विशेष खबर: पांच वर्ष से दिल्ली के किसान कर रहे हैं एमएसपी का इंतजार, केंद्र-राज्य ने नहीं की मांगों पर सुनवाई

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Vikas Kumar सर्वेश कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 15 Dec 2020 01:13 PM IST
दिल्ली के किसान
दिल्ली के किसान - फोटो : amar ujala

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सभी सीमाओं पर किसानों से घिरी दिल्ली के हजारों किसान पिछले पांच वर्षों से अपनी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) न मिलने का दंश झेल रहे हैं। इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार से की गई किसानों की मांग की अनसुनी कर दी गई। इसलिए देशव्यापी किसान आंदोलन में दिल्ली के किसान भी शामिल हो रहे हैं। इससे उनको भी अपनी मांगों पर जल्द सुनवाई का इंतजार है। 
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दिल्ली के कुल 142 गांवों में खेती होती है। इसमें गेहूं, ज्वार, बाजरा, सरसों, धान जैसी फसलों सहित सब्जियों की भी पैदावार होती है। किसानों को दर्द है कि वर्ष 2015 में कुछ किसानों को एमएसपी का लाभ देने की दिशा में पहल हुई, लेकिन अब कुछ भी नहीं मिल रहा है। एमएसपी न मिलने से दिल्ली के किसानों में टीस को बयां करती सर्वेश कुमार की रिपोर्ट: 


गांव पल्ला निवासी सुरेन्द्र का कहना है कि एमएसपी न मिलने से किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। लागत मूल्य के बराबर भी अगर अनाज की कीमत न मिले तो किसान कैसे गुजारा करेंगे। दिल्ली में किसानों को एमएसपी का लाभ नहीं मिल रहा है, इसके लिए कई बार मांग भी उठाई गई, लेकिन किसानों के हाथ खाली हैं। 

झाड़ौदा कलां निवासी राजेन्द्र डागर के मुताबिक एमएसपी न मिलने से उन्हें नजफगढ़ मंडी में फसलों की बिक्री करनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि अनाज पैदा करने वाले किसानों को यह भी हक नहीं है कि उसकी कीमत तय कर सके। सरकार की ओर से तय एमएसपी का लाभ न मिलने से बिचौलियों को 500-1000 रुपये प्रति क्विंटल कम कीमत पर फसलों की बिक्री के लिए किसान मजबूर हैं। इसके लिए सांसद और मंत्रियों से बातचीत का भी कोई नतीजा नहीं निकला।

सुरहेड़ा निवासी धमेन्द्र यादव का कहना है कि गेहूं में उन्हें एमएसपी से करीब 550 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान हुआ जबकि सरसों की बिक्री करीब एक हजार रुपये कम रेट पर हुई। उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत के मुताबिक सरकार को चाहिए कि न्यूनतम समर्थन मूल्य का सभी फसलों पर लाभ मिल सके।

ढासा गांव के किसान राज सिंह का कहना है कि किसानों को उनकी फसल की लागत मूल्य भी कई बार नहीं मिलता, ऐसे में खेती में अपना जीवन बिताने वाले किसान क्या करें। किसान आंदोलन के जरिये अपनी मांगे रख रहे हैं, लेकिन दिल्ली के किसानों को एमएसपी का लाभ नहीं मिलने से 142 गांवों के किसानों के लिए आगे खेती जारी रखना भी एक बड़ा संकट है।
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एमएसपी से कम पर बिकता आनाज

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