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साप्ताहिक राशिफल 16 से 22 मई : धनु राशि समेत इन तीन राशियों के लिए बहुत ख़ास होगा ये सप्ताह, जानें भाग्यफल
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#LadengeCoronaSe : कोरोना को हराकर ड्यूटी पर लौटे एसीएमओ डा.विपुल बिस्वास, बोले - सकारात्मक सोच होना जरूरी 

कोविड-19 वॉर रूम में तैनात एसीएमओ डा.बिपुल बिस्वास कोरोना को मात देकर ड्यूटी पर लौट आए हैं।

15 मई 2021

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Digital Edition

उत्तराखंड में कोरोना: 24 घंटे में सामने आए 4496 नए संक्रमित, 188 मरीजों की हुई मौत

उत्तराखंड में बीते 24 घंटे में 4496 संक्रमित मरीज सामने आए और 188 मरीजों ने दम तोड़ा है। वहीं, 5034 मरीजों को ठीक होने के बाद घर भेजा गया। कुल संक्रमितों की संख्या 287286 हो गई है। जबकि सक्रिय मामले 78802 पहुंच गए हैं। 

उत्तराखंड में कोरोना: गांवों में तेजी से फैल रहा कोरोना संक्रमण, लगातार बन रहे कंटेनमेंट जोन

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, रविवार को 29797 सैंपलों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। जबकि देहरादून जिले में 1248 कोरोना मरीज मिले हैं। हरिद्वार में 572 , ऊधमसिंह नगर 393, नैनीताल में 117, टिहरी में 498, पौड़ी में 391, रुदप्रयाग में 356, अल्मोड़ा में 65, उत्तरकाशी में 351, पिथौरागढ़ में 100, चमोली में 211, चंपावत में 41, बागेश्वर जिले में 153 संक्रमित मिले हैं। 

ऋषिकेश: घाटों पर गंगा में गिर रहे कोरोना संक्रमित शवों के अवशेष, बहाई जा रही अधजली राख, तस्वीरें...

वहीं, अब तक प्रदेश में 4811 कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत हो चुकी है। 5034 मरीजों को ठीक होने के बाद डिस्चार्ज किया गया। इन्हें मिला कर 198530 मरीज कोरोना को मात दे चुके हैं। वर्तमान में प्रदेश की रिकवरी दर 69.11 प्रतिशत और सैंपल जांच के आधार पर संक्रमण दर 6.74 प्रतिशत दर्ज की गई है।
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कोरोना वायरस की जांच कोरोना वायरस की जांच

उत्तराखंड: प्रदेश में ब्लैक फंगस से पहली मौत, रिकॉर्ड 17 केस मिले, यूपी के पांच लोग भी शामिल

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में ब्लैक फंगस से पहली मौत हुई है। वहीं एम्स में भर्ती उत्तराखंड के 12 और यूपी के पांच कोविड मरीजों में ब्लैक फंगस का संक्रमण मिला है। सबसे अधिक पांच संक्रमित हरिद्वार जिले के रहने वाले हैं। एम्स के विशेषज्ञों की टीम ने इनमें से 11 संक्रमितों की आंखों की सर्जरी भी कर दी है।

एम्स में ब्लैक फंगस से मृतक  युवक कोविड संक्रमण से पीड़ित था। कुछ दिनों पहले देहरादून से रेफर होने बाद उसे एम्स में भर्ती कराया गया था। जांच के दौरान युवक में ब्लैक फंगस के संक्रमण की पुष्टि हुई थी। देहरादून निवासी 36 वर्षीय युवक की ब्लैक फंगस से शुक्रवार दोपहर को ही मौत हो गई थी, लेकिन इसकी जानकारी रविवार को सामने आई। इस दौरान ब्लैक फंगस के संदिग्ध लक्षणों के चलते कई अन्य मरीजों की जांच भी की गई। जिसके बाद 16 और मरीज ब्लैक फंगस से संक्रमित पाए गए। इनमें 12 मरीज उत्तराखंड के हैं, जिनमें हरिद्वार के चार, देहरादून के चार, काशीपुर का एक, उधमसिंह नगर का एक और अल्मोड़ा का एक मरीज शामिल है।

उत्तराखंड में कोरोना : ब्लैक फंगस को न करें नजरअंदाज, लक्षण दिखने पर डॉक्टरी सलाह लें

वहीं अन्य पांच संक्रमित उत्तर प्रदेश के शामली, अलीगढ़, बिजनौर, मेरठ और शिवनगर के रहने वाले हैं। इनमें से 10 मरीज 50 से 81 आयुवर्ग के हैं। वहीं छह संक्रमित 35 से 49 आयुवर्ग के हैं। एम्स प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 11 लोगों की सर्जरी कर दी है। सर्जरी के बाद सभी मरीजों का स्वास्थ्य समान्य बताया जा रहा है। इसके साथ एम्स प्रशासन ने कोविड संक्रमितों में ब्लैक फंगस की जांच के लिए एक 15 सदस्यीय विशेषज्ञों की कमेटी का गठन भी किया है।

ब्लैक फंगस से संक्रमित एक 36 वर्षीय युवक की मौत हुई है। इसके अलावा 16 और लोगों में ब्लैक फंगस का संक्रमण मिला है। इनमें से 11 लोगों की सर्जरी कर दी गई है। अस्पताल में भर्ती कोविड संक्रमितों की जांच के लिए विशेषज्ञों की 15 सदस्यीय समिति गठित की गई है।
- प्रोफेसर रविकांत, निदेशक, एम्स, ऋषिकेष
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उत्तराखंड में कोरोना: प्रदेश में चिंताजनक हुए हालात, 21 दिनों में हुई 55 प्रतिशत मौत

उत्तराखंड में कोरोना की दूसरी लहर घातक साबित हो रही है। बीते तीन सप्ताह के भीतर प्रदेश में 135806 लोग संक्रमण की चपेट में आए हैं। जो कुल संक्रमितों का 48 प्रतिशत है। जबकि 2521 मरीजों ने दम तोड़ा है। यह कुल मौतों का 55 प्रतिशत है। 

उत्तराखंड में कोरोना: 24 घंटे में सामने आए 4496 नए संक्रमित, 188 मरीजों की हुई मौत

मई में कोरोना संक्रमित मामले तेजी से बढ़ने से साथ ही सबसे ज्यादा संक्रमितों की मौत भी हुई हैं। संक्रमण को काबू करना और मृत्यु दर को रोकना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। 

ऋषिकेश: घाटों पर गंगा में गिर रहे कोरोना संक्रमित शवों के अवशेष, बहाई जा रही अधजली राख, तस्वीरें...

प्रदेश में कोरोना संक्रमण काल को 427 दिन का समय बीत गया है। पहला कोरोना संक्रमित मामला बीते साल 15 मार्च को देहरादून में मिला था लेकिन कोरोना की दूसरी लहर ज्यादा घातक रही है। संक्रमित मामले बढ़ने के साथ ही कोरोना मरीजों की मौत भी तेजी से बढ़ी है।

उत्तराखंड में कोरोना: गांवों में तेजी से फैल रहा कोरोना संक्रमण, लगातार बन रहे कंटेनमेंट जोन

मई में संक्रमितों और मौतों के कई नए रिकॉर्ड भी बने हैं। बीते तीन सप्ताह के भीतर प्रदेश में 135806 लोग संक्रमण की चपेट में आए हैं। जो कुल संक्रमितों का 48 प्रतिशत है। जबकि 2521 मरीजों ने दम तोड़ा है। यह कुल मौतों का 55 प्रतिशत है। 
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उत्तराखंड में कोरोना: प्रदेश में कोविड वैक्सीन की किल्लत, थमी टीकाकरण की रफ्तार 

उत्तराखंड में वैक्सीन न होने के कारण रविवार को 201 केंद्रों पर टीके लगाने का कार्य बंद रहा। 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लिए सिर्फ 71870 वैक्सीन और 18 से 44 आयु वर्ग के लिए 175420 वैक्सीन की डोज बची है।

45 से अधिक आयु के जिन लोगों को पहली डोज लग चुकी है, उन्हें दूसरी डोज लगाने के लिए चक्कर काटने पड़ रहे हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि केंद्र ने 45 से अधिक आयु वर्ग के लिए 1.37 लाख वैक्सीन डोज की अनुमति दे दी है। एक-दो दिन के भीतर वैक्सीन पहुंच जाएगी।

उत्तराखंड में कोरोना: 24 घंटे में सामने आए 4496 नए संक्रमित, 188 मरीजों की हुई मौत

प्रदेेश में 45 से अधिक आयु वर्ग के लिए कोविड वैक्सीन का स्टॉक खत्म होनेे वाला है। जिलों के पास इस वर्ग को पहली और दूसरी डोज लगाने के लिए टीके नहीं है। टीके न होने के कारण रविवार को प्रदेेश भर में 201 केंद्रों पर टीकाकरण नहीं हुआ है।

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मात्र 282 केंद्रों पर 18421 लोगों को वैक्सीन लगाई गई। प्रदेश मेें अब तक स्वास्थ्य कर्मियों, फ्रंट लाइन वर्करों और 45 से अधिक आयु वर्ग को मिला कर 19.40 लाख लोगों को पहला टीका लग चुका है। जबकि 6.80 लाख से ज्यादा लोगों को दूसरी डोज के साथ टीकाकरण पूरा किया गया।

वहीं, 18 से 45 आयु वर्ग में 10 मई से अब तक 122167 लोगों को वैक्सीन की पहली डोज लगाई जा चुकी है। 18 से 45 आयु वर्ग के लिए जिलों के पास अभी 175420 वैक्सीन की डोज है। जबकि वैक्सीन लगवाने वालों की संख्या ज्यादा है। वैक्सीन की कमी से लोगों को केंद्रों से वापस लौटना पड़ रहा है। 
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उत्तराखंड में कोरोना: प्रदेश में जारी रहेगा कोविड कर्फ्यू, सीएम तीरथ ने दिए संकेत

कोरोना वैक्सीनेशन (सांकेतिक तस्वीर)
मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने रविवार को प्रदेश में लागू कोविड कर्फ्यू आगे भी जारी रखने के संकेत दिए हैं। मीडियाकर्मियों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार कोविड कर्फ्यू अगले सात दिन बढ़ा सकती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार कोविड के मामलों पर निरंतर नजर बनाए हुए है और विचार विमर्श के बाद कोविड कर्फ्यू को बढ़ाने पर निर्णय लिया जाएगा। उधर, शासकीय प्रवक्ता सुबोध उनियाल ने भी कोविड कर्फ्यू 25 मई तक बढ़ाए जाने के संकेत दिए हैं। जानकार भी कोविड कर्फ्यू बढ़ाने के पक्ष में बताए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि 18 मई तक कोविड कर्फ्यू के परिणाम 14 दिन के बाद सामने आएंगे।

उत्तराखंड में कोरोना: 24 घंटे में सामने आए 4496 नए संक्रमित, 188 मरीजों की हुई मौत

सरकार ने ली राहत की सांस
पिछले कुछ दिनों से कोरोना संक्रमितों की संख्या में आई कमी से सरकार, शासन व प्रशासन ने राहत की सांस ली है। पिछले एक हफ्ते में कोरोना संक्रमितों की संख्या में कमी आई है। पिछले 16 दिनों में कोरोना संक्रमितों के सबसे अधिक 9642 मामले सात मई को आए थे।

ऋषिकेश: घाटों पर गंगा में गिर रहे कोरोना संक्रमित शवों के अवशेष, बहाई जा रही अधजली राख, तस्वीरें...

इसके बाद संक्रमितों की संख्या का ग्राफ ऊपर-नीचे होता रहा। पिछले तीन दिनों से कोरोना संक्रमितों की संख्या निरंतर घटी है। 14 मई को कोरोना के 5775 मामले थे। 15 मई को 5654 और रविवार 16 मई को कोरोना संक्रमितों की संख्या 4496 पहुंची है। इन आंकड़ों को देखकर सरकार और प्रशासन ने कुछ राहत की सांस ली है।
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देहरादून: मुक्तिधाम में अस्थियों से फुल होने लगे लॉकर, कर्फ्यू के कारण विसर्जन के लिए अस्थियां नहीं ले जा पा रहे लोग 

हिंदू धर्म के अनुसार पवित्र नदी में अस्थि विसर्जन करने का बड़ा महत्व है। लेकिन 26 अप्रैल से प्रदेश सरकार की ओर से लगाए कोविड कर्फ्यू के चलते लोग अस्थि विसर्जन के लिए हरिद्वार नहीं जा पा रहे हैं। जिसके चलते लक्खीबाग स्थित मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार होने के बाद रखी गई अस्थियों से सभी 18 लॉकर फुल हो गए हैं।

उत्तराखंड में कोरोना: 24 घंटे में सामने आए 4496 नए संक्रमित, 188 मरीजों की हुई मौत

ऐसे में अस्थियों को बोरों में रखा जा रहा है। लक्खीबाग स्थित मोक्षधाम में सामान्य मृतकों के शव का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। बीते कुछ दिन से यहां रोजाना करीब 20 शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है।

ऋषिकेश: घाटों पर गंगा में गिर रहे कोरोना संक्रमित शवों के अवशेष, बहाई जा रही अधजली राख, तस्वीरें...

ऐसे में लोग अंतिम संस्कार कराने के बाद अस्थियों को मोक्षधाम के लॉकर में सुरक्षित रख रहे हैं। हालांकि कुछ लोग पंडितों की सलाह पर आसपास की नदियों में ही अस्थियों का विसर्जन कर रहे हैं।
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ऋषिकेश: घाटों पर गंगा में गिर रहे कोरोना संक्रमित शवों के अवशेष, बहाई जा रही अधजली राख, तस्वीरें...

उत्तराखंड में कोरोना संक्रमितों की मौत का आंकड़ा हर दिन बढ़ता जा रहा है। तीर्थनगरी ऋषिकेश का हाल यह है कि श्मशान घाट में भी दाह संस्कार के लिए जगह की कमी पड़ रही है। मजबूरी में लोग गंगा तट से बिल्कुल सटाकर खुले में कोविड शवों का दाह संस्कार कर रहे हैं।

ऐसे में कई बार शव के अवशेष भी गंगा में गिर रहे रहे, जबकि दाह संस्कार के बाद बिना विसंक्रमित किए शवों की राख भी गंगा में बहाई जा रही है। ऐसे में संक्रमण के फैलने का खतरा तो बढ़ ही रहा है, वहीं गंगाजल और शहर की आबोहवा भी प्रदूषित हो रही है।

उत्तराखंड में कोरोना : कोरोना की तीसरी लहर में सामने आएगी अब तक की सबसे बड़ी चुनौती

ऋषिकेश के दोनों मुक्तिधाम में रोजाना 20 से 30 शवों का दाह संस्कार किया जा रहा है। इनमें से 10 से 15 शव कोविड संक्रमितों के होते हैं। पूर्णानंद घाट पर गंगा नदी के ठीक किनारे कोविड शवों को दाह संस्कार किया जा रहा है। कई बार दाह संस्कार के दौरान शवों के अवशेष भी गंगा नदी में बह जाते हैं।

वहीं, दाह संस्कार के बाद चिता की राख को बिना विसंक्रमित किए सीधा नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है। जबकि चंद्रेश्वर नगर मुक्तिधाम में दाह संस्कार तो श्मशान घाट परिसर में ही होता है। लेकिन यहां भी दाह संस्कार के बाद बिना विसंक्रमित किए चिता की राख को गंगा में बहा दिया जाता है। इससे संक्रमण के फैलने की संभावना बढ़ जाती है।
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उत्तराखंड: गांवों में कोविड टेस्ट करवाने का जिम्मा अब ग्राम प्रधानों पर, जिला प्रशासन से करेंगे मांग

सरकार ने ग्राम प्रधानों से कहा है कि कोविड जांच के लिए तुरंत ही जिला प्रशासन से मांग की जाए और संक्रमित व्यक्तियों को आइसोलेशन वार्ड या अस्पताल भेजने की व्यवस्था की जाए। पंचायतराज सचिव हरि चंद्र सेमवाल की ओर से इसका आदेश जारी किया गया है। 

प्रदेश सरकार ने नौ मई को आदेश जारी कर कहा था कि गांव लौट रहे प्रवासियों को सात दिन के लिए पृथकवास में रहना होगा। इसी के साथ ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन भी किया गया था। कोविड नियंत्रण समिति में आंगनबाड़ी, आशा, मंगलदल के सदस्य आदि शामिल किए गए हैं।

उत्तराखंड में कोरोना: 24 घंटे में सामने आए 4496 नए संक्रमित, 188 मरीजों की हुई मौत

अब ग्राम पंचायत स्तर पर बनी इस कमेटी को ही शासन ने कोविड जांच की मांग जिला प्रशासन से करने को कहा है। इसी के साथ ग्राम प्रधानों को यह भी कहा गया है कि गांवों में कोविड सेंटर आदि की व्यवस्था दुरुस्त कर ली जाए और कोई व्यक्ति संक्रमित पाया जाता है तो तुरंत ही उसे अस्पताल या कोविड केयर सेंटर में पहुंचाया जाए। घरों में रह रहे संक्रमित लोगों को ई संजीवनी के जरिए चिकित्सकों से बात कराने को कहा गया है। 

ऋषिकेश: घाटों पर गंगा में गिर रहे कोरोना संक्रमित शवों के अवशेष, बहाई जा रही अधजली राख, तस्वीरें...

अनाथ बच्चों की जानकारी भी मांगी 
ग्राम प्रधानों को यह भी कहा गया है कि कोविड के कारण माता-पिता की मृत्यु होने पर अनाथ होने वाले बच्चों की जानकारी तुरंत ही शासन को दी जाए। कहा गया कि हाईकोर्ट की किशोर न्याय समिति ने भी इसके आदेश जारी किए हैं। 

हेल्प डेस्क नंबर भी जारी किया 
शासन ने कहा है कि ग्राम पंचायतों को किसी तरह की परेशानी होती है तो इसके लिए हेल्प डेस्क नंबर पर जानकारी दी जाए। 181004190444 इसी के साथ जारी किया गया है। 

चार जिलों में पंचायतों ने किया बेहतर काम
पंचायत सचिव के मुताबिक उत्तरकाशी, नैनीताल, पौड़ी और पिथौरागढ़ में पंचायतों ने बेहतर काम किया है। अन्य ग्राम पंचायतों को इन पंचायतों के बारे में जानकारी लेने और इनका अनुकरण करने को भी कहा गया है। 

अन्य मुख्य निर्देश
- सभी पंचायत प्रतिनिधियों को मई माह में ही कोविड टीका लगाया जाएगा। प्रदेश में साठ हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधि हैं।
- प्रवासियों के बारे में जानकारी जिला पंचायत राज अधिकारी के जरिए प्रतिदिन दी जाए।
- ग्राम पंचायत स्तरीय कोविड नियंत्रण समिति को आइवरमेक्टिन दवा के वितरण में सहयोग करने को कहा गया है। प्रदेश सरकार ने हर घर में यह दवा पहुंचाने का फैसला किया है।
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उत्तराखंड में कोरोना: गांवों में तेजी से फैल रहा कोरोना संक्रमण, लगातार बन रहे कंटेनमेंट जोन

उत्तराखंड के गांवों में भी कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। ऊधमसिंह नगर जिले में रुद्रपुर के शहरी इलाकों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। रुद्रपुर के भगवानपुर, फौजी मटकोटा, धर्मपुर, मोतीपुर सहित अन्य विकासखंडों के गांवों में कोरोना संक्रमण के कई मामले सामने आ रहे हैं। गांवों में संक्रमित मरीजों की संख्या और अधिक है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना जांच से परहेज करने से कई मरीजों के बारे में पता ही नहीं चल पा रहा है। कोविड-19 के जिला नोडल अधिकारी डॉ. अविनाश खन्ना ने कहा कि तहसीलों में मोबाइल वैन तैनात हैं, जो ग्राम प्रधान व आशा कार्यकर्ताओं की सूचना पर ग्रामीण क्षेत्रों में सैंपलिंग कर रहीं हैं।

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पिथौरागढ़ : जिले की 196 ग्राम पंचायतों में कोरोना की दस्तक
पिथौरागढ़ जिले के आठ विकासखंडों में 196 ग्राम पंचायतों में कोरोना पहुंच चुका है। इसके अलावा 100 से अधिक ग्राम पंचायतों में सदी-जुकाम, खांसी और बुखार के मरीज लगातार मिल रहे हैं। विण विकासखंड के 85 ग्राम पंचायतों में 30, मूनाकोट के 72 ग्राम पंचायतों में 13, डीडीहाट के 106 में 16, गंगोलीहाट के 117 में 70, मुनस्यारी के 95 में 45, धारचूला के 62 में चार, कनालीछीना के 92 में छह और बेड़ीनाग के 84 में 12 ग्राम पंचायतों में कोरोना पहुंच चुका है। सीएमओ डॉ.एचसी पंत ने बताया कि जिन गांवों में बुखार और सर्दी जुकाम की शिकायत मिल रही है, उन गांवों में टीम भेजकर सैंपलिंग कराई जा रही है। 

चंपावत : दो-तिहाई कंटेनमेंट जोन गांवों में
कोरोना संक्रमण के दो-तिहाई मामले गांवों से आ रहे हैं। जिले में 5888 संक्रमित लोगों में से 3709 (63 प्रतिशत) गांवों और उनके आसपास से हैं। जिले में बने 27 कंटेनमेंट जोनों में से 18 (स्यांला, बमनपुरी, पचपखरिया, दियारतोली, गंभीरगांव, डूंगराबोहरा, स्वांला, दियूरी, नेकाना, बेलखेत, कांडा, ढकना, दियारतोला, सौराई, बकोड़ा, तल्ली खटोली, मल्ली खटोली, मिर्तोला) ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। 

अल्मोड़ा : 14 ग्रामीण इलाकों में कंटेनमेंट जोन  
अल्मोड़ा जनपद के कुल 14 ग्रामीण इलाकों में कंटेनमेंट जोन हैं। इनमें सबसे पहले एक मई को रानीखेत के गघोड़ा गांव को कंटेनमेंट जोन बनाया गया। गांवों में संक्रमण के मामले बढ़ते गए और कंटेनमेंट जोनों की संख्या भी बढ़ती गई। वर्तमान में भनोली तहसील में मकड़ाऊ और डूंगरा, सोमेश्वर में मल्ला और सुपाकोट, भिकियासैंण में भरकेंडा, चौखुटिया में झूड़गा, सल्ट में मेठानी और नैकणा, द्वाराहाट में गांव पाली और नैखोला, स्याल्दे में घरखेत, घुगुती, सुरमोली और सियानगर को कंटनमेंट जोन बनाया गया है। हालांकि, ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं और बेहतर किए जाने की जरूरत है। 

बागेश्वर : ग्रामीण क्षेत्रों में 750 लोग होम आइसोलेट
बागेश्वर जिले के ग्रामीण इलाकों में तेजी से कोरोना संक्रमण फैला है। गांवों में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए कपकोट के सूपी, बागेश्वर के ढुंगापाटली को माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाए गए हैं। जौलकांडे, चौरा समेत तमाम गांवों में कोरोना संक्रमित मिले हैं। कांडा, कपकोट, गरुड़ तहसील के गांवों में संक्रमित मिले हैं। बाहरी क्षेत्र से गांवों में लौटे लोगों में संक्रमण पाया गया है। जिले में 850 संक्रमितों को होम आइसोलेट किया गया है। इनमें से करीब साढ़े सात सौ लोग ग्रामीण क्षेत्रों के हैं। 

नैनीताल : बेतालघाट ब्लॉक में 600 से अधिक सक्रिय मामले
नैनीताल जिले के ज्योलीकोट क्षेत्र में कोविड जांच और इलाज के लिए मरीजों को हल्द्वानी व नैनीताल भेजा जा रहा है। यहां अभी तक लगभग 10 से अधिक लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। वहीं भीमताल स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हफ्ते में दो दिन कोरोना जांच की जा रही है जबकि यहां नियमित रूप से 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों का टीकाकरण हो रहा है। जांच रिपोर्ट भी तीसरे दिन उपलब्ध हो जा रही है। भीमताल में 60 से अधिक लोगों में संक्रमण की पुष्टि होने के साथ ही अभी तक दो लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है। गरमपानी स्थिति सीएचसी में कोरोना जांच के लिए ट्रूनेट मशीन उपलब्ध है। मशीन में रोजाना 30 लोगों की जांच होती है। पॉजिटिव मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरे गांव के लोगों की आरटी-पीसीआर जांच करवाती है। बेतालघाट ब्लॉक में कोरोना के छह सौ से अधिक सक्रिय मामले हैं, जिन्हें होम आइसोलेट किया गया है। गंभीर स्थिति में मरीजों को गरमपानी के कोविड सेंटर भेजा जा रहा है। भवाली व ओखलकांडा क्षेत्र में भी कोरोना के छह से दस केस रोजाना आ रहे हैं। सभी मरीजों को स्थानीय स्तर पर होम आइसोलेट कर दवाइयां दी जा रही हैं। सीएमओ डा. भागीरथी जोशी का कहना है कि हर क्षेत्र में सीएचसी व पीएचसी प्रभारी अपनी टीमों के साथ कोविड मरीजों के इलाज और संक्रमण की रोकथाम में लगे हुए हैं।
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