‘आज ओपीडी बंद है’ सूचना देख लौटे मरीज

Noida Bureau Updated Tue, 06 Jun 2017 07:44 PM IST
ख़बर सुनें

‘आज ओपीडी बंद है’ सूचना देख लौटे मरीज
नेशनल इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर मंगलवार को शहर के सभी छोटे-बड़े निजी अस्पतालों में ओपीडी बंद रही। आईएमए जिला प्रधान डॉ. सुरेश अरोड़ा की अगुवाई में शहर के 400 डॉक्टरों का काफिला राजघाट दिल्ली को रवाना हुआ। निजी अस्पतालों में इलाज कराने पहुंचे मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ा। अन्य अस्पताल बंद रहने की वजह से बीके सिविल अस्पताल की ओपीडी में करीब डेढ़ गुना ज्यादा मरीज आए।
आईएमए के जिला प्रधान डॉ. सुरेश अरोड़ा ने बताया कि देश भर के चिकित्सकों को सुरक्षा, काम की बेहतर परिस्थितियां उपलब्ध कराने और उत्पीड़नकारी, गैर जरूरी कानून आदि खत्म किए जाने की मांग एसोसिएशन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी लंबे समय से कर रही है। सरकार कुछ नए प्रावधान लाने की तैयारी कर रही है जो चिकित्सकों के हित में नहीं है। इन सबको लेकर मंगलवार को दिल्ली कूच किया गया था।
बताते चलें कि शहर में आठ बड़े निजी अस्पताल, करीब 200 नर्सिंग होम और काफी संख्या में क्लीनिक हैं। आईएमए के आह्वान पर मंगलवार को इन सभी की ओपीडी बंद रही। अस्पताल नर्सिंग होम में आज ओपीडी बंद है’ के पर्चे मुख्य दरवाजे से डॉक्टरों के चेंबर के सामने चिपकाए गए थे। अधिकतर क्लीनिक खुले ही नहीं। अनुमान है कि करीब साढ़े तीन हजार मरीजों को निजी अस्पतालों से लौटना पड़ा। गर्मी के मौसम में ओपीडी बंद होने की वजह से मरीज और उनके तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ा, हालांकि सभी अस्पतालों की इमरजेंसी खुली होने की वजह से गंभीर मरीजों को कोई दिक्कत नहीं हुई।

सरकारी अस्पताल का ये रहा हाल
निजी अस्पतालों की ओपीडी बंद होने का असर मंगलवार को सरकारी अस्पतालों में दिखाई दिया। बीके सिविल अस्पताल में मंगलवार को ओपीडी में मरीजों की संख्या करीब 2200 दर्ज की गई। अस्पताल में रोजाना औसतन 1400 मरीज आते हैं। आरएमओ डॉ. नवीन गर्ग ने बताया कि आईएमए की हड़ताल से अस्पताल की ओपीडी में अधिक मरीज आने की संभावना को देखते हुए पहले ही पूरी तैयारी कर ली गई थी। मंगलवार को करीब 2200 मरीज देखे गए।

यह रहीं मुख्य मांगें
आईएमए जिला प्रधान डॉ. सुरेश अरोड़ा ने बताया कि राष्ट्रीय एसोसिएशन ने ज्ञापन में सरकार के समक्ष यह मांग रखीं:
- वायलेंस अगेंस्ट डॉक्टर एक्ट बनाया जाए, कानून में चिकित्सकों के साथ मारपीट करने वालों के खिलाफ कड़ी सजा की व्यवस्था की जाए।
- मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया भंग नहीं किया जाए, सरकार एमसीआई की जगह नेशनल मेडिकल कमीशन लाने जा रही है। डॉक्टरों की चिंता है कि कमीशन में नॉन मेडिकल क्षेत्र के लोग होंगे जो डॉक्टरों की जमीनी समस्याओं को नहीं समझते।
- पीसीपीएडीटी एक्ट के प्रावधान नम्र किए जाएं, पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत जांच के दौरान एप्रन नहीं पहनने, दस्तावेज में हस्ताक्षर या नाम छूट जाने जैसी छोटी गलतियों पर सजा का प्रावधान है, इन्हें हटाया जाए।
- क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट नहीं लागू हो, डॉ. अरोड़ा के मुताबिक यह एक्ट लागू होने से छोटे और मझोले अस्पताल और नर्सिंग होम खत्म हो जाएंगे। एक्ट सिर्फ कॉरपोरेट अस्पतालों पर ही लागू होना चाहिए।
- क्रॉसपैथी प्रेक्टिस बंद की जाए, एमबीबीएस के अलावा बीयूएमएस, बीएचएमएस और बीएएमएस डॉक्टर भी ऐलोपैथी दवाएं मरीजों को देते हैं, यह एमबीबीएस चिकित्सकों के साथ नाइंसाफी है।
- उपभोक्ता अधिकार संरक्षण कानून में सुधार किया जाए, डॉ. अरोड़ा ने बताया कि एक ही तरह तरह की गलती पर उपभोक्ता अदालतें डॉक्टर पर अलग अलग जुर्माना लगाती हैं, अमीर मरीज को अधिक मुआवजा जबकि गरीब मरीज को कम मुआवजा देने के आदेश जारी किए गए हैं, कानून में गैर बराबरी के प्रावधान खत्म किए जाएं।

Recommended

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

Spotlight

Most Read

Rajasthan

मॉब लिंचिंग से नहीं हुई अकबर की मौत : आईजी

भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी गर्मी बढ़ाने वाले राजस्थान में अलवर के अकबर उर्फ रकबर खान मामले को जयपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक ने मॉब लिंचिंग नहीं माना है। वी.के. सिंह ने कहा कि वे नहीं मानते कि अकबर की मौत मॉब लिंचिंग में हुई है। 

18 अगस्त 2018

Related Videos

गब्बर जिंदा है, क्योंकि गब्बर कभी डरा नहीं

27 जुलाई 1992, वो तारीख जब गब्बर इस दुनिया से चला गया पर, गब्बर मरा नहीं है। गब्बर कभी मर भी नहीं सकता, क्योंकि गब्बर ही ये कहता था कि , जो डर गया वो मर गया और गब्बर कभी किसी से नहीं डरा।है।

27 जुलाई 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree