उत्तराखंड : खानपुर के विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन की वापसी क्या है आप का इफैक्ट?

न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 25 Aug 2020 11:52 AM IST
कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन
कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन - फोटो : File Photo
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खानपुर के विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन की वापसी की एक वजह क्या आम आदमी पार्टी की सक्रियता भी रही है? यह प्रश्न सियासी हलकों में गर्म रहा। दरअसल, आप सुप्रीमो व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उत्तराखंड में सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान किया है। उनके इस एलान के बाद से उत्तराखंड की सियासत में खासी हलचल है।
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आप नेताओं की ओर से लगातार ये बयान आ रहे हैं कि कई विधायक उनके संपर्क में हैं। इनमें भाजपा के विधायकों के संपर्क में होने का दावा भी किया जा रहा है। सोमवार को चैंपियन की वापसी के दौरान यह प्रश्न भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत के समक्ष भी उठा। हालांकि भगत ने इस संभावना को सिरे से खारिज कर दिया।


उन्होंने कहा कि पार्टी का कोई विधायक किसी के संपर्क में नहीं है। कहने को किसी का मुंह नहीं बंद किया जा सकता है, लेकिन सच्चाई यही है कि भले ही कोई भी पार्टी चुनाव लड़े, भाजपा शीर्ष पर ही रहेगी। सियासी हलकोें में यह चर्चा भी है कि आम आदमी पार्टी की चैंपियन पर निगाह थी।

हरिद्वार में जिन बड़े नेताओं को आप साधना चाहती है, उनमें चैंपियन का नाम भी लिया जा रहा था। अब जिस नाटकीय ढंग से चैंपियन की भाजपा में वापसी हुई, उसे हरिद्वार जिले की राजनीति के लिहाज से सुनियोजित रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

पार्टी में वापसी से पहले सीएम से मिले चैंपियन

भाजपा में वापसी करने से पहले खानपुर विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन ने मुख्यमंत्री के दरबार में हाजिरी लगाई। वह प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बंशीधर भगत के साथ मुख्यमंत्री से मिले। इस बारे में जब पूछा गया तो मुख्यमंत्री ने कहा कि चैंपियन अपनी विधानसभा के कार्यों को लेकर मिले थे।

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी से निष्कासित होने के बाद से ही प्रणव चैंपियन मुख्यमंत्री से मिलने के लिए चक्कर लगा रहे थे। लेकिन उन्हें खास तरजीह नहीं मिल रही थी। पूरे एक साल का वनवास भोगने के बाद जब चैंपियन के आचरण की देख परख हो गई तब जाकर उन्हें पार्टी में लाने का विचार बना। कोर ग्रुप की बैठक में भी अधिकांश सदस्यों ने उनकी वापसी के प्रस्ताव पर हामी भरी थी।

हालांकि राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी चैंपियन की वापसी के पक्ष में नहीं माने जा रहे थे। उनकी नाराजगी को लेकर सोशल मीडिया में खबरें भी पहुंची। बलूनी की नाराजगी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा तक पहुंच गई थी। लेकिन कोर ग्रुप के फैसले के आगे बलूनी की नाराजगी असरदार नहीं हो पाई। चैंपियन की वापसी तय हो जाने के बाद वह सुबह प्रदेश अध्यक्ष के साथ मुख्यमंत्री के आवास में पहुंचे जहां उन्होंने उनसे शिष्टाचार भेंट की। 

कुमाऊं के एक विधायक व नेता भी विरोध में

पार्टी से जुड़े सूत्रों की मानें तो विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन के विरोध में कुमाऊं के एक वरिष्ठ भाजपा विधायक व एक वरिष्ठ नेता भी विरोध में थे। दोनों ने प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत से अपना विरोध दर्ज करा दिया था।

इसलिए जरूरी हैं चैंपियन

हरिद्वार में क्षेत्रीय व जातीय समीकरणों को साधने के लिए भाजपा को चैंपियन की जरूरत है। दिसंबर में हरिद्वार में पंचायत चुनाव हैं और खुद चैंपियन दावा कर रहे हैं जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी भाजपा को उनके समर्थन से मिली। खानपुर विधानसभा में भाजपा के पास चैंपियन का कोई विकल्प नहीं हैं। सियासी जानकारों का मानना है कि जातीय समीकरणों को साधने के लिए पार्टी को चैंपियन के लिए दरवाजे खोलने पड़े।
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