफा कर देते हैं कुछ मामले सामने आते भी हैं तो सिस्टम का रवैया सपोर्ट नहीं करता । इसलिए दरिंदों के हौसले बुलंद हैं।
कोट..
मामला संज्ञान में आते ही दर्ज होता है। जांच भी की जाती है। कई बार इस तरह से मामलों में फर्जीवाड़ा भी सामने आता है। कानून की पालना के लिए अब और सख्त कदम उठाए जाएंगे ऐसा विश्वास दिलाता हूं। - मुनीराज जी, एसएसपी
विशेषज्ञ की राय...
जिला स्तर पर ही नहीं प्रदेश और देश स्तर पर भी बाल अपराधियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। खास तौर पर बच्चियों और किशोरियों के साथ रेप के मामले बढ़े हैं, ऐसे अधिकतर मामलों में आरोपी भी किशोर या बाल्य वस्था के ही सामने आए हैं। इस सबका कारण बच्चों की ओर परिजनों का ध्यान नहीं देना मुख्य कारण है और दूसरा कारण अत्यधिक आधुनिकता का दुरुपयोग भी है। - डा. जितेंद्र तेवतिया, मनोचिकित्सक

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