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भजनपुरा हादसाः नेताओं के पहुंचने से बचाव में हुई देरी, संकरी गलियों ने भी खड़ा किया संकट

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Updated Sun, 26 Jan 2020 01:44 AM IST
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घटना के बाद अफरा-तफरी
घटना के बाद अफरा-तफरी - फोटो : अमर उजाला
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चुनावी माहौल में नेताओं का सुभाष मोहल्ले में पहुँचने की इतनी जल्दी थी कि उन्होंने मामले की गंभीरता तक को नजर अंदाज कर दिया। बड़े नेताओं के आने से उनके समर्थकों की भीड़ ने घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल उत्पन्न कर दिया। वीवीआईपी लोगों के पहुँचने से घटनास्थल पर सुरक्षा के लिहाज से केंद्रीय बल को भी तैनात करना पड़ा। इसके चलते बचाव में लगी टीम को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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भजनपुरा की सड़कें शनिवार शाम केवल वीवीआईपी गाड़ियों की भीड़ से पटी पड़ी थी। चुनावी प्रचार में व्यस्त नेता सबकुछ छोड़ घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े, लेकिन उनके पहुँचने की वजह से घटनास्थल पर सैकड़ों की भीड़ एकत्र हो गई। आलम यह था कि गली से लोगों का पैदल निकलना तक मुश्किल था। इस भीड़ के चलते एम्बुलेंस को भी बच्चों को हॉस्पिटल तक ले जाने में काफी देर हो गई। इसके बावजूद भी ऐसा कोई भी दल नहीं था जो उस वक़्त घटनास्थल  पर पहुँचने से गुरेज करे।

सकरी गली में बचाव दल का भी पहुँचना हुआ मुश्किल

भजनपुरा के सुभाष मोहल्ला की गली इतनी सकरी थी कि वक़्त पर बचाव दल भी मौके पर नहीं पहुँच पाया। बचाव दल के आने से पहले ही मोहल्ले के लोग मलबे से बच्चों को बचाने पहुँच गए। लेकिन एम्बुलेंस के वक़्त पर पहुँचने से पहले ही मलबे में दबे चार बच्चों ने दम तोड़ दिया। जबकि अध्यापक की भी मौत हो गई। बाकी के घायलों को आनन-फानन में अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।

सुभाष मोहल्ला का गली नंबर छह उस वक़्त चीख पुकार से गूंज उठा, जब एक मकान की छत भरभरा कर उसमें पढ़ रहे बच्चों पर गिर पड़ा। मलबे में दबे लोगों की चीख सुनकर हर कोई मदद के लिए उस ओर भागा, लेकिन तबतक बहुत देर हो चुकी थी। मलबे के ढेर में दबे 4 बच्चों ने अस्पताल पहुँचने से पहले ही दम तोड़ दिया। घटनास्थल की गलियां इतनी सकरी थी कि वहां बचाव दल का वक़्त पर पहुँचना नामुमकिन सा था। किसी तरह मौके पर पहुँची दमकल की गाड़ी एक किलोमीटर पीछे ही खड़ा करना पड़ा। इसके बाद दमकल कर्मियों को पैदल ही मौके पर जाना पड़ा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वक़्त पर अगर बचाव दल आ गया होता तो बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।
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खुदी और पानी भरी सड़क न होती तो बच सकती थी जान

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