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उत्तराखंड: गैरसैंण में एक से 10 मार्च तक होगा विधानसभा सत्र, चार को त्रिवेंद्र सरकार पेश करेगी बजट

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 02 Feb 2021 10:08 PM IST
शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक
शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक - फोटो : अमर उजाला
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उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सरकार अपने कार्यकाल का आखिरी बजट प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराड़ीसैंण) स्थित विधानसभा में चार मार्च को पेश करेगी। प्रदेश मंत्रिमंडल ने गैरसैंण-भराड़ीसैंण में एक से 10 मार्च तक विधानसभा के बजट सत्र के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में पांच प्रमुख प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जिनमें से एक प्रस्ताव को स्थगित कर दिया गया।

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बैठक के बाद शासकीय प्रवक्ता व वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने लिए गए फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने गैरसैंण भराड़ीसैंण में विधानसभा का बजट सत्र आहूत करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह सत्र एक से दस मार्च तक चलेगा। 10 दिन के सत्र में दो दिन सत्र नहीं चलेगा। पहले दिन राज्यपाल का बजट अभिभाषण होगा और अगले दो दिन परिचर्चा के बाद इसे पारित कराने के लिए लाया जाएगा। चार मार्च को प्रदेश सरकार बजट पेश करेगी। इसके बाद बजट पर चर्चा होगी।


जलजीवन मिशन के लिए 97 पदों का ढांचा मंजूर
कैबिनेट ने जलजीवन मिशन को प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू करने केे लिए 97 पदों के ढांचे के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने 129 पदों के ढांचे का प्रस्ताव रखा था। लेकिन कैबिनेट ने वित्त विभाग की सिफारिश पर पदों में कटौती करते हुए 97 अस्थायी पदों को ही सृजित करने की मंजूरी दी। ये सभी पद योजना की अवधि तक के लिए होंगे और इन्हें किसी भी दशा अन्य योजनाओं में समायोजित नहीं किया जाएगा।

जिला स्वच्छता मिशन समितियों में नामित सदस्य भी
कैबिनेट ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में गठित जिलास्तरीय जल एवं स्वच्छता मिशन समितियों के पुनर्गठन प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके तहत अब इन समितियों में संबंधित सांसद या केंद्रीय मंत्री, विधायक या मंत्री के नामित सदस्य भी समिति के सदस्य बन सकेंगे।

अधीनस्थ सेवा चयन आयोग करेगा चयन व डीपीसी
उत्तराखड पुलिस उप निरीक्षक और निरीक्षक (नागरिक पुलिस/अभिसूचना) सेवा के तहत चयन और डीपीसी उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से होगी। कैबिनेट ने (संशोधित) नियमावली को मंजूरी दे दी है। 

अग्निशमन कर्मियों की संशोधित सेवानियमावली टली
बैठक में उत्तराखंड अग्निशमन आपात सेवा अधीनस्थ अधिकारी व कर्मचारी सेवा संशोधन नियमावली का प्रस्ताव भी आया था। इसे अगली कैबिनेट के लिए स्थगित कर दिया गया है।

बजट सत्र के लिए स्पीकर और डिप्टी स्पीकर ने की मंत्रणा

बजट सत्र की तैयारी को लेकर मंगलवार को विधानमंडल भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान से मंत्रणा की। इस बार का बजट सत्र ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में एक मार्च से होना है।

बता दें कि बजट सत्र भराड़ीसैंण विधानसभा में कराए जाने के मुख्यमंत्री के एलान के बाद ही विधानसभा अध्यक्ष ने विधानसभा के अधिकारियों को तैयारी के संबंध में दिशा-निर्देश दे दिए थे।

मंगलवार को विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान ने अग्रवाल से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान दोनों नेताओं ने आगामी बजट सत्र की तैयारियों पर चर्चा की। इस दौरान उपाध्यक्ष ने पहाड़ों में जिला विकास प्राधिकरणों को समाप्त किए जाने की घोषणा का स्वागत किया।

उन्होंने इसके लिए विधानसभा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री का आभार प्रकट किया। विधानसभा अध्यक्ष ने ही पीठ से पहाड़ों में जिला विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली को लेकर विधायक चंदन राम दास की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने प्राधिकरणों को समाप्त करने की सिफारिश की थी। विधानसभा अध्यक्ष ने कमेटी की सिफारिशों को कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को भेजा था।

कुंभ के स्वरूप पर निर्णायक वार्ता करे सरकार

अखिल भारतीय श्रीपंच रामानंदीय खाकी अखाड़ा के महंत मोहनदास ने कहा है कि कुंभ मेले के स्वरूप को लेकर राज्य सरकार को संतों के साथ वार्ता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बैरागी कैंप क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं जल्द नहीं दी गई तो संत आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। 

पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और भारतीय संस्कृति का सबसे बड़ा पर्व कुंभ मेला 12 वर्ष बाद होता है। श्रद्धालुओं की आशाएं सनातन संस्कृति से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं की भावना आहत न हों सरकार को ध्यान देना चाहिए।

श्रीमहंत मोहनदास ने मेला प्रशासन पर बैरागी कैंप क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बैरागी संत लाखों की संख्या में कुंभ मेले में देशभर से हरिद्वार आते हैं। उनके लिए व्यवस्थाएं जुटाना सरकार का दायित्व है। धर्म आस्था के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि वृंदावन कुंभ के बाद वैष्णव संत हरिद्वार आएंगे। इसके बाद भी यदि व्यवस्था मेला प्रशासन की ओर से नहीं की जाती है, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। सरकार कोरोना काल में अपनी रैलियां कर सकती है तो फिर कुंभ के आयोजन को लेकर संतों की आस्था के साथ छेड़छाड़ क्यों की जा रही है। उन्होंने कहा कि संतों ने आंदोलन किया तो सरकार को संभालना मुश्किल होगा।
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