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कर्मचारी संगठनों के तेवर तल्ख: उत्तराखंड में डाउन ग्रेड-पे पर बढ़ी रार, कैबिनेट के फैसले पर अडिग सरकार

अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 08 Aug 2022 08:55 PM IST
सार

सरकार के फैसले को लेकर आशंकित कर्मचारी संगठनों के तेवर लगातार तीखे होते जा रहे हैं। अब डिप्लोमा इंजीनियरों ने भी इस पर मोर्चा खोल दिया है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने भी आगाह किया है कि यदि सेवारत कर्मचारियों के हितों पर ग्रेड-पे के फैसले की आंच आई तो वह भी विरोध करने से नहीं हिचकेगी।

कर्मचारियों में नाराजगी
कर्मचारियों में नाराजगी - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार

डाउन ग्रेड-पे पर छिड़ी रार के बीच उत्तराखंड सरकार कैबिनेट के फैसले से पीछे हटती नजर नहीं आ रही है। हालांकि अभी तक कैबिनेट नोट के आधार पर शासनादेश जारी नहीं हुआ है और इस मसले पर वह उच्च स्तर से होने वाले निर्णय का इंतजार है। उधर, सरकार के फैसले को लेकर आशंकित कर्मचारी संगठनों के तेवर लगातार तीखे होते जा रहे हैं। अब डिप्लोमा इंजीनियरों ने भी इस पर मोर्चा खोल दिया है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने भी आगाह किया है कि यदि सेवारत कर्मचारियों के हितों पर ग्रेड-पे के फैसले की आंच आई तो वह भी विरोध करने से नहीं हिचकेगी।

विवाद क्यों?

पिछले दिनों प्रदेश मंत्रिमंडल ने फैसला लिया कि राज्य सरकार व उसके सार्वजनिक उपक्रमों व अन्य संस्थाओं में जो कार्मिक भर्ती से सेवा में आएंगे, उनका वेतनमान केंद्र सरकार के संवर्गों से अधिक नहीं होगा। यह फैसला केंद्र सरकार के संवर्गों से अधिक वेतनमान ले रहे राज्य सरकार के संवर्गों के अफसरों को नागवार गुजरा। कर्मचारी आंदोलित हैं।

फैसले की जरूरत क्यों?

सीमित वित्तीय संसाधनों के कारण प्रदेश सरकार पर अपने खर्चों को कम करने और आय बढ़ाने का भारी दबाव है। इस वेतन विसंगति से सरकार को यह आशंका है कि भविष्य में अन्य संवर्गों के कर्मचारी भी अपना वेतनमान बढ़ाने की मांग कर सकते हैं। भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार अभी से मितव्ययिता के उपाय तलाश रही है।

फैसला क्यों लटका?

वेतन विसंगति समिति की सिफारिश पर कैबिनेट में लिए गए इस फैसले की प्रेस ब्रीफिंग में जानकारी संभवत: इसलिए नहीं दी गई थी कि सरकार को भी इसे लेकर विवाद होने की आशंका थी। लेकिन सचिवालय संघ ने इस फैसले का खुलासा किया और आंदोलन की धमकी दे डाली। मुख्यमंत्री के दखल के बाद वित्त और कार्मिक विभाग के अधिकारियों और सचिवालय संघ के पदाधिकारियों के बीच वार्ता हुई। विवाद और ज्यादा गहराने की संभावना के मद्देनजर फैसला लटक गया।

सरकार का दावा, सेवारत कर्मचारियों के हित प्रभावित नहीं होंगे

प्रदेश सरकार का दावा है कि ग्रेड-पे से जुड़े फैसले से सेवारत कर्मचारियों के हित प्रभावित नहीं होंगे। यह फैसला केवल नए कार्मिकों पर ही लागू होगा।

हित नहीं होंगे प्रभावित, ये गारंटी दे सरकार : जोशी

फैसले का विरोध कर रहे सचिवालय संघ के अध्यक्ष दीपक जोशी का कहना है कि सरकार यह गारंटी दे कि सेवारत कर्मचारियों के हित प्रभावित नहीं होंगे। उन्होंने आशंका जाहिर की कि फैसले को लेकर स्पष्टता नहीं है। सरकार को इसे स्पष्ट करना होगा।

कर्मचारियों के हित प्रभावित हुए विरोध करेंगे: पांडेय

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अरुण पांडेय ने कहा कि सरकार को कैबिनेट का फैसला लागू करने से पहले इसे लेकर बने भ्रम को दूर करना चाहिए। कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों को बुलाकर चर्चा करनी चाहिए। यदि सेवारत कर्मचारियों के हित प्रभावित होंगे तो परिषद इसका विरोध करेगी।

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