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Delhi: कोर्ट ने विधायक अखिलेश, संजीव की आय का आकलन कर मांगी रिपोर्ट

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Thu, 22 Sep 2022 07:47 AM IST
सार

अदालत ने दिल्ली राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) को इस संबंध में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट के आधार पर दंगों में घायल पुलिसवालों को उचित मुआवजा दिया जाएगा।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media
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विस्तार

अदालत ने वर्ष 2015 में पुलिस के खिलाफ दंगा भड़काने के मामले में दोषी ठहराए गए आप पार्टी के दो विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी एवं संजीव झा सहित अन्य 15 लोगों को आय का आंकलन कर रिपोर्ट देने को कहा है। अदालत ने दिल्ली राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) को इस संबंध में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट के आधार पर दंगों में घायल पुलिसवालों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। राऊज एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट वैभव मेहता ने इसके साथ ही सजा के बिंदु पर सुनवाई 15 अक्तूबर तक के लिए स्थगित कर दी है। 



साथ ही अदालत ने दोषियों के आय एवं संपत्ति संबंधी उनके हलफनामा को स्वीकार कर लिया। मजिस्ट्रेट ने इस मामले में 12 सितंबर को सभी को एक सभा का हिस्सा होने, दंगा करने एवं पुलिस कर्मिंयों को चोट पहुंचाने का दोषी ठहराया था। साथ ही नारेबाजी करने एवं भीड़ को उकसाने का भी दोषी ठहराया है जिसके कारण भीड़ ने पुलिस कर्मिंयों पर हमला किया था। यह मामला सात साल पहले 20 फरवरी 2015 की रात का है जब भीड़ ने बुराड़ी पुलिस थाने में पुलिस कर्मिंयों पर हमला किया और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया था।


यह विवाद तब पैदा हुआ जब भीड़ दो लोगों को हिरासत में लेने की मांग कर रही थी, जिनपर पिटाई करने का आरोप था। मजिस्ट्रेट ने इस मामले में दोनों विधायकों के अलावा बलराम झा, श्याम गोपाल गुप्ता, किशोर कुमार, ललित मिश्रा, जगदीश चंद्र जोशी, नरेंद्र सिंह रावत, नीरज पाठक, राजू मलिक, अशोक कुमार, रवि प्रकाश झा, इस्माइल इस्लाम, मनोज कुमार, विजय प्रताप सिंह, हीरा देवी व यशवंत को भी दोषी ठहराया है। सभी को आईपीसी की धारा 147 (दंगा), 186 (लोक सेवक को सार्वजनिक कायरे के निर्वहन में बाधा डालना), 332 (स्वेच्छा से अपने कर्तव्य से लोक सेवक को चोट पहुँचाना) व 149 (गैरकानूनी सभा का सदस्य होने) को लेकर दोषी ठहराया गया है। उनलोगों को धमकी देने व संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों से बरी कर दिया गया है।

हाईकोर्ट ने पुलिस और डीडीए को नोटिस जारी कर मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने मुंडका इलाके में एक सीवर के अंदर जहरीली गैस से दो लोगों की मौत मामले में पुलिस और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया था। दिल्ली सरकार व नगर निगम द्वारा मुआवजे व पीड़ित परिवार को नौकरी देने से पीछे हटने के बाद अदालत ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग को भी नोटिस जारी किया। सुनवाई के दौरान दिल्ली जल बोर्ड की ओर से पेश वकील ने पीठ को अवगत कराया कि प्राधिकरण न तो इस मामले में मुआवजे का भुगतान करने के लिए जिम्मेदार है और न ही मृतकों के कानूनी उत्तराधिकारी को नौकरी देने के लिए। वहीं, दिल्ली नगर निगम के वकील ने भी दलील दी कि निगम मुआवजे का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं है।

सुनवाई के दौरान मामले में नियुक्त न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव ने का अदालत ने एक जनहित याचिका सहित दो समान मामले पीठ के पास लंबित है और उन पर सुनवाई 9 नवंबर तय है। पीठ ने मामले की सुनवाई 27 सितंबर तय की है।
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