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निगम कर्मी ही दूषित कर रहे हैं भूजल

Noida Bureauनोएडा ब्यूरो Updated Sat, 25 May 2019 06:39 PM IST
फरीदाबाद सेक्टर 21 में गंदा पानी डालते नगर निगम के कर्मचारी ।
फरीदाबाद सेक्टर 21 में गंदा पानी डालते नगर निगम के कर्मचारी । - फोटो : Faridabad
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निगम कर्मी ही दूषित कर रहे हैं भूजल
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फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी में लगातार बढ़ रहे जल प्रदूषण का कारण निजी सेप्टिक टैंकर ही नहीं नगर निगम की सुपर सकर मशीन और जेटिंग-सक्शन मशीनें हैं। सीवरेज साफ करने के बाद यह गंदगी नगर निगम के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में न डाल कर सीधे खुली जगहों पर या नालों में बहाई जा रही है। जमीन से यह गंदगी सीपेज के जरिए भूजल को दूषित करती है तो नाले से यमुना में पहुंच कर नदी के पानी की गुणवत्ता खराब करती है।
औद्योगिक नगरी में पांच दशक पहले डाली गई सीवर लाइनें समय बीतने के साथ जर्जर हालत में हैं और इस दौरान आबादी भी छह गुना से ज्यादा बढ़ चुकी है। ऐसे में शहर में अधिकतर जगहों पर सीवर जाम की समस्या बनी रहती है। जाम सीवर लाइनों को खोलने के लिए नगर निगम की ओर से सुपर सकर और जेटिंग-सक्शन मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है। नियमानुसार सीवर खाली करने के बाद इसका गंदा पानी शोधन के लिए बादशाहपुर गांव में स्थित एसटीपी में डाला जाना चाहिए। यहां से शोधित करने के बाद पानी को बुढ़िया नाले में छोड़ा जाता है। नगर निगम की सुपर सकर मशीनें यह गंदा पानी सेक्टर-21 में रेलवे लाइन के पास खाली जमीन में डालती हैं।
पर्यावरण प्रेमी वीर प्रताप शर्मा कहते हैं कि फरीदाबाद में भूजल की स्थिति पहले ही नाजुक है, यदि जमीन पर इसी तरह सीवर का पानी छोड़ा जाता रहा तो भूजल भी दूषित होगा। निगमायुक्त अनीता यादव ने खुले में सीवर टैंक खाली किए जाने की जानकारी से इनकार करते हुए कहा कि संबंधित अधिकारी को जांच करने के आदेश देंगी, यदि ऐसा हो रहा है तो उसे सख्ती से रुकवाया जाएगा।
नहरपार निजी टैंकर डालते हैं खुले में गंदा पानी
भूजल को दूषित होने से रोकने के लिए 27 अप्रैल 2018 को तत्कालीन अतिरिक्त निगमायुक्त ने निजी सेप्टिक टैंकरों पर कहीं भी पानी गिराने पर प्रतिबंध लगाया था। उन्होंने इसके लिए मात्र सौ रुपये प्रति टैंकर शुल्क पर गांव बादशाहपुर में स्थित एसटीपी (45+20 एमएलडी क्षमता) में टैंकर खाली करने की व्यवस्था बनाई थी। ऐसा न करने वाले टैंकरों पर 2 हजार रुपये जुर्माने का भी प्रावधान किया गया था। पर्यावरण प्रेमी विष्णु गोयल कहते हैं कि निजी टैंकरों को जाने दीजिए नगर निगम के टैंकर भी खुले में गंदा पानी डाल रहे हैं। नहर पार के इलाके में निजी टैंकर कहीं भी गंदा पानी खाली करते दिख जाएंगे। उनका आरोप है कि निगम ने शायद ही किसी निजी टैंकर का दो हजार रुपये का चालान काटा हो।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी ले चुका है नमूने
यमुना नदी में औद्योगिक नगरी में कितना प्रदूषित जल छोड़ा जाता है इसकी जांच मार्च 2019 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने की थी। बोर्ड की टीम ने नदी के पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए दिल्ली बॉर्डर पर, बुढ़िया नाला जहां यमुना नदी में मिलता हैं वहां पर और तीसरा नमूना बुढ़िया नाले से लिया था।

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