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फैक्ट्रियां धुएं में उड़ा रहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देश

Ghaziabad Bureau Updated Sun, 16 Sep 2018 05:44 PM IST
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फैक्ट्रियां धुएं में उड़ा रहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देश
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साहिबाबाद। प्रदूषण उगल रहीं फैक्ट्रियां प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देश को धुएं में उड़ा रही हैं। वायु प्रदूषण फैलानी वाली फैक्ट्रियां कितनी गंभीर हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रदूषण मानीटरिंग सिस्टम लगाने की बात को छह महीने से टाला जा रहा है। निगरानी को लेकर फैक्ट्रियां आनाकानी कर रही हैं। गाजियाबाद में रेड श्रेणी की 42 फैक्ट्रियों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मानीटरिंग सिस्टम लगाने के लिए नोटिस दिया था। अभी तक सिर्फ 18 फैक्ट्रियों ने निर्देश का पालन किया है। 24 फैक्ट्रियों को अब 10 दिन का अंतिम नोटिस दिया गया है। विभाग का कहना है सिस्टम न लगाने पर फैक्ट्री पर सील लगाई जाएगी।
शहर में प्रदूषण का स्तर मानकों से कहीं अधिक रहता है। पिछले दो वर्ष से तो सर्दी में प्रदूषण का स्तर 10 गुना से अधिक तक पहुंच रहा है। एनजीटी की सख्ती के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बोर्ड भी सख्त हुआ है। आगामी सर्दी में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए तैयारी की जा रही है। रेड श्रेणी की फैक्ट्रियों में प्रदूषण मानीटरिंग सिस्टम लगवाने के लिए नोटिस भेजा गया है। मार्च में यह कार्रवाई शुरू हुई थी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने रेड श्रेणी की धुआं छोड़ने वाली 42 फैक्ट्रियों मार्च में नोटिस भेजा था। पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी एके तिवारी ने बताया कि पहला नोटिस मार्च में जारी किया गया था। इसके बाद एनजीटी ने फैक्ट्रियों को जून तक का समय दिया। जुलाई में फिर से नोटिस जारी किया गया, लेकिन अभी तक फैक्ट्री प्रबंधकों ने मानीटरिंग सिस्टम नहीं लगाए हैं। इस पर इन सभी को अंतिम नोटिस जारी किया गया है। यह लोग 10 दिनों में सिस्टम नहीं लगाते हैं तो फैक्ट्री सील की जाएगी।

ऑफिस में बैठे माप सकते हैं प्रदूषण का स्तर
फैक्ट्रियों में मानीटरिंग सिस्टम लगने के बाद अधिकारियों को फैक्ट्री जाकर प्रदूषण स्तर मापने की जरूरत नहीं पड़ेगी। फैक्ट्रियों की चिमनी में सेंसर लगाए जाएंगे। सेंसर की कनेक्टिविटी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सर्वर से होती है। इसके बाद अधिकारी ऑनलाइन ही फैक्ट्री द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण स्तर को माप सकते हैं। इनका रिकॉर्ड भी ऑनलाइन अपने आप आ जाएगा। हर घंटे का रिकॉर्ड ऑनलाइन जरिए दर्ज होता है। इससे औद्योगिक इकाइयों से होने वाले प्रदूषण को रोकने में आसानी होगी।

फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुओं से बढ़ रहे सांस के मरीज
टीएचए के इंडस्ट्रियल एरिया के आसपास कई गांव हैं। फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं का सबसे ज्यादा असर नजदीक होने की वजह से गांव में रहने वाले लोगों पर होता है। साइट चार स्थित साहिबाबाद, झंडापुर और कड़कड़ मॉडल गांव में तो धुएं की वजह से सांस के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। कई लोग तो प्रदूषण की वजह से कैंसर का शिकार हो चुके हैं। गांव वालों की तरफ से कई बार इन फैक्ट्रियों को बंद करने की मांग की गई है, लेकिन विभाग की तरफ से कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।

रेड श्रेणी में 298 फैक्ट्रियां
प्रदूषण विभाग प्रदूषण के लिहाज से फैक्ट्रियों को तीन श्रेणी में रखता है। पहली ग्रीन, दूसरी ऑरेंज और तीसरी रेड श्रेणी। रेड श्रेणी में जिले में 298 फैक्ट्रियां हैं। इनमें 11 बड़ी और 31 मध्यम स्तर की फैक्ट्री हैं।

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