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किसान बोले योजना की होनी चाहिए जांच

Ghaziabad Bureauगाजियाबाद ब्यूरो Updated Mon, 17 Jun 2019 01:01 AM IST
सांकेतिक तस्वीर
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गाजियाबाद। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में लोनी के जावली गांव में हुई गड़बड़ी के मामले को लेकर किसानों में आक्रोश है। गांव के किसानों का कहना है कि इस मामले की गहन जांच होनी चाहिए। ग्रामीणों का दावा है कि जांच में यह स्पष्ट हो जाएगा कि प्रशासनिक अधिकारियों ने इस मामले में बड़ा खेल किया है। इसके तहत गांव के किसानों के साथ धोखा हुआ है, जबकि फर्जी नामों का लिस्ट में शामिल होना इसका एक उदाहरण है।
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किसानों के लिए चलाई गई प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना में बड़ा खेल होने की खबर को अमर उजाला ने रविवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। अब खबर छपने के बाद प्रशासनिक अफसरों में खलबली में मच गई है। गांव के किसानों का कहना है कि अधिकारियों ने गांव के किसानों द्वारा आवेदन करने के बाद भी उनका नाम सूची में शामिल नहीं किया।

वहीं, आरोप है कि जावली गांव के किसानों के नाम पर फर्जी लोगों के नाम शामिल कर इस योजना के तहत मिलने वाली रकम का खेल किया है। इस मामले में निचले से लेकर ऊपर तक के अफसर शामिल हो सकते हैं। गौरतलब है कि जावली गांव के रहने वाले अधिवक्ता महकार कसाना ने प्रशासन में एक आरटीआई डालकर प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना के तहत जावली गांव में इस योजना के तहत कितने किसानों को लाभ मिलने की जानकारी मांगी थी, जिसके जवाब में चौंकाने वाला खुलासा हुआ।

आरटीआई के जवाब में पता चला कि गांव के 396 किसानों को इस योजना का लाभ दिया गया, लेकिन गांव के लोगों का कहना है कि सूची में शामिल केवल 10 प्रतिशत लोग ही उनके गांव के रहने वाले हैं, बाकी के नाम फर्जी तरीके से सूची में शामिल किए गए हैं। ऐसे में अब ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले की सख्ती से जांच होनी चाहिए।

डीएम से की जा चुकी शिकायत
अधिकवक्ता महकार कसाना ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी रितु माहेश्वरी से की है, जिसकी उनके पास लिखित कॉपी भी है, जिस पर रिसिविंग भी है। शिकायत के माध्यम से बड़े घोटाले के आसार जताए गए हैं।

ग्रामीण बोले, धन्यवाद अमर उजाला
लोनी के जावली गांव की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित करने के लिए गांव के लोगों ने अमर उजाला का धन्यवाद किया है। उन्होंने कहा कि किसी अखबार ने गांव में आकर किसानों के साथ होने वाली इस धोखाधड़ी को उजागर करने का प्रयास किया है। किसानों के साथ लगातार धोखाधड़ी होने पर अमर उजाला ही उनकी बात को प्रमुखता से उठाता है।

- प्रशासनिक अधिकारी मिलकर बड़ा खेल कर रहे हैं। इसकी धरातल से जांच होनी चाहिए। इसमें अधिकारी फंसे हुए हैं, जिन्हें किसानों को पैसा खाने का कोई हक नहीं है। - धर्म सिंह, किसान

- गांव के करीब 300 किसानों ने इसके लिए आवेदन किया था, लेकिन चंद ही लोगों का नाम सूची में आया। हमने भी आवेदन किया था, लेकिन हमारा नाम हेराफेरी की भेंट चढ़ गया है। - बलेराम, किसान

- इस योजना के तहत मैंने दो बार फॉर्म भरकर आवेदन किया है, लेकिन मेरी धनराशि अब तक नहीं मिली है। मुझे इस बात का अंदेशा है कि इस योजना के तहत गांव ही नहीं पूरे प्रदेश व देश में बड़ा घोटाला किया जा रहा है- करतार सिंह, किसान

- केंद्र सरकार किसानों के बारे में सोचती है और इसके लिए योजनाएं भी बनाती है, लेकिन बीच के कुछ अधिकारी व लोग किसानों के इस रकम को घोटाला कर खा जाते हैं। इसका उदाहरण हमारा गांव ही है। - खलीफा बेदराम, किसान
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