कौन देगा डीएमआरसी को 650 करोड़ रुपये-Ghaziabad city

Ghaziabad Bureau Updated Fri, 15 Jun 2018 01:48 AM IST
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‘प्रोजेक्ट पूरा कर लिया, आगे का काम भी खुद ही कर लें’
गाजियाबाद। दिलशाद गार्डन से नया बस अड्डा मेट्रो फेज टू प्रोजेक्ट के अंशदान में पेंच फंस सकता है। कारण आवासन शहरी व कार्य मंत्रालय ने फेज दो को लेकर सवाल पूछा है कि 90 फीसदी काम पूरा होने के बाद ही डीपीआर पर मंत्रालय से क्यों स्वीकृति मांगी जा रही है। यह तो पहले से ली जानी चाहिए थी। अब आपने प्रोजेक्ट पूरा कर लिया है तो आगे का काम भी स्वयं ही कर लें। ऐसे में जीडीए को डर सता रहा है कि कहीं केंद्र सरकार की प्रोजेक्ट को लेकर होने वाली 403 करोड़ का अंशदान न अटक जाए। हालांकि जीडीए वीसी रितु माहेश्वरी का कहना है कि अंशदान पर कोई फर्क नहीं पडे़गा।
फेज दो मेट्रो प्रोजेक्ट का काम करीब 90 प्रतिशत से ज्यादा हो चुका है। कुछ स्टेशन बनकर तैयार है तो कुछ पर निर्माण कार्य चल रहा है। डीएमआरसी ने प्रोजेक्ट की कुल लागत में 650 करोड़ रुपये आना बाकी है। जीडीए सूत्रों के मुताबिक मेट्रो फेज टू पर करीब 2200 करोड़ रुपये खर्चा आ रहा है। इस खर्चे को बांटा गया है। इसमें यूपीएसआईडीसी, नगर निगम, आवास विकास परिषद, जीडीए को हिस्सेदारी देनी हैं। जबकि केंद्र सरकार का 403 करोड़ रुपये का अंशदान अभी बकाया है। नगर निगम ने 247 करोड़ रुपये देने के लिए पहले ही हाथ खड़े कर दिए हैं। अन्य विभागों की स्थिति भी ज्यादा बेहतर नहीं है। यही वजह है कि जीडीए बार-बार बकाया धनराशि लेने के लिए दबाव बना रहा है। सूत्र बताते हैं कि कुछ दिन पहले जीडीए अधिकारियों की केंद्रीय शहरी मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत हुई थी, जिसमें यह सवाल उठा था कि केंद्र सरकार अपने अंशदान का 403 करोड़ रुपये कब देगा। मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि जब पूरा प्रोजेक्ट की धनराशि दी जा चुकी है तो बाकी धनराशि देने में क्या दिक्कत आ रही है। मंत्रालय के रवैये से लगता है कि केंद्र सरकार पैसा देने के मूड में नहीं है। गौरतलब है कि मेट्रो फेज वन प्रोजेक्ट (आनंद विहार से वैशाली) में केंद्र सरकार को 125 करोड़ रुपये देना था। ऐसे में अब जीडीए को डर सता रहा है कि कहीं फेज-वन की तरह फेज टू में भी केंद्र सरकार अंशदान देने से हाथ खड़ा न कर दे।
अंशदान को लेकर केंद्र को कोई आपत्ति नहीं है। हमारे तरफ से डीपीआर जल्द स्वीकृति कर अंशदान देने का अनुरोध किया गया था, जिस पर उन्होंने सहमती दे दी है। उधर, डीएमआरसी के अधिकारियों से भी बातचीत हुई है कि वो जल्द ही रिवाइज्ड डीपीआर तैयार कर भेजें, जिससे की पता चल सके कि वास्तव में अब कितनी धनराशि की आवश्यकता है। - रितु माहेश्वरी, जीडीए वीसी

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