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तिहाड़ में विचाराधीन कैदी की कथित हत्या केस: मृतक की मां का जेल जेल उपाधीक्षक पर आरोप, सीबीआई जांच की मांग 

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Thu, 10 Jun 2021 06:16 PM IST

सार

न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने मृतक श्रीकांत उर्फ पप्पू की मां की याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित थानाध्यक्ष को पूरे मामले की जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 8 जुलाई तय की है।
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तिहाड़ जेल
तिहाड़ जेल - फोटो : ANI

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विस्तार

हाईकोर्ट ने तिहाड़ जेल में एक विचाराधीन 32 वर्षीय कैदी की कथित हत्या के आरोप पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जांच रिपोर्ट मांगी है। मृतक की मां ने आरोप लगाया है कि कोविड महामारी के ध्यानार्थ हाई पावर कमेटी ने उनके बेटे को जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया था लेकिन रिहाई से एक दिन पहले ही उनके बेटे की हत्या कर दी गई। याची ने पूरे मामले की सीबीआई जांच करवाने का आग्रह किया है।
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न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने मृतक श्रीकांत उर्फ पप्पू की मां की याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित थानाध्यक्ष को पूरे मामले की जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 8 जुलाई तय की है। याची ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे की हत्या के पीछे तिहाड़ जेल उपाधीक्षक आरएन सिंह का हाथ है। ऐसे में मामले की जांच सीबीआई से करवाना जरूरी है।


याचिका में कहा गया है कि उनका बेटा श्रीकांत लूटपाट, हत्या प्रयास इत्यादि कई मामलों में जेल में था। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के चलते सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद गठित हाई पावर कमेटी ने विचाराधीन कैदियों को जमानत प्रदान की है और उनके बेटे को भी 15 मई को जमानत पर रिहा किया जाना था लेकिन 14 मई को जेल स्टाफ ने उनके बेटे की हत्या कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनका बेटा हमेशा से ही जेल स्टाफ पर गलत व्यवहार करने की शिकायत किया करता था।

याची ने कहा कि उन्हें विश्वनीय सूत्रों से पता चला है कि उनके बेटे की हत्या के पीछे जेल उपाधीक्षक ही मुख्य षड्यंत्रकारी है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि इस फैसले में कहा गया है कि हिरासत में मौत कानून के शासन द्वारा शासित एक सभ्य समाज में सबसे खराब अपराधों में से एक है।

उन्होंने कहा कि हिरासत में होने वाली मौतें न केवल लोकतांत्रिक ताने-बाने और मानवाधिकारों की आभा का उल्लंघन करती हैं बल्कि देश के हमारे सर्वोच्च कानून में परिकल्पित कानून और संविधानवाद के शासन को बुरी तरह नजरअंदाज करती हैं। याची ने अदालत से मामले की सीबीआई जांच करवाने के अलावा जेल के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का निर्देश देने का भी आग्रह किया है।

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